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नवांकुर रचनाकारों ने ने प्रस्तुतियों से मनमोहा
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आजमगढ़। ‘आओ कहें दिल की बात’ कविता, लघु कथा स्पेशल कार्यक्रम में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। कैस जौनपुरी एवं मातृभारती की ओर से हाफिजपुर स्थित स्कूल में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. सोनी पांडेय ने कहा कि नए रचनाकारों की सृजनधर्मिता उन्हें ऊंचे मुकाम पर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि साहित्य को समझने के लिए धैर्य की जरूरत होती है।
डॉ. ईश्वर चंद त्रिपाठी ने कहा कि आज नकली सिक्कों से असली सिक्के समाज में अपनी पहचान खोते रहे हैं। इस मंच ने समाज के असली रचनाकारों को मंच देकर नई पहचान दिलाई है। डॉ. आरसी चौहान ने नदियां पवित्र धारा जो बही है सभ्यताओं की कलाई पर रक्षासूत्र की कलाई पर सुना कर मन मोह लिया। रचनाकारों ने अपनी कविता के माध्यम से मुद्दों को उठाया। डॉ. प्रतिभा सिंह ने ‘सुनो सिद्धार्थ’ कविता प्रस्तुत की, पंकज कुमार मिश्र ने ‘सपनों की पालकी’ कविता सुनाई। ‘कहूं क्या प्रिये याद आने लगी हो’ कविता प्रस्तुत कर राकेश कुमार पांडेय ने बड़े मार्मिक ढंग से दर्द को बयां किया। डॉ. पूजा पांडे ने ‘शर्माजी की आत्मकथा’ कविता प्रस्तुत कर मिलावटखोरों पर सवाल उठाए। तरु परणिका श्रीनेत ने भ्रूण हत्या को अपने शब्दों से बयां किया। अभिषेक सिंह नीरज ने अपनी गजल ‘मंजिल तुम पाई सफर में रह गए हम’ सुनाया। फाइन आर्ट सेंटर की निदेशक लीना मिश्रा ने भी कविता का पाठ किया। अनामिका सिंह पालीवाल ने अपनी लघु कथा सुनाई। संचालन कैश जौनपुरी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। डॉ. कौशलेंद्र मिश्र, अखिलेश चंद्र, अनीता साइलेंस, पूनम सिंह आदि रहीं।
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डॉ. ईश्वर चंद त्रिपाठी ने कहा कि आज नकली सिक्कों से असली सिक्के समाज में अपनी पहचान खोते रहे हैं। इस मंच ने समाज के असली रचनाकारों को मंच देकर नई पहचान दिलाई है। डॉ. आरसी चौहान ने नदियां पवित्र धारा जो बही है सभ्यताओं की कलाई पर रक्षासूत्र की कलाई पर सुना कर मन मोह लिया। रचनाकारों ने अपनी कविता के माध्यम से मुद्दों को उठाया। डॉ. प्रतिभा सिंह ने ‘सुनो सिद्धार्थ’ कविता प्रस्तुत की, पंकज कुमार मिश्र ने ‘सपनों की पालकी’ कविता सुनाई। ‘कहूं क्या प्रिये याद आने लगी हो’ कविता प्रस्तुत कर राकेश कुमार पांडेय ने बड़े मार्मिक ढंग से दर्द को बयां किया। डॉ. पूजा पांडे ने ‘शर्माजी की आत्मकथा’ कविता प्रस्तुत कर मिलावटखोरों पर सवाल उठाए। तरु परणिका श्रीनेत ने भ्रूण हत्या को अपने शब्दों से बयां किया। अभिषेक सिंह नीरज ने अपनी गजल ‘मंजिल तुम पाई सफर में रह गए हम’ सुनाया। फाइन आर्ट सेंटर की निदेशक लीना मिश्रा ने भी कविता का पाठ किया। अनामिका सिंह पालीवाल ने अपनी लघु कथा सुनाई। संचालन कैश जौनपुरी और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने किया। डॉ. कौशलेंद्र मिश्र, अखिलेश चंद्र, अनीता साइलेंस, पूनम सिंह आदि रहीं।
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