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ठंड के साथ माहू कीट और झुलसा का प्रकोप बढ़ा
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आजमगढ़। पिछले दिनों से बदली के साथ ठंड बढ़ने से सरसों में माहू कीट और आलू में पिछैती झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ा गया है। उप कृषि निदेशक कृषि रक्षा गोपाल दास गुप्ता ने किसानों को फसलों की निगरानी की सलाह दी है। इसके लिए बचाव के उपाय भी बताए हैं।
उन्होंने बताया कि यदि कीट का प्रकोप से पांच प्रतिशत पौधे प्रभावित हों तो एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर, डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी एक लीटर तथा आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी एक लीटर रसायनों में से एक को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों की नोंक एवं किनारों पर भूरे काले रंग के अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं। तीव्र प्रकोप होने पर सम्पूर्ण पौधा झुलस जाता है। इसके नियंत्रण के लिए कापरआक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी 2.5 किग्रा, मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी 2 किग्रा तथा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लूपी 2 किग्रा रसायनों में से किसी एक को 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। पाले से फसलों के बचाव के लिए फसलों की हल्की सिंचाई अवश्य कर दें। किसी भी समस्या के निदान के लिए कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी से संपर्क कर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि यदि कीट का प्रकोप से पांच प्रतिशत पौधे प्रभावित हों तो एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर, डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी एक लीटर तथा आक्सीडिमेटान मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी एक लीटर रसायनों में से एक को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों की नोंक एवं किनारों पर भूरे काले रंग के अनियमित आकार के धब्बे बनते हैं। तीव्र प्रकोप होने पर सम्पूर्ण पौधा झुलस जाता है। इसके नियंत्रण के लिए कापरआक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी 2.5 किग्रा, मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी 2 किग्रा तथा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लूपी 2 किग्रा रसायनों में से किसी एक को 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें। पाले से फसलों के बचाव के लिए फसलों की हल्की सिंचाई अवश्य कर दें। किसी भी समस्या के निदान के लिए कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी से संपर्क कर सकते हैं।
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