{"_id":"5a5261f04f1c1bd5178b572e","slug":"101515348464-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक हजार से ज्यादा निर्माण अवैध, फिर भी एक भी कालोनी अवैध नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक हजार से ज्यादा निर्माण अवैध, फिर भी एक भी कालोनी अवैध नहीं
Updated Sun, 07 Jan 2018 11:41 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। विकास प्राधिकरण के ग्रीनलैंड समेत लैंड यूज के विपरीत प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियम विरुद्ध तरीके से हजारों निर्माण किए गए हैं। प्राधिकरण के खाते में भी ऐसे एक हजार से ज्यादा निर्माण दर्ज हैं, जिसमें 83 के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश भी है। इसके बाद भी शासन के अनुसार जनपद में एक भी अवैध कालोनी नहीं है। सूबे की सरकार सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अनियोजित और अवैध तरीके से बनी कालोनियों को नियमित करने के लिए नियमों में छूट देने की तैयारी में है। इसके लिए विकास प्राधिकरणों से सुझाव मांगे गए, फिर भी इन निर्माणों को नियमित कर पाना मुमकिन नहीं दिखता। क्योंकि अधिकतर निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र में हैं।
प्रदेश सरकार की ओर से सूबे के सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में अनियोजित तरीके से बसी हजारों कालोनियों नियमित करने की तैयारी में है। इसके लिए राज्य शहरी आवास एवं पर्यावास नीति-2014 में संशोधन का फैसला लिया गया है। सभी प्राधिकरण से पूछा गया है कि ऐसी कालोनियों को नियमित करने के लिए किस प्रकार के संशोधन करना चाहिए। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण के सचिव की ओर से भी सुझाव शासन को भेज दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार शासन से जारी आंकड़ों में आजमगढ़ प्राधिकरण क्षेत्र में एक भी अवैध कालोनी नहीं होने का दावा किया गया है, जबकि विभागीय आंकड़ों में ही 1060 अवैध निर्माण दर्ज हैं। 83 के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश में भी हैं। फिर भी भी इसे कालोनी का दर्ज देने के पक्ष में नहीं है। उसके अनुसार थोड़े-थोड़े निर्माण कई क्षेत्र में किए गए हैं, किसी कालोनाइजर की ओर से इसे बसाया नहीं गया है। इन्हें कालोनी नहीं माना जा सकता। वास्तविकता ये है कि प्राधिकरण की मिलीभगत से प्रतिबंधित डूब क्षेत्र और ग्रीनलैंड में कई दर्जन अवैध कालोनियां बस चुकी हैं। अवैध निर्माणों की संख्या इससे 10 गुना ज्यादा है। कोलघाट, कोलपांडेय, बागेश्वरनगर क्षेत्र, रोडवेज बाइपास के पास, हरवंशपुर का तमसा तटीय क्षेत्र, नरौली से हाईडिल चौराहे तक, भंवनरनाथ मंदिर के पास, डीएवी के पास बसीं कालोनियां इसका उदाहरण है। फितले वर्षों में ये कालोनियां बढ़ा प्रभावित भी रह चुकी हैं। इसके बाद भी मिली भगत से धड़ल्ले से निर्माण होते चले गए। फिलहाल शासन की ओर से इसे नियमित करने के लिए सुझाव जरूर मांगे गए हैं, किन लैंड यूज के विपरीत प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण होने के कारण इन्हे राहत मिलने की संभावना काफी कम दिखाई दे रही हैं। अब प्राधिकरण की नजरें शासन के आदेश पर टिकी है। इसके बाद ही ये स्पष्ट होगा कि इन कालोनियों को कितना फायदा होगा।
0000000000
मानकों ढ़िलाई के लिए गए सुझाव
आजमगढ़। सूबे की सरकार सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अनियोजित और अवैध तररी से बनी कालोनियों को नियमित करने की तैयारी में है। इसके लिए राज्य शहरी आवास एवं पर्यावास नीति-2014 में संशोधन का फैसला लिया गया है। कंपाउंडिग नियमों में अपने यहां प्राधिकरण किस प्रकार की छूट चाहता है इसके बारे में सभी से सुझाव मांगा गया है। इन सुझावों के आधार पर ही संशोधन किया जाएगा। एडीओ की ओर से भी अपने सुझावों को शासन को भेजा गया है। एडीए के सचिव बाबू सिंह ने बताया कि अवैध निर्माणों को नियमित करने से आशय मानकों में ढिलाई से हैं। सड़कों की कम चौड़ाई पर भी कमर्शियल निर्माण में छूट आदि से संबधित सुझाव भेजे गए हैं। ऐसा होता है तो कंपाउड के बाद कई लोगों को राहत मिल सकती है। सरकारी जमीन और लैंड यूज के विपरीत हुए निर्माण को छूट मिलना लगभग नामुमकिन सा है।
