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इंद्र की बेरूखी से किसानों में छाई मायूसी
Updated Wed, 04 Oct 2017 11:43 PM IST
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अहरौला। पूरे सितंबर माह में बारिश नहीं होने से जहां किसानों को अपनी फसलों को बचाना भारी पड़ रहा है। वहीं नहरों में पानी न होने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि अगर नहर में जल्द पानी नहीं आया तो हम लोग धरना और प्रदर्शन को बाध्य होंगे।
बताते चलें कि जुलाई माह में हुई जोरदार बारिश से किसानों ने अच्छी फसल की आस लगाई थी। बारिश के कारण अगस्त माह तक तो सबकुछ ठीक रहा। समय-समय पर इंद्रदेव बारिश करते रहे जिससे किसानों को अपनी धान की फसल में पानी चलाने की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन पूरे सितंबर माह में बारिश नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। फसल सूखने लगी ऐसे में उसे बचाने के लिए किसानों के पास ट्यूबवेल और नहर का सहारा था। बिजली की कटौती के कारण किसान ट्यूबवेल से फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहा है। अब उसके पास एक रास्ता बचता है नहर से फसलों को पानी देने का। लेकिन अहरौला क्षेत्र से होकर गुजरने वाली शारदा सहायक खंड-32 नहरके ऊपर क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत किसान आश्रित हैं। एक सप्ताह के लिए नहर में पानी आया उसके बाद से वह भी गायब है। ऐसे में किसानों की मुसीबत और बढ़ गई है। भकुही निवासी किसान दिनेश सिंह का कहना है कि अब नहर को लगातार चलाना चाहिए। किसानों की फसल पानी के अभाव में सूख रही है सूखा की स्थिति हो गई है। विजली की भी भारी किल्लत है किसान करे तो क्या करे। सीरपट्टी के किसान ओमकार पांडेय कहते हैं कि नहर के पानी पर लगभग 90 प्रतिशत किसान खेती करते हैं। हालत यह है कि फसल में बाल निकलने वाली है नहर सूखी है खेत में दरारें फट रही हैं। किसान प्रदीप सिंह, राकेश सिंह, लक्ष्मी चौबे, जिलापंचायत त्रिलोकीनाथ ने कहा कि अगर तुरंत नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो हम धरना देने को विवश होंगे।
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बताते चलें कि जुलाई माह में हुई जोरदार बारिश से किसानों ने अच्छी फसल की आस लगाई थी। बारिश के कारण अगस्त माह तक तो सबकुछ ठीक रहा। समय-समय पर इंद्रदेव बारिश करते रहे जिससे किसानों को अपनी धान की फसल में पानी चलाने की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन पूरे सितंबर माह में बारिश नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई। फसल सूखने लगी ऐसे में उसे बचाने के लिए किसानों के पास ट्यूबवेल और नहर का सहारा था। बिजली की कटौती के कारण किसान ट्यूबवेल से फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहा है। अब उसके पास एक रास्ता बचता है नहर से फसलों को पानी देने का। लेकिन अहरौला क्षेत्र से होकर गुजरने वाली शारदा सहायक खंड-32 नहरके ऊपर क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत किसान आश्रित हैं। एक सप्ताह के लिए नहर में पानी आया उसके बाद से वह भी गायब है। ऐसे में किसानों की मुसीबत और बढ़ गई है। भकुही निवासी किसान दिनेश सिंह का कहना है कि अब नहर को लगातार चलाना चाहिए। किसानों की फसल पानी के अभाव में सूख रही है सूखा की स्थिति हो गई है। विजली की भी भारी किल्लत है किसान करे तो क्या करे। सीरपट्टी के किसान ओमकार पांडेय कहते हैं कि नहर के पानी पर लगभग 90 प्रतिशत किसान खेती करते हैं। हालत यह है कि फसल में बाल निकलने वाली है नहर सूखी है खेत में दरारें फट रही हैं। किसान प्रदीप सिंह, राकेश सिंह, लक्ष्मी चौबे, जिलापंचायत त्रिलोकीनाथ ने कहा कि अगर तुरंत नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो हम धरना देने को विवश होंगे।
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