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ग्रामीण महिलाओं को कृषि के प्रति किया जागरूक
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फफूंद(औरैया)। परवाहा स्थित सरपंच समाज कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को महिला किसान दिवस मनाया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण महिला किसानों को कृषि के विभिन्न क्षेत्रों, पशुपालन व व्यवसायों में बढ़ती भागीदारी व योगदान के बारे में बताया। किसान महिलाओं ने पोषण वाटिका प्रदर्शनी भी लगाई। पोषण वाटिका के लिए 65 महिलाओं को सब्जियों के बीज दिए गए।
कृषि वैज्ञानिक अनंत कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होते हुए भी उन्हें बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अशिक्षा, अनभिज्ञता, उदासीनता और अंधविश्वास उनकी सशक्तिकरण की राह में मुश्किलें बढ़ाते हैं। कई महिलाओं ने इन बाधाओं से जूझकर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। पशु पालन वैज्ञानिक बृज विकास सिंह ने कहा कि भारत एक कृषि आधारित देश है और पशुधन क्षेत्र इसका एक अभिन्न अंग है।
गृह वैज्ञानिक डॉ. रश्मि यादव ने कहा कि वर्तमान में महिला किसान और महिला स्वयं सहायता समूहों का ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन कर आय अर्जित कर सकती हैं। मधुमक्खी पालन, मछली पालन व मुर्गीपालन में भी महिला किसानों के लिए काफी अवसर हैं। मृदा वैज्ञानिक डॉ चंदन सिंह ने कृषि में मिट्टी की जांच व सुधार के बारे में बताया। कहा कि कुपोषण के लिए मिट्टी सीधे तौर पर जिम्मेदार है। पोषण रहित मिट्टी में उगने वाले फल, फूल और अनाज में निश्चित पोषक तत्वों की कमी रहती है। केंद्र में महिलाओं द्वारा लगाई प्रदर्शनी का आकलन वैज्ञानिकों ने किया। इस दौरान उपेंद्र कुमार सिंह , जसवंत सिंह , नरेंद्र पाल, कुलदीप सिंह व अमृत पाल मौजूद रहे
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कृषि वैज्ञानिक अनंत कुमार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होते हुए भी उन्हें बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अशिक्षा, अनभिज्ञता, उदासीनता और अंधविश्वास उनकी सशक्तिकरण की राह में मुश्किलें बढ़ाते हैं। कई महिलाओं ने इन बाधाओं से जूझकर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। पशु पालन वैज्ञानिक बृज विकास सिंह ने कहा कि भारत एक कृषि आधारित देश है और पशुधन क्षेत्र इसका एक अभिन्न अंग है।
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गृह वैज्ञानिक डॉ. रश्मि यादव ने कहा कि वर्तमान में महिला किसान और महिला स्वयं सहायता समूहों का ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान है। महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन कर आय अर्जित कर सकती हैं। मधुमक्खी पालन, मछली पालन व मुर्गीपालन में भी महिला किसानों के लिए काफी अवसर हैं। मृदा वैज्ञानिक डॉ चंदन सिंह ने कृषि में मिट्टी की जांच व सुधार के बारे में बताया। कहा कि कुपोषण के लिए मिट्टी सीधे तौर पर जिम्मेदार है। पोषण रहित मिट्टी में उगने वाले फल, फूल और अनाज में निश्चित पोषक तत्वों की कमी रहती है। केंद्र में महिलाओं द्वारा लगाई प्रदर्शनी का आकलन वैज्ञानिकों ने किया। इस दौरान उपेंद्र कुमार सिंह , जसवंत सिंह , नरेंद्र पाल, कुलदीप सिंह व अमृत पाल मौजूद रहे
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