विज्ञापन
00000000000
शासन से अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए नीति में परिवर्तन के लिए सुझाव मांगे गए हैं। यहां कोई अवैध कालोनी नहीं हैं। एक हजार से ज्यादा अवैध निर्माण चिह्नित हैं। सड़कों की कम चौड़ाई पर भी कमर्शियल निर्माण में छूट आदि से संबधित सुझाव भेजे गए हैं। शासन के आदेश के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है।
बाबू सिंह, सचिव एडीए
विज्ञापन
प्रदेश सरकार की ओर से सूबे के सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में अनियोजित तरीके से बसी हजारों कालोनियों नियमित करने की तैयारी में है। इसके लिए राज्य शहरी आवास एवं पर्यावास नीति-2014 में संशोधन का फैसला लिया गया है। सभी प्राधिकरण से पूछा गया है कि ऐसी कालोनियों को नियमित करने के लिए किस प्रकार के संशोधन करना चाहिए। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण के सचिव की ओर से भी सुझाव शासन को भेज दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार शासन से जारी आंकड़ों में आजमगढ़ प्राधिकरण क्षेत्र में एक भी अवैध कालोनी नहीं होने का दावा किया गया है, जबकि विभागीय आंकड़ों में ही 1060 अवैध निर्माण दर्ज हैं। 83 के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश में भी हैं। फिर भी भी इसे कालोनी का दर्ज देने के पक्ष में नहीं है। उसके अनुसार थोड़े-थोड़े निर्माण कई क्षेत्र में किए गए हैं, किसी कालोनाइजर की ओर से इसे बसाया नहीं गया है। इन्हें कालोनी नहीं माना जा सकता। वास्तविकता ये है कि प्राधिकरण की मिलीभगत से प्रतिबंधित डूब क्षेत्र और ग्रीनलैंड में कई दर्जन अवैध कालोनियां बस चुकी हैं। अवैध निर्माणों की संख्या इससे 10 गुना ज्यादा है। कोलघाट, कोलपांडेय, बागेश्वरनगर क्षेत्र, रोडवेज बाइपास के पास, हरवंशपुर का तमसा तटीय क्षेत्र, नरौली से हाईडिल चौराहे तक, भंवनरनाथ मंदिर के पास, डीएवी के पास बसीं कालोनियां इसका उदाहरण है। फितले वर्षों में ये कालोनियां बढ़ा प्रभावित भी रह चुकी हैं। इसके बाद भी मिली भगत से धड़ल्ले से निर्माण होते चले गए। फिलहाल शासन की ओर से इसे नियमित करने के लिए सुझाव जरूर मांगे गए हैं, किन लैंड यूज के विपरीत प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण होने के कारण इन्हे राहत मिलने की संभावना काफी कम दिखाई दे रही हैं। अब प्राधिकरण की नजरें शासन के आदेश पर टिकी है। इसके बाद ही ये स्पष्ट होगा कि इन कालोनियों को कितना फायदा होगा।
विज्ञापन
0000000000
मानकों ढ़िलाई के लिए गए सुझाव
आजमगढ़। सूबे की सरकार सभी विकास प्राधिकरण क्षेत्र में अनियोजित और अवैध तररी से बनी कालोनियों को नियमित करने की तैयारी में है। इसके लिए राज्य शहरी आवास एवं पर्यावास नीति-2014 में संशोधन का फैसला लिया गया है। कंपाउंडिग नियमों में अपने यहां प्राधिकरण किस प्रकार की छूट चाहता है इसके बारे में सभी से सुझाव मांगा गया है। इन सुझावों के आधार पर ही संशोधन किया जाएगा। एडीओ की ओर से भी अपने सुझावों को शासन को भेजा गया है। एडीए के सचिव बाबू सिंह ने बताया कि अवैध निर्माणों को नियमित करने से आशय मानकों में ढिलाई से हैं। सड़कों की कम चौड़ाई पर भी कमर्शियल निर्माण में छूट आदि से संबधित सुझाव भेजे गए हैं। ऐसा होता है तो कंपाउड के बाद कई लोगों को राहत मिल सकती है। सरकारी जमीन और लैंड यूज के विपरीत हुए निर्माण को छूट मिलना लगभग नामुमकिन सा है।
विज्ञापन
00000000000
शासन से अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए नीति में परिवर्तन के लिए सुझाव मांगे गए हैं। यहां कोई अवैध कालोनी नहीं हैं। एक हजार से ज्यादा अवैध निर्माण चिह्नित हैं। सड़कों की कम चौड़ाई पर भी कमर्शियल निर्माण में छूट आदि से संबधित सुझाव भेजे गए हैं। शासन के आदेश के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है।
बाबू सिंह, सचिव एडीए