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Ayodhya News: महिला की आंख फोड़ने वाले को सात साल की जेल
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अयोध्या। घर के आंगन में काम कर रही महिला पर बांस से हमला करके आंख फोड़ने के दोषी करार अभियुक्त को अदालत ने सात साल के कारावास की सजा से दंडित किया गया है। अभियुक्त पर 12,000 रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम बलराम दास ने मंगलवार को सुनाया है। सजा सुनाने के बाद अभियुक्त को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में जेल भेजा गया।
अभियोजन ने बताया कि घटना पूराकलंदर क्षेत्र की वर्ष 1997 की है। 25 जून की सुबह सात बजे कर्मा कोड़री निवासी शिवप्रसाद सिंह के पुत्र अशोक कुमार की पत्नी चम्पा देवी आंगन में चावल धुल रही थीं। तभी गांव के राजकरन सिंह के लड़के अजय सिंह उर्फ गुड्डू बांस लेकर गालियां देते हुए आए और उनके सिर पर हमला कर दिया। बांस की चोट से चम्पा देवी गिर गईं। बचाने के लिए ससुर आए तो अजय ने उन्हें भी दौड़ा लिया। गांव के कई लोगों के आने से वह भाग गया था।
घटना की सूचना थाने पर दी गई तो एनसीआर में रिपोर्ट दर्ज हुई। चोटहिल चम्पा का इलाज कई अस्पतालों में कराया गया, लेकिन उनके बायें आंख की रोशनी सही नहीं हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय ने 26 जुलाई, 1997 को घटना की विवेचना समुचित धाराओं में करने का आदेश पारित किया। विवेचना के बाद अजय सिंह के विरुद्ध वर्ष 2005 में आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया। न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद सबूत व गवाहों के बयान के आधार पर दोषी करार दिया।
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कोर्ट ने दोषसिद्ध अभियुक्त अजय सिंह को आंख फोड़ने के अपराध में पांच साल के कारावास व 10,000 रुपये जुर्माना, मारपीट के मामले में एक साल के कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना, गाली-गलौज के अपराध में एक साल के कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना की सजा से दंडित किया है। जुर्माने की धनराशि में से 10,000 रुपये घायल को देने का आदेश पारित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलने के आदेश के कारण अभियुक्त को अधिकतम पांच साल जेल में निरुद्ध रहना होगा।
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अभियोजन ने बताया कि घटना पूराकलंदर क्षेत्र की वर्ष 1997 की है। 25 जून की सुबह सात बजे कर्मा कोड़री निवासी शिवप्रसाद सिंह के पुत्र अशोक कुमार की पत्नी चम्पा देवी आंगन में चावल धुल रही थीं। तभी गांव के राजकरन सिंह के लड़के अजय सिंह उर्फ गुड्डू बांस लेकर गालियां देते हुए आए और उनके सिर पर हमला कर दिया। बांस की चोट से चम्पा देवी गिर गईं। बचाने के लिए ससुर आए तो अजय ने उन्हें भी दौड़ा लिया। गांव के कई लोगों के आने से वह भाग गया था।
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घटना की सूचना थाने पर दी गई तो एनसीआर में रिपोर्ट दर्ज हुई। चोटहिल चम्पा का इलाज कई अस्पतालों में कराया गया, लेकिन उनके बायें आंख की रोशनी सही नहीं हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय ने 26 जुलाई, 1997 को घटना की विवेचना समुचित धाराओं में करने का आदेश पारित किया। विवेचना के बाद अजय सिंह के विरुद्ध वर्ष 2005 में आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया। न्यायालय ने पत्रावली पर मौजूद सबूत व गवाहों के बयान के आधार पर दोषी करार दिया।
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कोर्ट ने दोषसिद्ध अभियुक्त अजय सिंह को आंख फोड़ने के अपराध में पांच साल के कारावास व 10,000 रुपये जुर्माना, मारपीट के मामले में एक साल के कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना, गाली-गलौज के अपराध में एक साल के कारावास व एक हजार रुपये जुर्माना की सजा से दंडित किया है। जुर्माने की धनराशि में से 10,000 रुपये घायल को देने का आदेश पारित किया है। सभी सजाएं साथ-साथ चलने के आदेश के कारण अभियुक्त को अधिकतम पांच साल जेल में निरुद्ध रहना होगा।