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बार्डर पार करने वालों की भीड़ देख गदर फिल्म की आई याद
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- परिवार में मां और भाइयों के साथ शिवानी। संवाद
- फोटो : AURAIYA
दिबियापुर (औरैया)। यूक्रेन में दहशत के 18 घंटे दीपेंद्र और उसके साथी कभी नहीं भुला पाएंगे। रोमानिया बार्डर पर 200 मीटर की दूरी माइनस चार डिग्री सेल्सियस में 18 घंटे में तय कर पाये। बार्डर पर भीड़ देख उनको गदर फिल्म का सीन याद आ गया था। दिल बैठा जा रहा था, पर वतन वापसी के हौसले ने उन्हें डगमगाने नहीं दिया।
गुरुवार रात लगभग डेढ़ बजे घर लौटे दीपेंद्र की परिजनों ने आरती उतारी और फूल माला से भव्य स्वागत किया। दीपेंद्र ने बताया कि केंद्र सरकार की कूटनीति की बदौलत ही यूक्रेन से छात्र-छात्राएं घर लौट पा रहे हैं। बताया कि सबसे अधिक परेशानी रोमानिया बार्डर पर हुई। बार्डर पर छोटा सा गेट था और भीड़ हजारों में थी। सभी यूक्रेन से बाहर निकलना चाहते थे। निकलने की जल्दबाजी में कई बार भगदड़ और अफरातफरी हुई। लोग एक दूसरे के ऊपर आ गिरे। कई छात्राएं भी दब गईं। काफी मशक्कत के बाद उनको बाहर निकाला जा सका। बताया कि हम लोगाें ने तीन बार बार्डर पार करने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण सफल नहीं हो पाए। चौथी बार भाग्य ने साथ दिया। एक एंबुलेंस ने बार्डर पार किया तो उसके पीछे हम लोग भी बार्डर पार कर गए। बार्डर पार करने के बाद रोमानिया में सभी सुविधाएं मिलने लगीं। सरकार ने एयरलिफ्ट कराकर भारत लाया। नई दिल्ली से टैक्सी से घर भेजा गया। परिजन दीपेंद्र के सकुशल लौटने पर खुश दिखे। मां गीता देवी एवं परिवार की अन्य महिलाओं ने आरती उतारकर दीपेंद्र का स्वागत किया। पिता सेवानिवृत्त फौजी अरविंद राजपूत एवं अन्य लोगों ने फूल मालाओं से लाद दिया।
बिधूना (औरैया)। यूक्रेन के ओडेसा शहर स्थित नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी से एमबीबीएस चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही बिधूना की शिवानी चौहान शुक्रवार की दोपहर दो बजे घर लौटीं। उनके घर आने पर मां और भाइयों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर कोई उसे गले लगा रहा था।
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शिवानी ने बताया कि बमबारी से तबाह हो रहे यूक्रेन को अपनी आंखों से देखा है। बताया कि यूूक्रेन से रोमानिया बार्डर जाते समय बीच में यूक्रेनी सैनिकों ने उससे और साथी छात्रों से मारपीट भी की। यूक्रेन के ओडेसा शहर से 25 फरवरी को रोमानिया बार्डर के लिए निकली। 28 फरवरी को रोमानिया पहुंचने के बाद दो दिन शेल्टरहोम में रुकना पड़ा। शुक्रवार को घर पहुंचने पर सबसे पहले सऊदी अरब में रह रहे इंजीनियर पिता पुष्पेंद्र सिंह से फोन पर बात कर सकुशल घर पहुंचने की जानकारी दी। मां संगीता, भाई देवांशू और यश एवं नाना लाखन सिंह उसका स्वागत किया।
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गुरुवार रात लगभग डेढ़ बजे घर लौटे दीपेंद्र की परिजनों ने आरती उतारी और फूल माला से भव्य स्वागत किया। दीपेंद्र ने बताया कि केंद्र सरकार की कूटनीति की बदौलत ही यूक्रेन से छात्र-छात्राएं घर लौट पा रहे हैं। बताया कि सबसे अधिक परेशानी रोमानिया बार्डर पर हुई। बार्डर पर छोटा सा गेट था और भीड़ हजारों में थी। सभी यूक्रेन से बाहर निकलना चाहते थे। निकलने की जल्दबाजी में कई बार भगदड़ और अफरातफरी हुई। लोग एक दूसरे के ऊपर आ गिरे। कई छात्राएं भी दब गईं। काफी मशक्कत के बाद उनको बाहर निकाला जा सका। बताया कि हम लोगाें ने तीन बार बार्डर पार करने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण सफल नहीं हो पाए। चौथी बार भाग्य ने साथ दिया। एक एंबुलेंस ने बार्डर पार किया तो उसके पीछे हम लोग भी बार्डर पार कर गए। बार्डर पार करने के बाद रोमानिया में सभी सुविधाएं मिलने लगीं। सरकार ने एयरलिफ्ट कराकर भारत लाया। नई दिल्ली से टैक्सी से घर भेजा गया। परिजन दीपेंद्र के सकुशल लौटने पर खुश दिखे। मां गीता देवी एवं परिवार की अन्य महिलाओं ने आरती उतारकर दीपेंद्र का स्वागत किया। पिता सेवानिवृत्त फौजी अरविंद राजपूत एवं अन्य लोगों ने फूल मालाओं से लाद दिया।
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बिधूना (औरैया)। यूक्रेन के ओडेसा शहर स्थित नेशनल मेडिकल यूनीवर्सिटी से एमबीबीएस चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही बिधूना की शिवानी चौहान शुक्रवार की दोपहर दो बजे घर लौटीं। उनके घर आने पर मां और भाइयों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर कोई उसे गले लगा रहा था।
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शिवानी ने बताया कि बमबारी से तबाह हो रहे यूक्रेन को अपनी आंखों से देखा है। बताया कि यूूक्रेन से रोमानिया बार्डर जाते समय बीच में यूक्रेनी सैनिकों ने उससे और साथी छात्रों से मारपीट भी की। यूक्रेन के ओडेसा शहर से 25 फरवरी को रोमानिया बार्डर के लिए निकली। 28 फरवरी को रोमानिया पहुंचने के बाद दो दिन शेल्टरहोम में रुकना पड़ा। शुक्रवार को घर पहुंचने पर सबसे पहले सऊदी अरब में रह रहे इंजीनियर पिता पुष्पेंद्र सिंह से फोन पर बात कर सकुशल घर पहुंचने की जानकारी दी। मां संगीता, भाई देवांशू और यश एवं नाना लाखन सिंह उसका स्वागत किया।