फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   We are alive only because of the tricolor

तिरंगे की बदौलत ही हम जिंदा हैं

Thu, 03 Mar 2022 11:38 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 11:38 PM IST
विज्ञापन
We are alive only because of the tricolor
फोटो03एयूआरपी 24- पुत्र पुष्पेंद्र से वीडियो काल के माध्यम से बात करते पिता सुरेंद्र बाबू राठौर व म? - फोटो : AURAIYA
औरैया। यूक्रेन के डेनप्रो में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे पुष्पेंद्र वतन वापसी की आस में रोमानिया के शेल्टरहोम में ठहरे हैं। वे बताते हैं कि आज हम तिरंगे की बदौलत ही जिंदा हैं।
विज्ञापन

रूस के हमले से यूक्रेन में हालात बहुत ही खराब हैं। वहां फंसे छात्र-छात्राएं सहमे हैं। इन्हीं हालातों के बीच उन्हें तिरंगे की ताकत भी देखने को मिली। यूक्रेन के डेनप्रो में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर एमडी में प्रवेश को तैयारी कर रहे अजीतमल क्षेत्र के गांव मनसुखपुर निवासी पुष्पेंद्र राठौर ने वीडियो काल से बताया कि 24 फरवरी से रूस ने बम और मिसाइलों से हमला शुरू कर दिया था। तब हमें इतना अंदाजा नहीं था हालात इतने खराब हो जाएंगे, क्योंकि जहां बमबारी हो रही थी, हम उससे लगभग 600 किलोमीटर दूर थे।
विज्ञापन

इसी बीच भारत सरकार की एडवाइजरी जारी की गई, जिसमें सभी से वापस आने को कहा गया। बताया कि वह सोमवार को बस से रोमानिया बार्डर पहुंचे। बस में लगभग 50 छात्र-छात्राएं थे। इसमें हमारे साथ पढ़ने वाले 10 छात्र-छात्राएं साउथ अफ्रीका के थे। उनको बस में सबसे पीछे बिठाया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीच में रूसी सैनिकों ने बस की चेकिंग भी की थी। इससे साउथ अफ्रीका के छात्र-छात्राएं सहम भी गए, क्योंकि रूस के सैनिकों को केवल भारतीय लोगों के ही बस में होने की जानकारी दी गई थी। सैनिकों ने बस में आगे की सीटों पर बैठे छात्र-छात्राओं के कागजात भी चेक किए। बस में तिरंगा झंडा लगा था। इस कारण रूसी सैनिकों ने बहुत ज्यादा चेकिंग नहीं की।

...पर मां को तसल्ली नहीं होती
मां मुन्नी देवी राठौर से जब यूक्रेन से बेटे की वापसी में हो रही परेशानी पर बात की तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। कहा कि आदमी तो दिलदार होता है, लेकिन मां क्या करे। जब तक बेटा पास नहीं आ जाता तब तक दिमाग में उलझन ही बनी हुई है। खाने-पीने का मन नहीं करता। रात-रात भर नींद नहीं आती है। पिता सुरेंद्र बाबू राठौर ने बताय कि वह खेती करते हैं। बेटा पुष्पेंद्र यूक्रेन में एमबीबीएस करने गया था। बताया कि पुष्पेंद्र तीन पुत्रों में सबसे छोटा है। एक बेटा मुंबई में और दूसरा दिल्ली में व्यापार करता है।

फोटो03एयूआरपी 25- पुत्र के यूक्रेन में विषम परिस्थितियों में होने पर मां मुन्नी देवी की आंखों से बह?

फोटो03एयूआरपी 25- पुत्र के यूक्रेन में विषम परिस्थितियों में होने पर मां मुन्नी देवी की आंखों से बह?- फोटो : AURAIYA

फोटो03एयूआरपी 27- मंगलवार की शाम रोमानियां पहुंचने के दौरान बस में दोस्तों के साथ सेल्फी लेते पुष्प

फोटो03एयूआरपी 27- मंगलवार की शाम रोमानियां पहुंचने के दौरान बस में दोस्तों के साथ सेल्फी लेते पुष्प- फोटो : AURAIYA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed