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एक हफ्ते बाद शुरू होगा आनेपुर बिजली केंद्र
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Mon, 11 Apr 2016 12:30 AM IST
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स्विच यार्ड में लगी पैनल मशीन
- फोटो : amar ujala beuro
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लंबे इंतजार के बाद बिजली आपूर्ति करने को तैयार 132 केवी देवकली बिजली उप संस्थान से बिजली आपूर्ति में अभी एक सप्ताह का समय और लगेगा। वजह सबस्टेशन से आनेपुर बिजली केंद्र तक खींची जा रही लाइन में अभी काम बाकी है। इसके अलावा केंद्र के ब्रेकर सिस्टम भी अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हो सके हैं। वहीं यह सबस्टेशन कई मायनों में अलग स्थान रखता है। स्कैडा तकनीकी पर आधारित देवकली बिजली उप संस्थान जिले का पहला कंप्यूटराइज्ड बिजली स्टेशन है। इससे फाल्ट की स्थिति में नुकसान कम होगा।
जिले में देवकली मंदिर के पास निर्मित 132 केवी बिजली उप संस्थान अभी एक केंद्र को आपूर्ति देने को तैयार हो गया है। केंद्र पर लगे 20-20 एमवीए के ट्रांसफार्मरों में एक ट्रांसफार्मर चार्ज होकर आपूर्ति के लिए तैयार है। जबकि दूसरे ट्रांसफार्मर पर कनेक्शन करके उसको चार्ज किया जा रहा है। इस संबंध में जेई सुरेंद्र सिंह व टीजीटू सुरेंद्र कुमार ने बताया कि स्कैडा तकनीकी पर आधारित 132 केवी बिजली उप संस्थान जिले का पहला कंप्यूटराइज्ड केंद्र है।
इसकी विशेषता है कि अन्य 132 बिजली केंद्रों में एक ही रूम में अन्य मशीनरी के साथ पैनल लगाए जाते हैं। जबकि देवकली केंद्र पर सभी पैनलों को अलग-अलग स्विच यार्ड में लगाया गया है। इससे फाल्ट होने पर अन्य कोई भी मशीनरी प्रभावित न हो। बताया कि फाल्ट आने पर स्वत: ही आपूर्ति ट्रिप हो जाएगी। जिसको पता करने के लिए पैनल स्विच यार्ड तक जाने की जरूरत नहीं है। बल्कि परिसर में बने कंप्यूटर रूम से ही कमी का पता चल जाएगा। जिससे समय रहते ही फाल्ट को दूर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि परिसर में लगा दूसरा ट्रांसफार्मर अभी चार्ज किया जाना शेष है। फिलहाल अभी एक ट्रांसफार्मर ही चार्ज होकर बिजली आपूर्ति देने की स्थिति में तैयार है। जबकि दूसरे को चालू होने मेें अभी दो-तीन दिन का समय लग जाएगा।
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चार माह में तैयार होने वाला प्रदेश का पहला सबस्टेशन
देवकली 132 केवी बिजली उप संस्थान पर मौजूद कार्यदाई संस्था कात्यायनी कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर स्वदेश पचौरी ने बताया कि पूरे प्रदेश में बनाए गए 132 केवी बिजली उप संस्थानाें में यह पहला बिजली केंद्र है जो चार माह में बनकर संचालन की स्थिति में पहुंच गया है। वहीं इस केंद्र के निर्माण में नई तकनीकियों का उपयोग किया गया है। जिससे अन्य जगह बनाए गए केंद्रों की अपेक्षा इस बिजली उप संस्थान में बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं।
उप संस्थान से जोड़े जाने वाले आनेपुर बिजली केंद्र को शुरू करने से पूर्व लाइन को चालू कर उसकी टेस्टिंग की जाएगी। वहीं आनेपुर बिजली केंद्र को चालू होने में कम से कम एक हफ्ते का समय लग जाएगा। देवकली बिजली उप संस्थान से आनेपुर बिजली केंद्र तक बनाई गई 33 केवीए की लाइन के बीच में पड़ने वाली जगह पर कुछ विवाद होने के चलते एक तार नहीं बिछाया जा सका है। अभी इस केंद्र पर लोड शुरू करने में समय लग जाएगा।
पंकज शर्मा, एक्सईएन, डिस्ट्रीब्यूशन
सीएम के ऊर्जा सलाहकार के प्रयासों से मिला एनओसी
बिजली उपसंस्थान के निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर करने में मुख्यमंत्री के ऊर्जा सलाहकार कृपाल सिंह का अहम किरदार रहा। निर्माण कार्य शुरू कराने में विद्युत सुरक्षा विभाग से एनओसी न मिलने से अधिकारी परेशान थे। इसी बीच जिले के बिधूना क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने आए कृपाल सिंह से हुई अधिकारियों की वार्ता के बाद दो दिन में एनओसी जारी हो गई। जिससे निर्माण कार्य शुुरू हो सका। इस बावत सीएम के ऊर्जा सलाहकार कृपाल सिंह की अमर उजाला से फोन पर हुई वार्ता में उन्होंने बताया कि बिजली इंस्पेक्टर की ओर से निर्माण कार्य में रोड़े खड़े किए जाने पर उसको जमकर डांट पिलाई।
