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गबरघिचोर की प्रस्तुति ने दर्शकों को झकझोरा
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आजमगढ़। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं जिला प्रशासन की ओर से सूत्रधार संस्थान के संयोजन में चार दिवसीय चतुरंग नाट्य उत्सव का शुभारंभ बुधवार को शारदा टाकीज में हुआ। पहले दिन रंगसमूह पटना के कलाकारों ने भिखारी ठाकुर के प्रसिद्ध लोक नाटक गबरघिचोर का भावपूर्ण मंचन किया। नाटक के संदेश को कलाकारों ने अपने अभिनय में बखूबी पिरोकर दर्शकों को झकझोर दिया।
न्याय के लिए पांच साल के गबरघिचोर को भरी पंचायत में तीन टुकड़ों में बांटने का फैसला हुआ। इसलिए क्योंकि उसके दो बाप और एक मां थी। सभी उस पर अपना हक मांग रहे थे। पंच के इस अविवेक निर्णय पर मां की ममता जाग उठती है और वो गुहार लगाती है कि दोनों पिता में से किसी एक को बेटे को जिंदा सौंप दिया जाए। अंत में ममता की जीत होती है। नाटक के जरिये ये संदेश दिया गया कि संतान सिर्फ मां की संपत्ति है। पिता तो सिर्फ माध्यम है। चार दिवसीय इस नाट्य उत्सव का उद्घाटन सांसद नीलम सोनकर, संस्कृति केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर और डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने किया। नाटक में प्रमुख भूमिका संतोष मेहरा, निशा कुमारी, सुशांत चक्रवर्ती, कुमार उदय सिंह, अभिषेक राज, रौशन कुमार ने निभाई। युवा निर्देशक स्वरम उपाध्याय का सधा हुआ निर्देशन दर्शकों को बांधने में सफल रहा। प्रकाश परिकल्पना विनय कुमार की रही। ढोलक पर रिंकू मिश्रा, नगाड़े पर विनोद पंडित, इफेक्ट निहाल निर्मल का रहा। हारमोनियम पर मुहम्मद आसिफ रहे। इस सूत्रधार के अध्यक्ष डॉ. सीके त्यागी, नित्यानन्द, अलका सिंह, प्रवीण सिंह, विवेक पांडेय, शिखा मौर्या, अंगद कश्यप, रंजीत, रितेश रंजन आदि लोग मौजूद रहे। गुरुवार शाम दिल्ली की प्रस्तुति नाटक नेटुआ की होगी।
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न्याय के लिए पांच साल के गबरघिचोर को भरी पंचायत में तीन टुकड़ों में बांटने का फैसला हुआ। इसलिए क्योंकि उसके दो बाप और एक मां थी। सभी उस पर अपना हक मांग रहे थे। पंच के इस अविवेक निर्णय पर मां की ममता जाग उठती है और वो गुहार लगाती है कि दोनों पिता में से किसी एक को बेटे को जिंदा सौंप दिया जाए। अंत में ममता की जीत होती है। नाटक के जरिये ये संदेश दिया गया कि संतान सिर्फ मां की संपत्ति है। पिता तो सिर्फ माध्यम है। चार दिवसीय इस नाट्य उत्सव का उद्घाटन सांसद नीलम सोनकर, संस्कृति केंद्र के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर और डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने किया। नाटक में प्रमुख भूमिका संतोष मेहरा, निशा कुमारी, सुशांत चक्रवर्ती, कुमार उदय सिंह, अभिषेक राज, रौशन कुमार ने निभाई। युवा निर्देशक स्वरम उपाध्याय का सधा हुआ निर्देशन दर्शकों को बांधने में सफल रहा। प्रकाश परिकल्पना विनय कुमार की रही। ढोलक पर रिंकू मिश्रा, नगाड़े पर विनोद पंडित, इफेक्ट निहाल निर्मल का रहा। हारमोनियम पर मुहम्मद आसिफ रहे। इस सूत्रधार के अध्यक्ष डॉ. सीके त्यागी, नित्यानन्द, अलका सिंह, प्रवीण सिंह, विवेक पांडेय, शिखा मौर्या, अंगद कश्यप, रंजीत, रितेश रंजन आदि लोग मौजूद रहे। गुरुवार शाम दिल्ली की प्रस्तुति नाटक नेटुआ की होगी।
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