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अवशेषों की कहानी सामने लाई सफाई

Tue, 23 Feb 2016 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Tue, 23 Feb 2016 12:06 AM IST
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The story brought before the cleaning residue
सफाई के बाद ऐतिहासिक गौरैया तालाब ऐतिहासिक अवशेषों की हकीकत बयां कर रहा है। एक ओर तालाब पर बने पांच-पांच घाट जहां इसकी विशालता को दर्शा रहे हैं। वहीं इसमें पानी भरने के लिए बनाए गए विशेष राउंड पाइप अपनी अलग कहानी कह रहे हैं। वहीं इतिहास के जानकारों का कहना है कि पूर्व में इस तरह के राउंड पाइप तालाब में फिल्टर पानी को भरने के लिए बनाए जाते थे।
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गौरैया तालाब अब तब पुरातत्व विभाग की अनदेखी का शिकार बना हुआ है। तालाब पर लगे शिलालेख पर दर्ज ऐतिहासिक संवत 1434 में निर्मित तालाब व मंदिर की कहानी कह रहा है। जिसमें मारवाड़ी भाषा में मंदिर व तालाब का उल्लेख है। तालाब की ओर नजर डाले तो इसमें बजाय चार घाट होने के पांच घाट निर्मित हैं। जो तालाब की विशेषता प्रदर्शित कर रहे हैं।
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तालाब की सफाई होने के बाद इसमें जो अवशेष दिखने लगे हैं उससे पुरातन काल के इस तालाब की बनावट और उसकी महत्ता निकल कर सामने आ रही है। तालाब के पश्चिमी दिशा में ईट से निर्मित पांच मीटर लंबा पाइप जो पूर्व दिशा में पहुंचकर सीधे तालाब में खुलता है एक विशेष प्रकार के यंत्र के रुप में दिखाई देता है।
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इस संबंध में इतिहास के जानकार अविनाश अग्निहोत्री बताते हैं कि पुरातन काल में इस तरह के पाइप की बनावट उन्हीं स्थानों पर की जाती थी जहां पर पानी को फिल्टर करके जमा करने का काम किया जाता था। इस तालाब में पांच तरफ घाट बनाए गए हैं। जबकि तालाब को भरने के लिए सिर्फ एक पाइप के दूसरा कोई भी रास्ता नहीं बनाया गया है। इससे यह बात भी साफ हो जाती है कि इस तालाब के पानी का उपयोग पेयजल के लिए भी किया जाता रहा होगा।


ऐसे में इस तालाब को पुरातत्व विभाग को अपने संरक्षण में लेकर इसको वृहद रूप से पर्यटन के रुप में विकसित किया जाना चाहिए। वहीं शिलालेख के मुताबिक 1434 संवत के तहत तालाब व गौरैया मंदिर आज से लगभग 1413 इस्वीं पूर्व का निर्मित बताया जा रहा है। हालांकि जिला प्रशासन की निगेहबानी के बाद पालिका प्रशासन तालाब के जीर्णोद्धार के लिए नक्शा तैयार करने के बाद इस्टीमेट तैयार करने में जुटा हुआ है।
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