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जिला योजना : ऊंट के मुंह में मिल रहा जीरा
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:55 PM IST
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आजमगढ़। प्रदेश सरकार सबका साथ सबका विकास की बात तो कर रही है, लेकिन 10 विधानसभा वाले इतने बड़े जिले में जिला योजना के नाम पर जो धनराशि आवंटित की जा रही है, वो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। ये सही है कि आवंटित धनराशि को लगभग सभी विभाग खर्च कर चुकेहैं, लेकिन सच्चाई ये भी है कि वर्ष 2017-18 के लिए जिला योजना में प्रस्तावित धनराशि के सापेक्ष आधी से कम धनराशि अभी तक आवंटित हुई है। जिला योजना में 46 विभागों की ओर से 5.81 अरब रुपये का प्रस्ताव विकास के लिए तैयार किया गया था। वित्तीय वर्ष 2017-18 समाप्ति की ओर से है मात्र 2.33 अरब रुपये ही अवमुक्त किए गए हैं। आधे से भी कम पैसे में कितना विकास होगा इसकी अंदाजा लगाया जा सकता है।
वर्ष 2017-18 में कुल 46 विभागों की ओर से 5. 81 अरब से जनपद में विकास का खाका तैयार किया गया। इस बजट का प्रस्ताव तैयार कर शासन के पास भेज दिया गया। शासन से बजट मिलने के बाद इस पैसे का उनमें वितरण कर विकास के कार्य कराए जाने थे। लेकिन वित्तीय वर्ष 2017-18 समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। अभी तक शासन की ओर से 2.33 अरब रुपये ही अवमुक्त किए गए हैं। जिसके कारण विभागों द्वारा तैयार किए गए विकास कार्यों पर कोई कार्य नहीं हो सका। कई विभाग तो ऐसे भी रहे जिनके लिए शासन से कोई धन ही अवमुक्त नहीं किया गया। वहीं शासन ने जिन विभागों को धन का आवंटन किया था उनमें से सभी विभाग उस धन को खर्च कर चुके हैं। जिसके पास थोड़ा बहुत पैैसा बचा है वह नाममात्र का है। गन्ना, लघु एवं सीमांत किसान सहायता, पशुपालन, दुग्ध विकास, वन विभाग, ग्राम्य विकास, मनरेगा, पंचायती राज, लघु सिंचाई, सड़क एवं पुल, पर्यावरण, प्राथमिक शिक्षा, प्रादेशिक विकास दल, ग्रामीण स्वच्छता, प्रधानमंत्री आवास आदि के लिए आधी या उससे कम धनराशि आवंटित हुई है।
इन्होंने नहीं भेजा प्रस्ताव
आजमगढ़। जिला योजना समिति की बैठक में उद्यान, सहकारिता, रेशम उद्योग, बाल विकास पुष्टाहार विभाग ऐसे हैं जिन्होंने जिला योजना में बजट के लिए प्रस्ताव ही पेश नहीं किया था।
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प्रस्ताव के बाद इन्हें नहीं मिला बजट
प्रस्ताव पेश करने के बाद सामुदायकि विकास कार्यक्रम, वैकल्पिक उर्जा, विज्ञान एवं प्राद्योगिकी, पर्यटन, माध्यमिक शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, खेलकूद, एलोपैथिक, परिवार कल्याण, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, नगरीय एवं ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, अनुसूचित, पिछड़ी और अल्पसंख्यक जाति कल्याण, महिला कल्याण के लिए शासन से बजट का आवंटन ही नहीं किया गया।
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वर्ष 2017-18 में कुल 46 विभागों की ओर से 5. 81 अरब से जनपद में विकास का खाका तैयार किया गया। इस बजट का प्रस्ताव तैयार कर शासन के पास भेज दिया गया। शासन से बजट मिलने के बाद इस पैसे का उनमें वितरण कर विकास के कार्य कराए जाने थे। लेकिन वित्तीय वर्ष 2017-18 समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। अभी तक शासन की ओर से 2.33 अरब रुपये ही अवमुक्त किए गए हैं। जिसके कारण विभागों द्वारा तैयार किए गए विकास कार्यों पर कोई कार्य नहीं हो सका। कई विभाग तो ऐसे भी रहे जिनके लिए शासन से कोई धन ही अवमुक्त नहीं किया गया। वहीं शासन ने जिन विभागों को धन का आवंटन किया था उनमें से सभी विभाग उस धन को खर्च कर चुके हैं। जिसके पास थोड़ा बहुत पैैसा बचा है वह नाममात्र का है। गन्ना, लघु एवं सीमांत किसान सहायता, पशुपालन, दुग्ध विकास, वन विभाग, ग्राम्य विकास, मनरेगा, पंचायती राज, लघु सिंचाई, सड़क एवं पुल, पर्यावरण, प्राथमिक शिक्षा, प्रादेशिक विकास दल, ग्रामीण स्वच्छता, प्रधानमंत्री आवास आदि के लिए आधी या उससे कम धनराशि आवंटित हुई है।
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इन्होंने नहीं भेजा प्रस्ताव
आजमगढ़। जिला योजना समिति की बैठक में उद्यान, सहकारिता, रेशम उद्योग, बाल विकास पुष्टाहार विभाग ऐसे हैं जिन्होंने जिला योजना में बजट के लिए प्रस्ताव ही पेश नहीं किया था।
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प्रस्ताव के बाद इन्हें नहीं मिला बजट
प्रस्ताव पेश करने के बाद सामुदायकि विकास कार्यक्रम, वैकल्पिक उर्जा, विज्ञान एवं प्राद्योगिकी, पर्यटन, माध्यमिक शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, खेलकूद, एलोपैथिक, परिवार कल्याण, होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक, नगरीय एवं ग्रामीण पेयजल आपूर्ति, अनुसूचित, पिछड़ी और अल्पसंख्यक जाति कल्याण, महिला कल्याण के लिए शासन से बजट का आवंटन ही नहीं किया गया।