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Auraiya News: सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट स्कूल वाहन
Sun, 26 Apr 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 26 Apr 2026 12:14 AM IST
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औरैया। नौनिहालों की सुरक्षा को ताक पर रखकर डग्गामार और अनफिट स्कूली वाहन फर्राटा भर रहे हैं। गर्मी और तपती धूप के बीच इन वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि स्कूल प्रबंध समितियां सब कुछ जानकर भी अनजान बनी हुई हैं।
एक माह पहले तक जिले में 46 स्कूली वाहन अनफिट पाए गए थे। अप्रैल माह में परिवहन विभाग के विशेष चेकिंग अभियान के बाद यह संख्या घटकर अब 20 के करीब रह गई है। हालांकि, अभी भी ये 20 से अधिक वाहन सड़कों दौड़ रहे हैं, जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इन स्कूली वाहनों की स्थिति बेहद दयनीय है। मानकों के विपरीत चल रहे इन वाहनों में न तो स्पीड गवर्नर काम कर रहे हैं और न ही जीपीएस सिस्टम लगा है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को यह भी पता नहीं चल पाता कि वाहन किस गति से चल रहा है या उसकी लोकेशन क्या है।
वहीं, गर्मी में क्षमता से अधिक बच्चे होने के कारण वाहन के भीतर सांस लेना तक दूभर हो जाता है, जिससे मासूमों की सेहत बिगड़ने का खतरा बना रहता है।
परिवहन विभाग के अनुसार स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन व्यावसायिक में दर्ज होना चाहिए, जिससे उनकी पहचान स्कूल वाहन के रूप में हो। जिले में 200 से अधिक ऐसे वाहन ऑटो, ई-रिक्शा आदि से ढोया जा रहा है।
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जिले के स्कूली वाहन
कुल स्कूली वाहन- 438
बड़ी बसें- 123
छोटी गाड़ियां (वैन/मैजिक)- 315
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ये है अनिवार्य
-स्पीड गवर्नर, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे।
-स्कूली बसों के लिए अधिकतम गति सीमा 40-60 किमी/घंटा तय।
-बसों में रिफ्लेक्टिव टेप, आपातकालीन सायरन, पैनिक बटन और खिड़कियों पर ग्रिल होना आवश्यक है।
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परिवहन विभाग लगातार अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान चला रहा है। जो भी वाहन मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा।
-एनसी शर्मा, एआरटीओ
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एक माह पहले तक जिले में 46 स्कूली वाहन अनफिट पाए गए थे। अप्रैल माह में परिवहन विभाग के विशेष चेकिंग अभियान के बाद यह संख्या घटकर अब 20 के करीब रह गई है। हालांकि, अभी भी ये 20 से अधिक वाहन सड़कों दौड़ रहे हैं, जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इन स्कूली वाहनों की स्थिति बेहद दयनीय है। मानकों के विपरीत चल रहे इन वाहनों में न तो स्पीड गवर्नर काम कर रहे हैं और न ही जीपीएस सिस्टम लगा है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को यह भी पता नहीं चल पाता कि वाहन किस गति से चल रहा है या उसकी लोकेशन क्या है।
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वहीं, गर्मी में क्षमता से अधिक बच्चे होने के कारण वाहन के भीतर सांस लेना तक दूभर हो जाता है, जिससे मासूमों की सेहत बिगड़ने का खतरा बना रहता है।
परिवहन विभाग के अनुसार स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन व्यावसायिक में दर्ज होना चाहिए, जिससे उनकी पहचान स्कूल वाहन के रूप में हो। जिले में 200 से अधिक ऐसे वाहन ऑटो, ई-रिक्शा आदि से ढोया जा रहा है।
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जिले के स्कूली वाहन
कुल स्कूली वाहन- 438
बड़ी बसें- 123
छोटी गाड़ियां (वैन/मैजिक)- 315
ये है अनिवार्य
-स्पीड गवर्नर, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे।
-स्कूली बसों के लिए अधिकतम गति सीमा 40-60 किमी/घंटा तय।
-बसों में रिफ्लेक्टिव टेप, आपातकालीन सायरन, पैनिक बटन और खिड़कियों पर ग्रिल होना आवश्यक है।
परिवहन विभाग लगातार अनफिट वाहनों के खिलाफ अभियान चला रहा है। जो भी वाहन मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा।
-एनसी शर्मा, एआरटीओ