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भवन हैंडओवर हुआ नहीं, शुरू कर दी गई कक्षाएं
Updated Mon, 01 Jan 2018 11:41 PM IST
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अहरौला। पूर्ववर्ती सपा सरकार में जिले को राजकीय महिला महाविद्यालय की सौगात मिली थी। 2014 में निर्माण शुरू हुआ और जुलाई 2016 सत्र से इस परिसर में कक्षाएं भी शुरू कर दी गई। चुनाव की तिथियां घोषित होने के चलते आधे अधूरे भवन परिसर में महाविद्यालय चलने तो लगा लेकिन आज तक भवन हैंडओवर नहीं हो सका है।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत अहरौला के समदी गांव में राजकीय महिला महाविद्यालय स्थापना की घोषणा की थी। अगस्त 2014 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री बलराम यादव ने निर्माण कार्य की आधारशिला भी रखी। विद्यालय भवन के लिए 11.10 करोड़ का बजट था और अगस्त 2016 तक निर्माण पूरा कर हैंडओवर करने का लक्ष्य निर्धारित था। विधान सभा चुनाव की तिथियां नजदीक आ जाने के चलते बिना कार्य पूरा और भवन के हैंडओवर हुए बिना ही जुलाई 2016 से ही महाविद्यालय को शुरू कर दिया। राजकीय महाविद्यालय अबंारी के कुछ शिक्षकों को यहां से अटैच कर दिया गया और वहीं के प्राचार्य को यहां का प्रभारी बना दिया गया। सरकार की जल्दबाजी का परिणाम प्रवेश लेने वाली छात्राओं को तो भुगतना पड़ा वहीं विद्यालय भवन अधूरा पड़ा है। प्रथम सत्र की छात्राओं को किसी तरह डिग्री तो मिल गई लेकिन छात्रवृति से सभी वंचित रह गई। इसे पीछे कारण महाविद्यालय का छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर रजिस्टर न होना था और यह भवन के हैंडओवर न होने के कारण ही था। प्राचार्य डॉ. अजय मिश्रा ने बताया कि भवन में मानक के विपरीत कार्य हुआ है, जिसके चलते चाहरदीवारी एक साल के अंदर ही गिर गई, वहीं परिसर में बनी पानी टंकी भी लिकेज है। आधे अधूरे निर्माण के बीच कार्यदायी संस्था हैंडओवर लेने का दबाव बना रही है लेकिन निर्माण कार्य पूरा न होने के चलते वे भवन का हैंडओवर नहीं ले रहे है।
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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत अहरौला के समदी गांव में राजकीय महिला महाविद्यालय स्थापना की घोषणा की थी। अगस्त 2014 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री बलराम यादव ने निर्माण कार्य की आधारशिला भी रखी। विद्यालय भवन के लिए 11.10 करोड़ का बजट था और अगस्त 2016 तक निर्माण पूरा कर हैंडओवर करने का लक्ष्य निर्धारित था। विधान सभा चुनाव की तिथियां नजदीक आ जाने के चलते बिना कार्य पूरा और भवन के हैंडओवर हुए बिना ही जुलाई 2016 से ही महाविद्यालय को शुरू कर दिया। राजकीय महाविद्यालय अबंारी के कुछ शिक्षकों को यहां से अटैच कर दिया गया और वहीं के प्राचार्य को यहां का प्रभारी बना दिया गया। सरकार की जल्दबाजी का परिणाम प्रवेश लेने वाली छात्राओं को तो भुगतना पड़ा वहीं विद्यालय भवन अधूरा पड़ा है। प्रथम सत्र की छात्राओं को किसी तरह डिग्री तो मिल गई लेकिन छात्रवृति से सभी वंचित रह गई। इसे पीछे कारण महाविद्यालय का छात्रवृत्ति की वेबसाइट पर रजिस्टर न होना था और यह भवन के हैंडओवर न होने के कारण ही था। प्राचार्य डॉ. अजय मिश्रा ने बताया कि भवन में मानक के विपरीत कार्य हुआ है, जिसके चलते चाहरदीवारी एक साल के अंदर ही गिर गई, वहीं परिसर में बनी पानी टंकी भी लिकेज है। आधे अधूरे निर्माण के बीच कार्यदायी संस्था हैंडओवर लेने का दबाव बना रही है लेकिन निर्माण कार्य पूरा न होने के चलते वे भवन का हैंडओवर नहीं ले रहे है।
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