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कुपोषित बच्चों के लिए आयोजित प्रशिक्षण संपन्न
Updated Fri, 29 Dec 2017 12:13 AM IST
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आजमगढ़। जनपद में समय से पूर्व पैदा हुए कुपोषित बच्चों को स्वस्थ्य रखने के लिए प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी कंगारू मदर केयर योजना के तहत विकास भवन सभागार में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार को समापन हो गया।
गुरुवार को अंतिम दिन के प्रशिक्षण में मार्टीनगंज, रानी की सराय, फूलपुर, कोयलसा, अतरौलिया, अहरौला और नगर क्षेत्र के सीडीपीओ और सुपरवाइजर शामिल हुए। जिला कार्यक्रम अधिकारी पवन कुमार यादव के नेतृत्व में संपन्न प्रशिक्षण में प्रशिक्षक सीडीपीओ फूलपुर विनीता अग्रहरि, मार्टीनगंज सतीश चंद्र, बिलरियागंज एजाज अहमद और तहबरपुर के सीडीपीओ मनोज कुमार सिंह ने प्रशिक्षण दिया। जिसमें बताया गया कि जब बच्चे समय से पहले पैदा हों तो उनकी देखभाल करने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जिस तरह से कंगारू अपने बच्चे को पेट से सटाए रखती है उसी तरह से ऐसे बच्चों की देखभाल करनी चाहिए। सबसे पहले जन्म होने के एक घंटे के अंदर बच्चे को स्तनपान कराएं। दूसरे ऐसे बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। जन्म के छह माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार देना चाहिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी पवन कुमार यादव ने सीडीपीओ और सुपरवाइजर से कहा कि इस प्रशिक्षण के बाद वह गांवों में जाएं और ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उनकी देखभाल के बारे में उनकी माताओं को जानकारी दें।
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गुरुवार को अंतिम दिन के प्रशिक्षण में मार्टीनगंज, रानी की सराय, फूलपुर, कोयलसा, अतरौलिया, अहरौला और नगर क्षेत्र के सीडीपीओ और सुपरवाइजर शामिल हुए। जिला कार्यक्रम अधिकारी पवन कुमार यादव के नेतृत्व में संपन्न प्रशिक्षण में प्रशिक्षक सीडीपीओ फूलपुर विनीता अग्रहरि, मार्टीनगंज सतीश चंद्र, बिलरियागंज एजाज अहमद और तहबरपुर के सीडीपीओ मनोज कुमार सिंह ने प्रशिक्षण दिया। जिसमें बताया गया कि जब बच्चे समय से पहले पैदा हों तो उनकी देखभाल करने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। जिस तरह से कंगारू अपने बच्चे को पेट से सटाए रखती है उसी तरह से ऐसे बच्चों की देखभाल करनी चाहिए। सबसे पहले जन्म होने के एक घंटे के अंदर बच्चे को स्तनपान कराएं। दूसरे ऐसे बच्चों का समय-समय पर टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। जन्म के छह माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार देना चाहिए। जिला कार्यक्रम अधिकारी पवन कुमार यादव ने सीडीपीओ और सुपरवाइजर से कहा कि इस प्रशिक्षण के बाद वह गांवों में जाएं और ऐसे बच्चों को चिह्नित कर उनकी देखभाल के बारे में उनकी माताओं को जानकारी दें।
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