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Ayodhya News: दुलार से जग रहे रामलला...भजन सुनकर कर रहे शयन
Mon, 07 Sep 2026 12:46 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 07 Sep 2026 12:46 AM IST
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रामलला की आरती करते पुजारी।
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अयोध्या। बाल स्वरूप में विराजमान रामलला की सेवा अब अधिक वात्सल्य भाव से की जा रही है। उनकी दैनिक सेवा-पद्धति में बदलाव किए गए हैं। रामलला को सुबह दुलार से जगाया जा रहा है। रात में भक्ति पद और भजन सुनाकर शयन कराया जाता है।
सरयू आरती की तर्ज पर अब गर्भगृह के बाहर से भी आरती की जा रही है। रामलला की सेवा को बाल स्वरूप के अनुरूप करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुबह जागरण के समय प्रेम और दुलार के भाव से जगाने वाले भक्ति पद गाए जाते हैं। शृंगार, भोग और अन्य सेवाओं के दौरान भी निर्धारित पदों का गायन होता है। रात में शयन आरती के समय भजन और भक्ति पदों के जरिये रामलला को शयन कराया जाता है। राम मंदिर में धार्मिक आयोजनों के प्रभारी आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया। इन बदलावों के पीछे बाल स्वरूप की सेवा का भाव प्रमुख है। उन्हें बालक मानकर जगाने, भोजन कराने और शयन कराने की परंपरा को दैनिक पूजा में प्रभावी ढंग से शामिल किया जा रहा है। प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं का तिलक लगाकर स्वागत करने की व्यवस्था पर भी सहमति बन रही है।
गर्भगृह के बाहर से 51 बत्ती की महाआरती
- रामलला की आरती व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। सरयू आरती की तर्ज पर अब गर्भगृह के बाहर से भी आरती की जा रही है। गर्भगृह के बाहर से चार पुजारी 51 बत्ती की महाआरती रामलला व राम दरबार की उतारते हें। इससे गर्भगृह के भीतर होने वाली सेवा के साथ बाहर से भी आरती का धार्मिक भाव जुड़ रहा है।
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अब पीली रेशमी पोशाक में पुजारी
- रामलला की सेवा करने वाले पुजारियों की वेशभूषा भी बदल दी गई है। जन्माष्टमी से पुजारी पीले रंग का रेशमी अचला और उत्तरीय धारण कर रहे हैं। इससे पहले वे चौबंदी पहनते थे। यह पोशाक काशी से बनकर आई है। ट्रस्ट के महासचिव गोविंददेव गिरि और धार्मिक समिति के सदस्य अधिकारी राजकुमार दास ने सभी 36 पुजारियों को ड्रेस सौंपी।
गर्भगृह में दो टॉवर एसी लगाने की तैयारी
- रामलला के गर्भगृह के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए भी तैयारी चल रही है। रात में कपाट बंद होने के दौरान प्राकृतिक हवा का आवागमन बना रहे, इसके लिए खिड़की लगाने पर विचार किया जा रहा है। गर्भगृह में दो एसी टॉवर लगाने की तैयारी है।
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सरयू आरती की तर्ज पर अब गर्भगृह के बाहर से भी आरती की जा रही है। रामलला की सेवा को बाल स्वरूप के अनुरूप करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुबह जागरण के समय प्रेम और दुलार के भाव से जगाने वाले भक्ति पद गाए जाते हैं। शृंगार, भोग और अन्य सेवाओं के दौरान भी निर्धारित पदों का गायन होता है। रात में शयन आरती के समय भजन और भक्ति पदों के जरिये रामलला को शयन कराया जाता है। राम मंदिर में धार्मिक आयोजनों के प्रभारी आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया। इन बदलावों के पीछे बाल स्वरूप की सेवा का भाव प्रमुख है। उन्हें बालक मानकर जगाने, भोजन कराने और शयन कराने की परंपरा को दैनिक पूजा में प्रभावी ढंग से शामिल किया जा रहा है। प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं का तिलक लगाकर स्वागत करने की व्यवस्था पर भी सहमति बन रही है।
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गर्भगृह के बाहर से 51 बत्ती की महाआरती
- रामलला की आरती व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। सरयू आरती की तर्ज पर अब गर्भगृह के बाहर से भी आरती की जा रही है। गर्भगृह के बाहर से चार पुजारी 51 बत्ती की महाआरती रामलला व राम दरबार की उतारते हें। इससे गर्भगृह के भीतर होने वाली सेवा के साथ बाहर से भी आरती का धार्मिक भाव जुड़ रहा है।
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अब पीली रेशमी पोशाक में पुजारी
- रामलला की सेवा करने वाले पुजारियों की वेशभूषा भी बदल दी गई है। जन्माष्टमी से पुजारी पीले रंग का रेशमी अचला और उत्तरीय धारण कर रहे हैं। इससे पहले वे चौबंदी पहनते थे। यह पोशाक काशी से बनकर आई है। ट्रस्ट के महासचिव गोविंददेव गिरि और धार्मिक समिति के सदस्य अधिकारी राजकुमार दास ने सभी 36 पुजारियों को ड्रेस सौंपी।
गर्भगृह में दो टॉवर एसी लगाने की तैयारी
- रामलला के गर्भगृह के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए भी तैयारी चल रही है। रात में कपाट बंद होने के दौरान प्राकृतिक हवा का आवागमन बना रहे, इसके लिए खिड़की लगाने पर विचार किया जा रहा है। गर्भगृह में दो एसी टॉवर लगाने की तैयारी है।