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औरैयाः यमुना का जलस्तर घटा तो धसकने लगी मिट्टी
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खेतों में भरे बाढ़ के पानी में डूबीं फसलें। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। यमुना नदी का जलस्तर कम होने के साथ ही मिट्टी की धसकने लगी है। रविवार को गोहानी कलां संपर्क मार्ग किनारे मिट्टी धसकने से पुलिया के पास गहरा गड्ढा बन गया है। पानी भरा होने से गड्ढे की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाया है। बाढ़ के पानी में अभी सैकड़ों एकड़ फसल डूबी है।
यमुना का जलस्तर बढ़ने से सदर व अजीतमल तहसील क्षेत्र के 28 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया था। शनिवार को नदी का जलस्तर 112 मीटर के ऊपर पहुंच गया था। रविवार से जलस्तर में गिरावट आने से किनारे बसे लोगों ने राहत की सांस ली है। खेतों में पानी भरा होने सैकड़ों एकड़ ज्वार, बाजरा, सरसों व मक्के की फसल अभी भी पानी में डूबी है। किसान पिछले साल की तरह बाढ़ के साथ आई रेत से खेतों में जमा होने की आशंका से परेशान हैं। रेत जमा होने से अगले फसल भी नहीं ले पाएंगे।
एक साल तक किसान नहीं कर सके थे फसलों की बुआई
पिछले वर्ष यमुना नदी में आई बाढ़ ने सदर तहसील व अजीतमल तहसील के 28 गांवों में भयंकर तबाही मचाई थी। बाढ़ जाने के बाद अजीतमल तहसील क्षेत्र के जुहीखा व गूंज गांव स्थित खेतों में चार फीट तक बालू छोड़ गई थी। बिना रॉयल्टी के बालू खेतों से न हट पाने की वजह से किसान अपने खेतों में फसल की बुआई भी नहीं कर सके थे।
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यमुना का जलस्तर बढ़ने से सदर व अजीतमल तहसील क्षेत्र के 28 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया था। शनिवार को नदी का जलस्तर 112 मीटर के ऊपर पहुंच गया था। रविवार से जलस्तर में गिरावट आने से किनारे बसे लोगों ने राहत की सांस ली है। खेतों में पानी भरा होने सैकड़ों एकड़ ज्वार, बाजरा, सरसों व मक्के की फसल अभी भी पानी में डूबी है। किसान पिछले साल की तरह बाढ़ के साथ आई रेत से खेतों में जमा होने की आशंका से परेशान हैं। रेत जमा होने से अगले फसल भी नहीं ले पाएंगे।
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एक साल तक किसान नहीं कर सके थे फसलों की बुआई
पिछले वर्ष यमुना नदी में आई बाढ़ ने सदर तहसील व अजीतमल तहसील के 28 गांवों में भयंकर तबाही मचाई थी। बाढ़ जाने के बाद अजीतमल तहसील क्षेत्र के जुहीखा व गूंज गांव स्थित खेतों में चार फीट तक बालू छोड़ गई थी। बिना रॉयल्टी के बालू खेतों से न हट पाने की वजह से किसान अपने खेतों में फसल की बुआई भी नहीं कर सके थे।
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