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महिलाओं के आत्मनिर्भर होने से देश के विकास को लगेंगे पंख

Tue, 08 Mar 2022 12:11 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 12:11 AM IST
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Women's self-reliance will give wings to the development of the country
औरैया। फूलमती मंदिर के पास स्थित क्रौनिक एकेडमी में सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न संगठनों से जुड़ीं महिलाएं और गृहणियां इकट्ठा हुईं। अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम में नारी सशक्तीकरण के मुद्दों पर महिलाओं ने बेबाक होकर विचार रखा।
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कहा कि नारी शिक्षा और स्वावलंबन की दिशा में सरकार और प्रशासन कई कार्य करा रहे हैं। इससे शहरों में तो पर्याप्त जागरूकता आई, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में अभी जागरूकता की कमी है। बालिकाओं को रोजगारपरक शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि मुसीबत आने पर परिवार का सहारा बन सकें। कार्यक्रम में सुमन पोरवाल, क्षमा सोनी, रश्मी भी मौजूद रहीं।
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सरकार को बालिकाओं की शिक्षा मुफ्त करनी चाहिए। कई अभिभावकों के सामने आर्थिक समस्या रहती है, जिससे वह बेटियों को आगे नहीं पढ़ा पाते है। पढ़ाई मुफ्त होगी तो बालिका शिक्षा में सुधार तो आएगा ही, साथ ही जागरूकता भी बढ़ेगी। -बबिता गुप्ता, रोहाई मोहल्ला।
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आधी आबादी अपनी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी शक्ति का डंका बजा रही है। बस जरूरत है, खुद में छिपी प्रतिभा को पहचानने व जागृत करने की। महिला किसी भी मायने में पुरुषों के कम नहीं है। पुरुष परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाएं। -युविका पोरवाल, हलवाईखाना।
अक्सर महिलाएं कई कामों को करने से पहले ही हिम्मत हार जाती हैं। उन्हें लगता है कि यह काम पुरुष ही बेहतर कर सकते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां महिलाएं उल्लेखनीय कार्य न कर रहीं हों। महिलाएं अपनी शक्ति पहचानें। -मीरा गुप्ता, गुरहाई मोहल्ला।
महिलाओं को आगे बढ़ाने की पहली जिम्मेदारी परिवार की होती है। दूसरी जिम्मेदारी शिक्षक और समाज की होती है। किसी भी काम की शुरुआत में कमी निकल सकती है, यह स्वाभाविक है। ऐसे में महिलाएं मन में धारणा बना लेती हैं कि यह काम उनके बस का था या नहीं।-एकता गुप्ता, नझाई मोहल्ला।
महिला शिक्षा वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। गांव की महिलाओं में अभी भी अधिकारों के प्रति सजगता का अभाव है। परिवार के लोग ही बालिकाओं को पढ़ाने से बचते हैं और उनकी जल्दी शादी करा देते है। बेटियां शिक्षित होंगी तो अपना अच्छा बुरा समझ सकेंगी। -लक्ष्मी गुप्ता, तुलसी ग्रुप अध्यक्ष।

पुरुषों की सोच है कि महिलाएं केवल घर के कामों के लिए बनी है। उन्हें नौकरी या व्यवसाय आदि के बारे में नहीं सोचना चाहिए। मेरे हिसाब से तो एक गृहणी कुशल प्रबंधक होती है। गृह कार्यों का प्रबंधन और परिवार के सभी लोगों को साथ लेकर चलने की क्षमता बड़ा गुण है। -तृप्ति मिश्रा, शुक्लन टोला।
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