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Ayodhya News: खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए 45 पैरावेट प्रशिक्षित
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कुमारगंज। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय खुरपका-मुंहपका केंद्र की ओर से 45 पैरावेट के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह के दिशा-निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों को पशुओं में खुरपका-मुंहपका रोग की पहचान, निगरानी और बचाव की तकनीकी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के बाद अधिष्ठाता डॉ. नमिता जोशी ने प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि खुरपका-मुंहपका रोग पशुपालकों के लिए आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है। ऐसे में समय पर रोग की पहचान, वैज्ञानिक तरीके से नमूना संग्रह और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पैरावेट पशुपालकों और पशु चिकित्सा सेवाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु रोगों की समय पर पहचान और नियंत्रण में मदद मिलेगी।
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प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सीरम नमूना संग्रह की प्रक्रिया और नमूनों को सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की जानकारी दी गई। साथ ही सीरो मॉनिटरिंग और सीरो सर्विलांस की तकनीकों तथा पशुओं में रोगों की निगरानी के महत्व के बारे में भी बताया गया।
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प्रशिक्षण के बाद अधिष्ठाता डॉ. नमिता जोशी ने प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि खुरपका-मुंहपका रोग पशुपालकों के लिए आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है। ऐसे में समय पर रोग की पहचान, वैज्ञानिक तरीके से नमूना संग्रह और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि पैरावेट पशुपालकों और पशु चिकित्सा सेवाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष बनाने से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु रोगों की समय पर पहचान और नियंत्रण में मदद मिलेगी।
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प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सीरम नमूना संग्रह की प्रक्रिया और नमूनों को सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की जानकारी दी गई। साथ ही सीरो मॉनिटरिंग और सीरो सर्विलांस की तकनीकों तथा पशुओं में रोगों की निगरानी के महत्व के बारे में भी बताया गया।