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Auraiya News: सावन का पहला सोमवार आज, हिलोरे मारेगी भीड़ में जुटे भक्तों की आस्था

Sun, 02 Aug 2026 11:43 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sun, 02 Aug 2026 11:43 PM IST
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Today is the first Monday of Sawan; the faith of the gathered devotees will surge like waves.
फोटो-27- पचनद पर स्थित भारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद
औरैया। सावन का पहला सोमवार आज है। जिले के प्रमुख शिवालयों में रात से ही जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगेंगी। कांवड़ियों के साथ हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। भीड़ को देखते हुए पुलिस व प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के प्रबंध किए हैं। इसके लिए एक दिन पहले रविवार को पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने शिवालयों का जायजा लिया।
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शहर से पांच किमी दूर यमुना नदी किनारे स्थित देवकली मंदिर में गर्भगृह तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते बनाए गए हैं। इसमें एक महिलाओं के लिए दूसरी कतार पुरुषों की रहेगी। इसके अलावा एक तीसरा रास्ता कांवड़ियों के लिए सीधे गर्भगृह तक जाने का रहेगा। पावर हाउस के सामने वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा बैरिकेडिंग के जरिये आवागमन को तय किया गया है। जहां चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रहेगी। सीसीटीवी कैमरों से लेकर कंट्रोल रूम बनाया गया है।
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दमकल व चिकित्सीय सुविधा का केंद्र भी बनाया गया है। इन इंतजामों को लेकर जिलाधिकारी बृजेश कुमार व पुलिस अधीक्षक अभिषेक भारती ने रविवार दोपहर मंदिर का निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने भोलेनाथ का जलाभिषेक भी किया। उधर बिधूना के देवघट बाबा शिव मंदिर, कुदरकोट स्थित भयानकनाथ शिव मंदिर और कस्बे के वनखंडेश्वर महादेव मंदिर पर सबसे अधिक भीड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा अछल्दा रोड स्थित शिव मंदिर तथा भिखरा सरैया के फटे महादेव मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।
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आध्यात्मिक ज्ञान और तपस्या का केंद्र है भारेश्वर महादेव मंदिर

अजीतमल। पचनद पर स्थित भारेश्वर महादेव मंदिर प्राचीन काल से आध्यात्मिक ज्ञान एवं तपस्या का केंद्र रहा है। यहां औरैया इटावा व जालौन जिले के भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। मान्यता है कि विद्वान नीलकंठ ने कर्मकांड एवं दंड के 12 ग्रंथ व आयुर्वेदिक ग्रंथ इसी मंदिर में रहकर लिखे थे। तुलसीदास भी इस मंदिर में कुछ समय रहे। परमहंस गुंधारी लाल ने भारेश्वर महाराज की तपस्या कर अपना कर्म क्षेत्र गांव बड़ेरा बनाया। (संवाद)


सेठ मदनलाल ने लिया था मंदिर स्थापना का संकल्प

अजीतमल। भक्त बताते हैं कि यमुना चंबल के संगम पर विशाल भंवरें पड़ती थी। इसमें फंसने पर नाव नदी में डूब जाती थी। राजस्थान के व्यापारी मदन लाल जब अपनी नाव से माल सहित संगम पर पहुंचे तो उनकी नाव भी इस भंवर में फंस गई। इससे व्याकुल होकर उन्होंने भगवान भोले नाथ का श्रद्धा से स्मरण किया। इससे उनकी नाव भंवर से छिटककर भीम द्वारा स्थापित शिवलिंग के पास पहुंच गई। सेठ ने उनकी पूजा अर्चना के बाद में वहां भारेश्वर मंदिर की स्थापना का संकल्प लिया। (संवाद)

फोटो-27- पचनद पर स्थित भारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद

फोटो-27- पचनद पर स्थित भारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद

फोटो-27- पचनद पर स्थित भारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद

फोटो-27- पचनद पर स्थित भारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद

फोटो-27- पचनद पर स्थित भारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद

फोटो-27- पचनद पर स्थित भारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग। संवाद

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