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फिल्म पद्मावत के विरोध में उतरे संगठन
Updated Wed, 24 Jan 2018 12:08 AM IST
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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, भारत रक्षा दल, नारी शक्ति संगठन, विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा, बजरंग दल, कायस्थ महासभा युवा, हिंदू जागरण मंच,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मंगलवार को संयुक्त रुप से फिल्म पद्मावत के विरोध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपा। संगठनों ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है।
संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि फिल्म के निदेशक ने भारतीय इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर सनातन धर्मो को नीचा दिखाने और आक्रांताओं के चरित्र को बेहतर दिखाकर कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है। इस मौके पर पवन कुमार, उषा शर्मा, रमाकांत सिंह, हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, राधा मोहन गोयल, विपुल मिश्रा, गौरव, मयंक श्रीवास्तव, आशीष सिंह, अजय यादव, नीलांबुज राय, दीना नाथ सिंह, अरुण सिंह आदि उपस्थित रहे।
संजय लीला भंसाली का फूंका पुतला
अहरौला। पद्मावत फिल्म के विरोध में हिंदू सभा से जुड़े लोगों ने मंगलवार को जुलूस निकालकर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली का चौक पर पुतला फूंका। फिल्म को देशभर में बैन करने की मांग की। इसके पहले हिंदू सभा से कार्यकर्ताओं ने पक्खनपुर, मतलूबपुर, चांदनी चौक, भोगइचा होते हुए तीन किलोमीटर लंबी निर्देशक की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली। प्रशान्त उपाध्याय, नरेन्द्र सिंह, आदर्श सिंह, गौरव सिंह, वीरेंद्र सिंह, मोनू, शिवा आदि रहे।
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नहीं करेंगे पद्मावत का प्रदर्शन
आजमगढ़। देश के अन्य प्रांतों में संजय लीला भंसाली फिल्म %पद्मावत% के विरोध का असर जनपद में भी देखने को मिल रहा है। जनपद में संचालित सिनेमाहाल मालिकों ने फिल्म का प्रदर्शन न करने का मन बनाया है। वहीं मंगलवार को %पद्मावत% के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर हिंदू संगठनों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।
रानी पद्मावती के जीवन पर आधारित इस फिल्म में उनके किरदार से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए राजस्थान सहित देश के अन्य हिस्सों में करणी सेना पहले ही आंदोलित है। करणी सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन के साथ ही कई जगहों पर उग्र प्रदर्शन भी किया जा रहा है। लेकिन अब इसकी आग जनपद में भी देखने को मिल रही है। राजपूत संगठनों के साथ हिंदूवादी संगठन भी इस आग में कूछ पड़े हैं। उनके द्वारा जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपकर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। संगठनों के दबाव के चलते जनपद में संचालित सिनेमा घर संचालकों ने फिल्म का प्रदर्शन न करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को हिंदू संगठनों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि सनातन धर्म और मर्यादा के लिए उच्चतम मानबिंदू हिंदू समाज स्थापित करता आया है। उनमें से एक आदर्श महारानी मां पद्मावती ने भी स्थापित किया। एक आदर्श भारतीय नारी, सतीत्व रक्षक, हिंदू समाज और मातृशक्ति के माथे का तिलक माता पद्मिनी ने नारी शक्तियों के साथ जौहर कर एक प्रतिमान स्थापित किया था। आज उन मर्यादाओं और मूल्यों पर संकट आ गया है। भारतीय इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर सनातन आदर्शों को नीचा दिखाने और म्लेच्छों, आक्रांताओं, लूटेरों, बलात्कारियों और बर्बर हत्यारों के चरित्र को बेहतर दिखाने की साजिश की जा रही है। जिससे जनभावना आहत हो रही है। जिसके प्रदर्शन पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपकर फिल्म के पदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई।
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संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि फिल्म के निदेशक ने भारतीय इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर सनातन धर्मो को नीचा दिखाने और आक्रांताओं के चरित्र को बेहतर दिखाकर कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है। इस मौके पर पवन कुमार, उषा शर्मा, रमाकांत सिंह, हरिकेश विक्रम श्रीवास्तव, राधा मोहन गोयल, विपुल मिश्रा, गौरव, मयंक श्रीवास्तव, आशीष सिंह, अजय यादव, नीलांबुज राय, दीना नाथ सिंह, अरुण सिंह आदि उपस्थित रहे।
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संजय लीला भंसाली का फूंका पुतला
अहरौला। पद्मावत फिल्म के विरोध में हिंदू सभा से जुड़े लोगों ने मंगलवार को जुलूस निकालकर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली का चौक पर पुतला फूंका। फिल्म को देशभर में बैन करने की मांग की। इसके पहले हिंदू सभा से कार्यकर्ताओं ने पक्खनपुर, मतलूबपुर, चांदनी चौक, भोगइचा होते हुए तीन किलोमीटर लंबी निर्देशक की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली। प्रशान्त उपाध्याय, नरेन्द्र सिंह, आदर्श सिंह, गौरव सिंह, वीरेंद्र सिंह, मोनू, शिवा आदि रहे।
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नहीं करेंगे पद्मावत का प्रदर्शन
आजमगढ़। देश के अन्य प्रांतों में संजय लीला भंसाली फिल्म %पद्मावत% के विरोध का असर जनपद में भी देखने को मिल रहा है। जनपद में संचालित सिनेमाहाल मालिकों ने फिल्म का प्रदर्शन न करने का मन बनाया है। वहीं मंगलवार को %पद्मावत% के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर हिंदू संगठनों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।
रानी पद्मावती के जीवन पर आधारित इस फिल्म में उनके किरदार से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए राजस्थान सहित देश के अन्य हिस्सों में करणी सेना पहले ही आंदोलित है। करणी सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन के साथ ही कई जगहों पर उग्र प्रदर्शन भी किया जा रहा है। लेकिन अब इसकी आग जनपद में भी देखने को मिल रही है। राजपूत संगठनों के साथ हिंदूवादी संगठन भी इस आग में कूछ पड़े हैं। उनके द्वारा जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपकर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की जा रही है। संगठनों के दबाव के चलते जनपद में संचालित सिनेमा घर संचालकों ने फिल्म का प्रदर्शन न करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को हिंदू संगठनों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि सनातन धर्म और मर्यादा के लिए उच्चतम मानबिंदू हिंदू समाज स्थापित करता आया है। उनमें से एक आदर्श महारानी मां पद्मावती ने भी स्थापित किया। एक आदर्श भारतीय नारी, सतीत्व रक्षक, हिंदू समाज और मातृशक्ति के माथे का तिलक माता पद्मिनी ने नारी शक्तियों के साथ जौहर कर एक प्रतिमान स्थापित किया था। आज उन मर्यादाओं और मूल्यों पर संकट आ गया है। भारतीय इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर सनातन आदर्शों को नीचा दिखाने और म्लेच्छों, आक्रांताओं, लूटेरों, बलात्कारियों और बर्बर हत्यारों के चरित्र को बेहतर दिखाने की साजिश की जा रही है। जिससे जनभावना आहत हो रही है। जिसके प्रदर्शन पर हर हाल में रोक लगनी चाहिए। इस दौरान राष्ट्रपति के साथ देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपकर फिल्म के पदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई।