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फर्जी डिग्री लगाकर ले रहे थे वेतन, अब होगी रिकवरी
Updated Mon, 19 Mar 2018 11:40 PM IST
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आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग से संचालित हरिजन बाल विद्यामंदिर सैदपुर में तैनात सहायक अध्यापक देवेंद्र कुमार सिंह की ओर से नरहेजी महाविद्यालय बलिया से निर्गत डीपीएड की फर्जी डिग्री लगातर कर प्रशिक्षित शिक्षक के वेतनमान का अहतरण किया जा रहा था। कमिश्नर से मामले की शिकायत के बाद विभाग की ओर से शिक्षक के वेतनमान पर रोक लगा दी गई थी। जांच में डिग्री के फर्जी होने की पुष्टी कर दी गई है। फर्जी डिग्री के आधार पर 2005 से प्रशिक्षित वेतनमान उठाने को सरकारी धन का गबन माना गया है। समाज कल्याण अधिकारी की ओर से वेतनमान की रिकवरी की संतुति कर दी गई है। जल्द ही रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अक्तूबर माह में भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के सदस्य अरुण कुमार सिंह ने कमिश्नर से शिकायत की थी कि हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात सहायक अध्यापक देवेंद्र कुमार सिंह की ओर से बीपीएड की फर्जी डिग्री लगाकर वेतनमान लिया जा रहा है। इसके साथ ही उनकी नियुक्ति को नियम विरुद्ध भी बताया गया था। कमिश्नर के निर्देश पर समाज कल्याण अधिकारी ने मामले की जांच विभाग की सुपरवाइजर मुक्तिनाथ सिंह और सुनील राय को सौंपी थी। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण अधिकारी को सौंप दी है। इसमें देवेंद्र की ओर से लगाई गई डीपीएड की डिग्री को अमान्य माना गया है। ये डिग्री बलिया के रसड़ा स्थित नरहेजी महाविद्यालय से निर्गत है। उक्त वर्ष में महाविद्यालय को एनसीटीई की ओर से बीपीएड के लिए अधिकृत ही नहीं किया था। हाईकोर्ट भी इसे फर्जी मान चुका है। समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह ने बताया कि बीपीएड की डिग्री फर्जी होने के कारण वर्ष 2005 से प्रशिक्षित वेतनमान उठाना सरकारी धन का गबन है। ये नियमानुसार वसूली के योग्य है। जल्द ही रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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अक्तूबर माह में भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के सदस्य अरुण कुमार सिंह ने कमिश्नर से शिकायत की थी कि हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात सहायक अध्यापक देवेंद्र कुमार सिंह की ओर से बीपीएड की फर्जी डिग्री लगाकर वेतनमान लिया जा रहा है। इसके साथ ही उनकी नियुक्ति को नियम विरुद्ध भी बताया गया था। कमिश्नर के निर्देश पर समाज कल्याण अधिकारी ने मामले की जांच विभाग की सुपरवाइजर मुक्तिनाथ सिंह और सुनील राय को सौंपी थी। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट समाज कल्याण अधिकारी को सौंप दी है। इसमें देवेंद्र की ओर से लगाई गई डीपीएड की डिग्री को अमान्य माना गया है। ये डिग्री बलिया के रसड़ा स्थित नरहेजी महाविद्यालय से निर्गत है। उक्त वर्ष में महाविद्यालय को एनसीटीई की ओर से बीपीएड के लिए अधिकृत ही नहीं किया था। हाईकोर्ट भी इसे फर्जी मान चुका है। समाज कल्याण अधिकारी राजीव रत्न सिंह ने बताया कि बीपीएड की डिग्री फर्जी होने के कारण वर्ष 2005 से प्रशिक्षित वेतनमान उठाना सरकारी धन का गबन है। ये नियमानुसार वसूली के योग्य है। जल्द ही रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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