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Ayodhya News: विस्थापित हिंदुओं की घर वापसी का आह्वान
Mon, 07 Sep 2026 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:05 PM IST
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कारसेवक पुरम स्थित सभागार में विश्व हिन्दू परिषद के 62वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में
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अयोध्या। कारसेवक पुरम सभागार में आयोजित विश्व हिंदू परिषद के 62वें स्थापना दिवस पर मुख्यवक्ता एवं विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय ने भारत में एक ऐसे समूह की बात की जो सादे कागजों पर लोगों के अंगूठे लगवाता था। इसके साथ ही, उन्होंने आंदोलन के दौरान 200 हिंदुओं को पत्र लिखकर धमकाए जाने की घटना का भी जिक्र किया। विहिप उपाध्यक्ष ने उन हिंदुओं की सम्मानजनक वापसी पर जोर दिया जो विभिन्न कारणों से अपना घर छोड़कर चले गए हैं।
उन्होंने विदेशों में रहने वाले हिंदुओं को स्थानीय कानूनों का सम्मान करते हुए मंदिर निर्माण करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि देश के 15 हजार से अधिक संतों ने जब हिंदू पर से आलस्य की राख हटाई उसकी परिणिति श्रीराम जन्म भूमि मंदिर के रूप में हुई।
बीते 200 वर्ष की चर्चा करते हुए बताया कि एक समाज ऐसा भी है जिसे अंग्रेज पानी के जहाज में भरकर विश्व के विभिन्न समुद्री टापुओं पर मजदूरी कराने ले गए और वहीं छोड़ दिया।
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वे लोग अपने साथ गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस या गीता लेकर गए। उसी पुस्तक ने उन्हें आज भी हिंदुत्व से जोड़ रखा है। वे भारत की धरती से दूर हैं, हिंदी नहीं जानते पर स्वयं को हिंदू मानते हैं। मॉरिशस, त्रिनिडाड, म्यांमार, सूरीनाम, फिजी कुछ ऐसे ही देश हैं जहां वे आज राज सत्ता संभाल रहे हैं और स्वयं को हिंदू भी मानते हैं।
चंपत राय ने बताया कि संगठन आज भारत के 75 हजार से अधिक गांवों शहरों के अलावा विश्व के 25 देशों में वहां के कायदे कानून मानते हुए काम कर रहा है। अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि हमें एक ही प्रयास में चिंतन करना चाहिए कि तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें...।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री हरिशंकर ने विषय अवधारणा प्रस्तुत की। संचालन आचार्य ऋषभ व प्रदीप ने किया।
इस अवसर पर महानगर संघ चालक विक्रमा प्रसाद पांडेय, कारसेवक पुरम प्रभारी शिवदास सिंह, क्षेत्रीय गो सेवा प्रमुख प्रेमशंकर भारद्वाज, उमेश पोरवाल, वीरेंद्र वर्मा, वेद विद्यालय के समस्त आचार्य, उपस्थित रहे।
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उन्होंने विदेशों में रहने वाले हिंदुओं को स्थानीय कानूनों का सम्मान करते हुए मंदिर निर्माण करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि देश के 15 हजार से अधिक संतों ने जब हिंदू पर से आलस्य की राख हटाई उसकी परिणिति श्रीराम जन्म भूमि मंदिर के रूप में हुई।
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बीते 200 वर्ष की चर्चा करते हुए बताया कि एक समाज ऐसा भी है जिसे अंग्रेज पानी के जहाज में भरकर विश्व के विभिन्न समुद्री टापुओं पर मजदूरी कराने ले गए और वहीं छोड़ दिया।
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वे लोग अपने साथ गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस या गीता लेकर गए। उसी पुस्तक ने उन्हें आज भी हिंदुत्व से जोड़ रखा है। वे भारत की धरती से दूर हैं, हिंदी नहीं जानते पर स्वयं को हिंदू मानते हैं। मॉरिशस, त्रिनिडाड, म्यांमार, सूरीनाम, फिजी कुछ ऐसे ही देश हैं जहां वे आज राज सत्ता संभाल रहे हैं और स्वयं को हिंदू भी मानते हैं।
चंपत राय ने बताया कि संगठन आज भारत के 75 हजार से अधिक गांवों शहरों के अलावा विश्व के 25 देशों में वहां के कायदे कानून मानते हुए काम कर रहा है। अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि हमें एक ही प्रयास में चिंतन करना चाहिए कि तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें...।
विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री हरिशंकर ने विषय अवधारणा प्रस्तुत की। संचालन आचार्य ऋषभ व प्रदीप ने किया।
इस अवसर पर महानगर संघ चालक विक्रमा प्रसाद पांडेय, कारसेवक पुरम प्रभारी शिवदास सिंह, क्षेत्रीय गो सेवा प्रमुख प्रेमशंकर भारद्वाज, उमेश पोरवाल, वीरेंद्र वर्मा, वेद विद्यालय के समस्त आचार्य, उपस्थित रहे।

कारसेवक पुरम स्थित सभागार में विश्व हिन्दू परिषद के 62वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में