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'चरवाहे की औरत' के जरिए व्यक्त मन की व्यथा
Updated Sat, 24 Mar 2018 11:31 PM IST
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आजमगढ़। नगर के रैदोपुर स्थित शारदा टाकिज परिसर में सूत्रधार संस्थान द्वारा आयोजित 13वं आजमगढ़ रंग महोत्सव का शनिवार को रंगारंग आगाज भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश राय ने किया। महोत्सव के पहले दिन कलाकारों द्वारा हेनरी लासन द्वारा लिखित और डा. विधुखरे द्वारा निर्देशित नाटक चरवाहे की औरत का मंचन कर एक स्त्री के सपनों को उकेरा गया।
यह एक ऐसी औरत की कहानी है। जिसका पति चरवाहे का काम करता है। वह नगर से काफी दूर जंगलों के बीच सड़क के किनारे झुग्गी बनाकर अपने परिवार के साथ रहता है। उसे घर से बाहर गए हुए छह माह हो चुके है उसकी कोई खबर किसी को नहीं है। नाटक की कहानी उसके बच्चों द्वारा घर में सांप देखे जाने से शुरू होती है। वह औरत को घर से दूर हटाते हुए सांप को मारने का उपाय ढूंढ़ती है। जिसमें उसका साथ उसका कुत्ता देता है। रात होने के कारण वह बच्चों को रसोईघर में सुलाकर सांप के बाहर निकलने का इंतजार करती है। बैठे-बैठे वह बचपन के सपनों में खो जाती है। जिसमें वह खुद को राजकुमारी बनने का सपना देखती थी। उसका पति उसे नगर में रखेगा। इन्हीं ख्यालों में खोए हुए सुबह हो जाती है और सांप घर से बाहर निकलता है। वह कुत्ते के साथ मिलकर मार देती है। नाटक में औरत की भूमिका निशा कुमारी, मदन मोहन और सूत्रधार की भूमिका में पंकज कुमार ने कुशल मंचन किया। इस मौके पर डा. अमित सिंह, डा. खुश्बू सिंह, डा. सीके त्यागी, डा. अलका सिंह, अविनाश सिंह, तरूण राय, संदीप कुमार, रामजनम आदि उपस्थित थे।
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यह एक ऐसी औरत की कहानी है। जिसका पति चरवाहे का काम करता है। वह नगर से काफी दूर जंगलों के बीच सड़क के किनारे झुग्गी बनाकर अपने परिवार के साथ रहता है। उसे घर से बाहर गए हुए छह माह हो चुके है उसकी कोई खबर किसी को नहीं है। नाटक की कहानी उसके बच्चों द्वारा घर में सांप देखे जाने से शुरू होती है। वह औरत को घर से दूर हटाते हुए सांप को मारने का उपाय ढूंढ़ती है। जिसमें उसका साथ उसका कुत्ता देता है। रात होने के कारण वह बच्चों को रसोईघर में सुलाकर सांप के बाहर निकलने का इंतजार करती है। बैठे-बैठे वह बचपन के सपनों में खो जाती है। जिसमें वह खुद को राजकुमारी बनने का सपना देखती थी। उसका पति उसे नगर में रखेगा। इन्हीं ख्यालों में खोए हुए सुबह हो जाती है और सांप घर से बाहर निकलता है। वह कुत्ते के साथ मिलकर मार देती है। नाटक में औरत की भूमिका निशा कुमारी, मदन मोहन और सूत्रधार की भूमिका में पंकज कुमार ने कुशल मंचन किया। इस मौके पर डा. अमित सिंह, डा. खुश्बू सिंह, डा. सीके त्यागी, डा. अलका सिंह, अविनाश सिंह, तरूण राय, संदीप कुमार, रामजनम आदि उपस्थित थे।
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