सुरक्षा की दृष्टि से 33 केवीए लाइन को नहीं जोड़ा गया है। केंद्र पर लगे एलोस्टोन कंपनी के पैनलों को चेक करने के लिए इंजीनियर का इंतजार किया जा रहा है। फोन पर इंजीनियर से बात हो चुकी है। वह कल आ जाएगा। उसके सामने टेस्टिंग होने के बाद ही लाइन को जोड़ा जाएगा। जिससे कोई समस्या न हो
तरुण पाठक]एसडीओ, ट्रांसमीशन
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जिले में देवकली मंदिर के पास निर्मित 132 केवी बिजली उप संस्थान अभी एक केंद्र को आपूर्ति देने को तैयार हो गया है। केंद्र पर लगे 20-20 एमवीए के ट्रांसफार्मरों में एक ट्रांसफार्मर चार्ज होकर आपूर्ति के लिए तैयार है। जबकि दूसरे ट्रांसफार्मर पर कनेक्शन करके उसको चार्ज किया जा रहा है। इस संबंध में जेई सुरेंद्र सिंह व टीजीटू सुरेंद्र कुमार ने बताया कि स्कैडा तकनीकी पर आधारित 132 केवी बिजली उप संस्थान जिले का पहला कंप्यूटराइज्ड केंद्र है।
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इसकी विशेषता है कि अन्य 132 बिजली केंद्रों में एक ही रूम में अन्य मशीनरी के साथ पैनल लगाए जाते हैं। जबकि देवकली केंद्र पर सभी पैनलों को अलग-अलग स्विच यार्ड में लगाया गया है। इससे फाल्ट होने पर अन्य कोई भी मशीनरी प्रभावित न हो। बताया कि फाल्ट आने पर स्वत: ही आपूर्ति ट्रिप हो जाएगी। जिसको पता करने के लिए पैनल स्विच यार्ड तक जाने की जरूरत नहीं है। बल्कि परिसर में बने कंप्यूटर रूम से ही कमी का पता चल जाएगा। जिससे समय रहते ही फाल्ट को दूर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि परिसर में लगा दूसरा ट्रांसफार्मर अभी चार्ज किया जाना शेष है। फिलहाल अभी एक ट्रांसफार्मर ही चार्ज होकर बिजली आपूर्ति देने की स्थिति में तैयार है। जबकि दूसरे को चालू होने मेें अभी दो-तीन दिन का समय लग जाएगा।
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चार माह में तैयार होने वाला प्रदेश का पहला सबस्टेशन
देवकली 132 केवी बिजली उप संस्थान पर मौजूद कार्यदाई संस्था कात्यायनी कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर स्वदेश पचौरी ने बताया कि पूरे प्रदेश में बनाए गए 132 केवी बिजली उप संस्थानाें में यह पहला बिजली केंद्र है जो चार माह में बनकर संचालन की स्थिति में पहुंच गया है। वहीं इस केंद्र के निर्माण में नई तकनीकियों का उपयोग किया गया है। जिससे अन्य जगह बनाए गए केंद्रों की अपेक्षा इस बिजली उप संस्थान में बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं।
उप संस्थान से जोड़े जाने वाले आनेपुर बिजली केंद्र को शुरू करने से पूर्व लाइन को चालू कर उसकी टेस्टिंग की जाएगी। वहीं आनेपुर बिजली केंद्र को चालू होने में कम से कम एक हफ्ते का समय लग जाएगा। देवकली बिजली उप संस्थान से आनेपुर बिजली केंद्र तक बनाई गई 33 केवीए की लाइन के बीच में पड़ने वाली जगह पर कुछ विवाद होने के चलते एक तार नहीं बिछाया जा सका है। अभी इस केंद्र पर लोड शुरू करने में समय लग जाएगा।
पंकज शर्मा, एक्सईएन, डिस्ट्रीब्यूशन
सीएम के ऊर्जा सलाहकार के प्रयासों से मिला एनओसी
बिजली उपसंस्थान के निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर करने में मुख्यमंत्री के ऊर्जा सलाहकार कृपाल सिंह का अहम किरदार रहा। निर्माण कार्य शुरू कराने में विद्युत सुरक्षा विभाग से एनओसी न मिलने से अधिकारी परेशान थे। इसी बीच जिले के बिधूना क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने आए कृपाल सिंह से हुई अधिकारियों की वार्ता के बाद दो दिन में एनओसी जारी हो गई। जिससे निर्माण कार्य शुुरू हो सका। इस बावत सीएम के ऊर्जा सलाहकार कृपाल सिंह की अमर उजाला से फोन पर हुई वार्ता में उन्होंने बताया कि बिजली इंस्पेक्टर की ओर से निर्माण कार्य में रोड़े खड़े किए जाने पर उसको जमकर डांट पिलाई।
सुरक्षा की दृष्टि से 33 केवीए लाइन को नहीं जोड़ा गया है। केंद्र पर लगे एलोस्टोन कंपनी के पैनलों को चेक करने के लिए इंजीनियर का इंतजार किया जा रहा है। फोन पर इंजीनियर से बात हो चुकी है। वह कल आ जाएगा। उसके सामने टेस्टिंग होने के बाद ही लाइन को जोड़ा जाएगा। जिससे कोई समस्या न हो
तरुण पाठक]एसडीओ, ट्रांसमीशन