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चने की फसल चट कर रही इल्ली
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sat, 20 Feb 2016 11:10 PM IST
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मौमस में नमी की मार चना और मटर पर पड़ रही है। 11 डिग्री सेल्सियस तापमान और 70 फीसदी तक नमी ने दोनों फसलों को बीमार कर दिया है। चना पर इल्ली तो मटर पर फलीछेदक और झुलसा का असर दिखने लगा है। फसलों पर फलियां लगती देख किसान कीटनाशक के प्रयोग को लेकर दुविधा में हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को चना और मटर की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दिए हैं।
चने को इल्ली से बचाने के उपाय
फरवरी माह में चने में इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है। गहरे भूरे रंग का यह कीट मुलायम और हरे पौधे को खाता है। यह कीट रात में पौधे पर अटैक करता है। सुबह तक तने को खाकर गिरा देता है। सीएसए के डा. राजेश राय ने बताया कि फसलों पर इल्ली की रोकथाम के उपाय के लिए खेतों में पानी लगा दें। इल्लियां तैरकर जमीन के ऊपर आ जातीं हैं। जिन्हें पक्षी आसानी से खा लेते हैं। इसके साथ ही दूसरा उपाय भी किसान अपना सकते हैं। शाम के समय खेत में जगह-जगह घास के ढेर लगा दें। रात में बहुत सी इल्लियां घास के नीचे छिप जाती है। जिन्हें सुबह इकट्ठा कर फेंका जा सकता है। किसान फसल में कीट नियंत्रण के लिए क्विकफास का 1.5 प्रतिशत पाउडर का छिड़काव करें।
मटर को फलीछेदक से बचाने के उपाय
इस मौसम में सफेदा और फलीछेदक फलियों में छेद कर अंदर घुसकर दानों को खाता है। यह कीट फरवरी माह में पौध पर हमलावर हो जाता है। कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश राय ने बताया कि इस कीट से प्रभावित फली को पौधे से अलग कर दें। इसके बाद कार्बाजरिल 50 डब्लू की दो किलोग्राम मात्रा का घोल बनाकर अथवा मेलाथियान का दो मिलीलीटर का घोल तैयार प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। इसी के साथ माहू का हमला दिखे तो रोगार या मेथाइल आक्सी डेमेटान की दो मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी के घोल में तैयार कर 15 लीटर के अंतराल से दो बार छिड़काव करें। फसल में झुलसा रोग नजर आने पर नीम का काढ़ा और गौमूत्र का छिड़काव पंप से करें।
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चने को इल्ली से बचाने के उपाय
फरवरी माह में चने में इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है। गहरे भूरे रंग का यह कीट मुलायम और हरे पौधे को खाता है। यह कीट रात में पौधे पर अटैक करता है। सुबह तक तने को खाकर गिरा देता है। सीएसए के डा. राजेश राय ने बताया कि फसलों पर इल्ली की रोकथाम के उपाय के लिए खेतों में पानी लगा दें। इल्लियां तैरकर जमीन के ऊपर आ जातीं हैं। जिन्हें पक्षी आसानी से खा लेते हैं। इसके साथ ही दूसरा उपाय भी किसान अपना सकते हैं। शाम के समय खेत में जगह-जगह घास के ढेर लगा दें। रात में बहुत सी इल्लियां घास के नीचे छिप जाती है। जिन्हें सुबह इकट्ठा कर फेंका जा सकता है। किसान फसल में कीट नियंत्रण के लिए क्विकफास का 1.5 प्रतिशत पाउडर का छिड़काव करें।
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मटर को फलीछेदक से बचाने के उपाय
इस मौसम में सफेदा और फलीछेदक फलियों में छेद कर अंदर घुसकर दानों को खाता है। यह कीट फरवरी माह में पौध पर हमलावर हो जाता है। कृषि वैज्ञानिक डा. राजेश राय ने बताया कि इस कीट से प्रभावित फली को पौधे से अलग कर दें। इसके बाद कार्बाजरिल 50 डब्लू की दो किलोग्राम मात्रा का घोल बनाकर अथवा मेलाथियान का दो मिलीलीटर का घोल तैयार प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। इसी के साथ माहू का हमला दिखे तो रोगार या मेथाइल आक्सी डेमेटान की दो मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी के घोल में तैयार कर 15 लीटर के अंतराल से दो बार छिड़काव करें। फसल में झुलसा रोग नजर आने पर नीम का काढ़ा और गौमूत्र का छिड़काव पंप से करें।
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