{"_id":"c23195df6ec946ff8b5130dfa1f61df9","slug":"two-headed-baby-died-in-negligence-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लापरवाही में चल बसा दो सिर वाला बच्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लापरवाही में चल बसा दो सिर वाला बच्चा
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sun, 17 Jan 2016 11:01 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिसका डर था वही हुआ। नर्सिंग होम वालों की लापरवाही से दो सिर वाला बच्चा तीस घंटे भी जिंदा नहीं रह सका। बच्चे के जन्म के साथ शुरू हुई लापरवाही उसकी मौत तक जारी रही। हद यह कि इस बच्चे को किसी बाल रोग विशेषज्ञ तक को नहीं दिखाया गया। अब औरैया के सीएमओ डॉ. एसबी मिश्रा का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। जिन डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा को देखा उनसे पूछताछ होगी। साथ ही नर्सिंगहोम में सुविधाओं की जांच कर उसके संचालक से पूछताछ की जाएगी। जो दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
कानपुर देहात के ग्राम जशापुर समदलपुर के सतीश तिवारी की पत्नी अनीता देवी ने शनिवार सुबह नमक फैक्ट्री चौराहा स्थित स्टार मेडिकल सेंटर में दो सिर वाले बच्चे को जन्म दिया। उसे औरैया के मां सरोज देवी नर्सिंग होम से एंबुलेंस से लेकर लोग यहां आए थे। जन्म के दो घंटे के भीतर ही नर्सिंग होम वाले जच्चा-बच्चा को औरैया लेकर चले गए। यहां तक कि बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ तक को नहीं दिखाया। औरैया में रविवार दोपहर 12.30 बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया।
रुपये के खेल में व्यवस्था फेल
छोटे शहरों में गली-गली खुले नर्सिंग होम रुपयों के लिए मरीजों की जान लेने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। झोलाछाप के सहारे चल रहे इन नर्सिंग होम में मरीजों को कम रुपये खर्च का लालच देकर ले आया जाता है। यही झोलाछाप या ज्यादा से ज्यादा बीएएमएस डिग्री वाले डॉक्टर मरीजों को देखते हैं। मामला हाथ से निकलता दिखता है तो सेटिंग वाले बड़े डॉक्टरों के पास मरीजों को पहुंचाया जाता है। दो सिर वाले बच्चे के मामले में भी यही हुआ।
विज्ञापन
दोपहर तक डाक्टरों ने नहीं देखा
दो सिर वाले बच्चे के पिता सतीश तिवारी ने बताया कि अस्पताल के डाक्टरों ने बच्चे के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई। बच्चे को लगातार निगरानी में नहीं रखा। रविवार को दोपहर के 12 बजे तक कोई डाक्टर उसका परीक्षण करने को नहीं आया। अनीता को अभी बच्चे की स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है।
हम तैयार थे
मैं छुट्टी पर था लेकिन जैसे ही दो सिर वाले बच्चे के बारे में जानकारी मिली तत्काल अपने जूनियर डॉक्टरों को निर्देश दे दिया था कि जैसे ही बच्चा आए उसे एसएनसीयू में भर्ती कर तत्काल इलाज शुरू करें। बच्चे को कई तरह की दिक्कतें रही होंगी लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि कम से कम उसका इलाज तो हुआ होता। वह बच्चा हमारे लिए भी खास था। उसकी मौत से बहुत दुख हुआ।
डॉ. यशवंत राव, विभागाध्यक्ष, बाल रोग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
कम से कम एक दिन तो रखना ही चाहिए था
डिलीवरी के बाद मां की हालत ठीक थी। बच्चा थोड़ी देर बाद रोया था। वह दोनों मुंह से रोया था। मुझे नहीं पता था कि वह लोग डिलीवरी के तत्काल बाद जच्चा-बच्चा को लेकर चले जाएंगे। कम से कम एक दिन तो अस्पताल में रखना ही चाहिए था।
डॉ. अंतरा देबराय, अनीता की डिलीवरी कराने वाली
नर्सिंग होम वाले नहीं रखना चाहते थे
औरैया के नर्सिंग होम वाले जच्चा-बच्चा को मेरा यहां नहीं रखना चाहते थे। बच्चे की स्थिति देखकर बाल रोग विशेषज्ञ को बुलाने की बात की तो नर्सिंग होम से एक डॉक्टर ने कहा कि बच्चा ठीक है, औरैया में ही इलाज हो जाएगा। पिता भी यही चाहते थे। हम कर भी क्या सकते थे।
