{"_id":"5a5e43f74f1c1b8d268b4cb3","slug":"111516127223-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीरदार निरस्त कर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीरदार निरस्त कर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। निजामाबाद तहसील के परमेश्वरपुर गांव में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के द्वारा दिए गए स्वत्व के अधिकार के तहत गांव के ही हरदेव पुत्र मंगरू द्वारा पोखरी और पशुचर की जमीन पर कब्जा किया गया था। जांच में पाया गया कि भूमि ग्राम सभा के पशुचर और पोखरी खाते की भूमि है। भूमि को ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने और इस आदेश को पारित करने वाले अधिकारी, संलिप्त कर्मचारियों और लाभार्थियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश ब़ुधवार को दिया।
निजामाबाद तहसील के परमेश्वरपुर गांव में गाटा संख्या 190 जिसका क्षेत्रफल 0.143 हेक्टेअर और गाटा संख्या 191 जिसका क्षेत्रफल 1.554 हेक्टेअर पशुचर और पोखरी के खाते में दर्ज है। इस पर गांव के ही हरदेव पुत्र मंगरू ने कब्जा जमा रखा है। उक्त प्रकरण के निस्तारण के लिए चकबंदी अधिकारी से स्थलीय और अभिलेखीय जांच कराई गई। सात जून 2017 को उन्होंने अपनी जांच आख्या उपलब्ध कराई। मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंचा। जिलाधिकारी ने हरदेव पुत्र मंगरू के पक्ष में 16 अगस्त 1997 के जारी आदेश को निरस्त करते हुए उक्त भूखंड को ग्राम सभा के पोखरी और पशुचर के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने एसडीएम सदर को निर्देशित किया कि वह उक्त भूखंडों पर कब्जा प्राप्त करके उसे वास्तविक स्वरूप दें। साथ ही बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को आदेश पारित करने वाले अधिकारी, इसमें संलिप्त कर्मचारियों और लाभार्थियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्घ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
निजामाबाद तहसील के परमेश्वरपुर गांव में गाटा संख्या 190 जिसका क्षेत्रफल 0.143 हेक्टेअर और गाटा संख्या 191 जिसका क्षेत्रफल 1.554 हेक्टेअर पशुचर और पोखरी के खाते में दर्ज है। इस पर गांव के ही हरदेव पुत्र मंगरू ने कब्जा जमा रखा है। उक्त प्रकरण के निस्तारण के लिए चकबंदी अधिकारी से स्थलीय और अभिलेखीय जांच कराई गई। सात जून 2017 को उन्होंने अपनी जांच आख्या उपलब्ध कराई। मामला जिलाधिकारी न्यायालय में पहुंचा। जिलाधिकारी ने हरदेव पुत्र मंगरू के पक्ष में 16 अगस्त 1997 के जारी आदेश को निरस्त करते हुए उक्त भूखंड को ग्राम सभा के पोखरी और पशुचर के खाते में दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही उन्होंने एसडीएम सदर को निर्देशित किया कि वह उक्त भूखंडों पर कब्जा प्राप्त करके उसे वास्तविक स्वरूप दें। साथ ही बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी को आदेश पारित करने वाले अधिकारी, इसमें संलिप्त कर्मचारियों और लाभार्थियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्घ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन