{"_id":"59c2adf34f1c1b32688b592f","slug":"121505930739-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरीज को रखा पर नहीं हुआ ड्रेसिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीज को रखा पर नहीं हुआ ड्रेसिंग
Updated Wed, 20 Sep 2017 11:35 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। सेप्टिक पीड़ित की पीड़ा को अमर उजाला की ओर से उठाने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने उसे यहां से हटाने की कार्रवाई तो रोक दी, लेकिन बुधवार को भी किसी ने सेप्टिक पीड़ित के पास जाकर उसकी मरहम पट्टी करने की जहमत नहीं उठाई। इस संबंध में उसका इलाज करने वाले सर्जन डॉ. सुभाष सिंह ने बताया कि मरीज पास जाने पर दांत से काटता है। इस कारण सभी उसके पास जाने से कतरा रहे हैं।
जिला अस्पताल में सेप्टिक से पीड़ित दिमागी रूप से बीमार युवक को 108 एंबुलेंस ने छह दिन पहले कंधरापुर क्षेत्र से लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके दोनों पैर और एक हाथ सेप्टिक की चपेट में थे। चिकित्सकों ने घाव को साफ कर मरहम पट्टी करके अस्पताल के एक कमरे में बंद कर दिया था। तबसे लेकर उसकी पट्टी भी नहीं बदली गई थी। बदबू के कारण किसी ने उधर का रूख भी करना गंवारा नहीं समझा। एक-दो दिनों में जिले के नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार आगमन को देखते हुए अस्पताल प्रशासन इससे छुटकारा पाना चाहता था। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. जीएल केशरवानी ने युवक को वहां से हटाने के लिए नगरपालिका ईओ को फोन कर वाहन की मांग कर दी थी। अमर उजाला की ओर से इस मुद्दे को उठाने के बाद मरीज को तो वहां से नहीं हटाया गया, लेकिन उसकी मरहम पट्टी बुधवार को भी नहीं हुई। इस संबंध में एसआईसी डॉ. जीएल केशरवानी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में सेप्टिक से पीड़ित दिमागी रूप से बीमार युवक को 108 एंबुलेंस ने छह दिन पहले कंधरापुर क्षेत्र से लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके दोनों पैर और एक हाथ सेप्टिक की चपेट में थे। चिकित्सकों ने घाव को साफ कर मरहम पट्टी करके अस्पताल के एक कमरे में बंद कर दिया था। तबसे लेकर उसकी पट्टी भी नहीं बदली गई थी। बदबू के कारण किसी ने उधर का रूख भी करना गंवारा नहीं समझा। एक-दो दिनों में जिले के नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव आलोक कुमार आगमन को देखते हुए अस्पताल प्रशासन इससे छुटकारा पाना चाहता था। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. जीएल केशरवानी ने युवक को वहां से हटाने के लिए नगरपालिका ईओ को फोन कर वाहन की मांग कर दी थी। अमर उजाला की ओर से इस मुद्दे को उठाने के बाद मरीज को तो वहां से नहीं हटाया गया, लेकिन उसकी मरहम पट्टी बुधवार को भी नहीं हुई। इस संबंध में एसआईसी डॉ. जीएल केशरवानी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
विज्ञापन