डॉ. डीके शास्त्री, एमडी, स्टार मेडिकल सेंटर, नमक फैक्ट्री चौराहो
कोट-
मेडिकल कॉलेज के सर्जन का नाम
औरैया के मां सरोज नर्सिंग होम पर बोर्ड में जिस सर्जन का नाम लिखा है वह जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में संविदा पर काम करते हैं। लोगों का कहना है कि डॉक्टर का सिर्फ नाम चलता है, वह आते नहीं हैं। यही हाल अन्य डॉक्टरों का भी है।
विज्ञापन
कानपुर देहात के ग्राम जशापुर समदलपुर के सतीश तिवारी की पत्नी अनीता देवी ने शनिवार सुबह नमक फैक्ट्री चौराहा स्थित स्टार मेडिकल सेंटर में दो सिर वाले बच्चे को जन्म दिया। उसे औरैया के मां सरोज देवी नर्सिंग होम से एंबुलेंस से लेकर लोग यहां आए थे। जन्म के दो घंटे के भीतर ही नर्सिंग होम वाले जच्चा-बच्चा को औरैया लेकर चले गए। यहां तक कि बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ तक को नहीं दिखाया। औरैया में रविवार दोपहर 12.30 बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
रुपये के खेल में व्यवस्था फेल
छोटे शहरों में गली-गली खुले नर्सिंग होम रुपयों के लिए मरीजों की जान लेने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। झोलाछाप के सहारे चल रहे इन नर्सिंग होम में मरीजों को कम रुपये खर्च का लालच देकर ले आया जाता है। यही झोलाछाप या ज्यादा से ज्यादा बीएएमएस डिग्री वाले डॉक्टर मरीजों को देखते हैं। मामला हाथ से निकलता दिखता है तो सेटिंग वाले बड़े डॉक्टरों के पास मरीजों को पहुंचाया जाता है। दो सिर वाले बच्चे के मामले में भी यही हुआ।
विज्ञापन
दोपहर तक डाक्टरों ने नहीं देखा
दो सिर वाले बच्चे के पिता सतीश तिवारी ने बताया कि अस्पताल के डाक्टरों ने बच्चे के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई। बच्चे को लगातार निगरानी में नहीं रखा। रविवार को दोपहर के 12 बजे तक कोई डाक्टर उसका परीक्षण करने को नहीं आया। अनीता को अभी बच्चे की स्थिति की जानकारी नहीं दी गई है।
हम तैयार थे
मैं छुट्टी पर था लेकिन जैसे ही दो सिर वाले बच्चे के बारे में जानकारी मिली तत्काल अपने जूनियर डॉक्टरों को निर्देश दे दिया था कि जैसे ही बच्चा आए उसे एसएनसीयू में भर्ती कर तत्काल इलाज शुरू करें। बच्चे को कई तरह की दिक्कतें रही होंगी लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि कम से कम उसका इलाज तो हुआ होता। वह बच्चा हमारे लिए भी खास था। उसकी मौत से बहुत दुख हुआ।
डॉ. यशवंत राव, विभागाध्यक्ष, बाल रोग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
कम से कम एक दिन तो रखना ही चाहिए था
डिलीवरी के बाद मां की हालत ठीक थी। बच्चा थोड़ी देर बाद रोया था। वह दोनों मुंह से रोया था। मुझे नहीं पता था कि वह लोग डिलीवरी के तत्काल बाद जच्चा-बच्चा को लेकर चले जाएंगे। कम से कम एक दिन तो अस्पताल में रखना ही चाहिए था।
डॉ. अंतरा देबराय, अनीता की डिलीवरी कराने वाली
नर्सिंग होम वाले नहीं रखना चाहते थे
औरैया के नर्सिंग होम वाले जच्चा-बच्चा को मेरा यहां नहीं रखना चाहते थे। बच्चे की स्थिति देखकर बाल रोग विशेषज्ञ को बुलाने की बात की तो नर्सिंग होम से एक डॉक्टर ने कहा कि बच्चा ठीक है, औरैया में ही इलाज हो जाएगा। पिता भी यही चाहते थे। हम कर भी क्या सकते थे।
डॉ. डीके शास्त्री, एमडी, स्टार मेडिकल सेंटर, नमक फैक्ट्री चौराहो
कोट-
मेडिकल कॉलेज के सर्जन का नाम
औरैया के मां सरोज नर्सिंग होम पर बोर्ड में जिस सर्जन का नाम लिखा है वह जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में संविदा पर काम करते हैं। लोगों का कहना है कि डॉक्टर का सिर्फ नाम चलता है, वह आते नहीं हैं। यही हाल अन्य डॉक्टरों का भी है।