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न ट्रेनों को मिला ठहराव, न शहर को मिली पटरी
अमर उजाला ब्यूरो, औरैया।
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:30 AM IST
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रेल बजट आने से पहले औरैया वासियों को कई उम्मीदें थीं, लेकिन गुरुवार को रेल मंत्री की ओर से पेश किए गए बजट से जिलेवासियों के साथ एक बार फिर छलावा हुआ।
मोदी सरकार के रेल बजट में इस बार लोगों को आशा थी कि औरैया को रेल बजट में काफी कुछ मिलेगा, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी प्रभू की रेल औरैयावासियों को ठेंगा दिखाते हुए गुजर गई। रेल बजट में औरैया जनपद को कोई लाभ न मिलने से लोगों ने कुछ इस तरह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
बीएससी के छात्र ऋषि दीक्षित का कहना है कि उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए लखनऊ प्रतिदिन आना-जाना पड़ता है। कहा कि औरैया से रेल पटरी निकलने का रेल मंत्री की ओर से अगर फरमान जारी कर दिया जाता तो कई छात्र-छात्राओं को लाभ मिल जाता, लेकिन आज के रेल बजट से लोगों की कई उम्मीदें टूट गई हैं।
शिक्षाविद् सुनील मिश्रा का कहना है कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत दिलचस्पी से एनडीए सरकार का दूसरे हाईटेक रेल बजट में भले ही भाड़ा न बढ़ाकर व्यापारियों और जन सामान्य को आर्थिक बोझ से दूर रखा गया हो, लेकिन औरैया के लोगाें के लिए प्रभू का रेल बजट निराशा का पैगाम लेकर आया है।
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पूर्व प्रधान रज्जन दीक्षित का कहना है कि रेलमंत्री की ओर से पेश किया गए बजट ने भले ही ट्रेन के किराए में कोई बढ़ोत्तरी न की हो, लेकिन औरैया शहरवासियों को सुरेश प्रभू ने निराश जरूर कर दिया। इस बार के रेल बजट से शहरवासियों की उम्मीदें जुड़ी हुई थीं।
नारायनपुर निवासी गोविंद शुक्ला का कहना है कि न ही शहर को रेल पटरी मिली और न ही अछल्दा व फफूंद रेलवे स्टेशन पर किसी ट्रेन का ठहराव मिला है। अगर औरैया शहर में रेल पटरी निकलने का प्रस्ताव पास हो जाता तो लोगों को राहत महसूस होती। अब शहरवासी सोच रहे हैं कि आखिर कब तक उनके साथ छलावा होता रहेगा।
शहर के मनोज मिश्रा का कहना है कि बजट से शहरी लोगों को रेल सुविधा प्रदत्ता होने की उम्मीदें बिखरकर रह गई हैं। प्रस्तावित परियोजना पर धूल डाली दी गई है। वहीं रेलवे रिजर्वेशन विंडो का संचालन की अपेक्षा भी धूमिल हुई है।
व्यापारी गौतम शुक्ला भी केंद्र सरकार के रेल बजट में जिले की उपेक्षा किए जाने से खुश नहीं है, कहते हैं कि शहर में रहते हुए दिशावर से माल मंगाने में अधिक धन खर्च के साथ ही अतिरिक्त जोखिम उठाना पड़ता है। शहर से ही रेल सुविधा व्यापारियों को मिलती तो व्यापार में भी तरक्की का रास्ता खुलता।
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मोदी सरकार के रेल बजट में इस बार लोगों को आशा थी कि औरैया को रेल बजट में काफी कुछ मिलेगा, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी प्रभू की रेल औरैयावासियों को ठेंगा दिखाते हुए गुजर गई। रेल बजट में औरैया जनपद को कोई लाभ न मिलने से लोगों ने कुछ इस तरह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
बीएससी के छात्र ऋषि दीक्षित का कहना है कि उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए लखनऊ प्रतिदिन आना-जाना पड़ता है। कहा कि औरैया से रेल पटरी निकलने का रेल मंत्री की ओर से अगर फरमान जारी कर दिया जाता तो कई छात्र-छात्राओं को लाभ मिल जाता, लेकिन आज के रेल बजट से लोगों की कई उम्मीदें टूट गई हैं।
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शिक्षाविद् सुनील मिश्रा का कहना है कि प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत दिलचस्पी से एनडीए सरकार का दूसरे हाईटेक रेल बजट में भले ही भाड़ा न बढ़ाकर व्यापारियों और जन सामान्य को आर्थिक बोझ से दूर रखा गया हो, लेकिन औरैया के लोगाें के लिए प्रभू का रेल बजट निराशा का पैगाम लेकर आया है।
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पूर्व प्रधान रज्जन दीक्षित का कहना है कि रेलमंत्री की ओर से पेश किया गए बजट ने भले ही ट्रेन के किराए में कोई बढ़ोत्तरी न की हो, लेकिन औरैया शहरवासियों को सुरेश प्रभू ने निराश जरूर कर दिया। इस बार के रेल बजट से शहरवासियों की उम्मीदें जुड़ी हुई थीं।
नारायनपुर निवासी गोविंद शुक्ला का कहना है कि न ही शहर को रेल पटरी मिली और न ही अछल्दा व फफूंद रेलवे स्टेशन पर किसी ट्रेन का ठहराव मिला है। अगर औरैया शहर में रेल पटरी निकलने का प्रस्ताव पास हो जाता तो लोगों को राहत महसूस होती। अब शहरवासी सोच रहे हैं कि आखिर कब तक उनके साथ छलावा होता रहेगा।
शहर के मनोज मिश्रा का कहना है कि बजट से शहरी लोगों को रेल सुविधा प्रदत्ता होने की उम्मीदें बिखरकर रह गई हैं। प्रस्तावित परियोजना पर धूल डाली दी गई है। वहीं रेलवे रिजर्वेशन विंडो का संचालन की अपेक्षा भी धूमिल हुई है।
व्यापारी गौतम शुक्ला भी केंद्र सरकार के रेल बजट में जिले की उपेक्षा किए जाने से खुश नहीं है, कहते हैं कि शहर में रहते हुए दिशावर से माल मंगाने में अधिक धन खर्च के साथ ही अतिरिक्त जोखिम उठाना पड़ता है। शहर से ही रेल सुविधा व्यापारियों को मिलती तो व्यापार में भी तरक्की का रास्ता खुलता।