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कानपुर की कोचिंग मंडी से संचालित हो रहा था गैंग
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दिबियापुर। पुलिस के हत्थे चढ़ा पेपर साल्वर गैंग कानपुर की कोचिंग मंडी से संचालित हो रहा था। पुलिस की जांच में एक नेता का नाम भी सामने आया है जो इस गिरोह को संरक्षण दे रहा था। कुछ और के भी शामिल होने का पता चला है। पुलिस इनकी तलाश कर रही है।
पैसों की चकाचौंध और ऊंचे ख्वाब देखकर पढ़े-लिखे युवा अंतरराज्यीय साल्वर गैंग में शामिल तो हो गए लेकिन उन्हें बाद की हकीकत का शायद अंदाजा नहीं था। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद उनके भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पकड़े गए गैंग के दिबियापुर निवासी हिमांशु बीटीसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी केके एक नामी इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। इसके अलावा अन्य आरोपियों में पवन बीएससी, ब्रजेंद्र बीएड, शुभम एमबीए, अश्वनी बीएससी, बीरू एमए, अमित एलएलबी व गौतम बीएड किए हुए है। वहीं, अक्षय 10वीं की पढ़ाई कर रहा था।
एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि पूरे गैंग का संचालन कानपुर की कोचिंग मंडी (काकादेव) से हो रहा था। गैंग में सभी का अलग-अलग काम था। जिसमें पवन का काम फर्जी तरीके से पेपर कराने का ठेका लेना था। पूछताछ में पता चला है कि पिछले तीन-चार साल में बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई अन्य गैंगों के साथ मिलकर परीक्षाओं में साल्वर बैठाए जा रहे थे। कब्जे में आई सियाज कार पवन उपयोग करता था।
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राजस्थान की रीट परीक्षा व यूपी में लेखपाल की परीक्षा में साल्वर का काम करते थे। एसपी ने बताया कि कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। जो भी शामिल होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, यह गैंग एक सफेदपोश नेता के संरक्षण में फलफूल रहा था। इसका मुख्य सरगना अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। पकड़े गए पवन के खाते से पुलिस ने 25 लाख रुपये बरामद किए हैं। इसके साथ ही अन्य आरोपियों के खाते में भी करीब 25 लाख रुपये मिले हैं।
पेपर साल्वर गैंग में शामिल सदस्य परीक्षा पास कराने और बैठाने के लिए डेढ़ से दो लाख में सौदा करते थे। परीक्षा से पूर्व 10 से 20 हजार रुपये एडवांस दिए जाते थे। आधार कार्ड में आवेदक के प्रवेश पत्र से मिलती जुलती फोटो मिक्सिंग करके साल्वर की लगाई जाती थी।
पुलिस हिरासत में आए साल्वर गैंग से पूछताछ में कुछ जिलों में नौकरी करने वाले कुछ लोगों के नाम भी सामने आए हैं। उनमें कई ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी में अच्छे पदों पर आसीन हैं। एसपी ने बताया कि औरैया, कन्नौज, कानपुर देहात के कुछ लोगों के नाम मिले हैं, उनकी जांच की जा रही है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि पवन नोएडा में डिजिटल इंडिया कंपनी चलाता है। जिसमें वह डिजिटल मार्केटिंग का काम करता था। उसने ही अपने गिरोह में कई युवाओं को जोड़ रखा था और उन्हें पेपर साल्व कराने की जानकारी देता था।
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पैसों की चकाचौंध और ऊंचे ख्वाब देखकर पढ़े-लिखे युवा अंतरराज्यीय साल्वर गैंग में शामिल तो हो गए लेकिन उन्हें बाद की हकीकत का शायद अंदाजा नहीं था। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद उनके भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पकड़े गए गैंग के दिबियापुर निवासी हिमांशु बीटीसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी केके एक नामी इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। इसके अलावा अन्य आरोपियों में पवन बीएससी, ब्रजेंद्र बीएड, शुभम एमबीए, अश्वनी बीएससी, बीरू एमए, अमित एलएलबी व गौतम बीएड किए हुए है। वहीं, अक्षय 10वीं की पढ़ाई कर रहा था।
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एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि पूरे गैंग का संचालन कानपुर की कोचिंग मंडी (काकादेव) से हो रहा था। गैंग में सभी का अलग-अलग काम था। जिसमें पवन का काम फर्जी तरीके से पेपर कराने का ठेका लेना था। पूछताछ में पता चला है कि पिछले तीन-चार साल में बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई अन्य गैंगों के साथ मिलकर परीक्षाओं में साल्वर बैठाए जा रहे थे। कब्जे में आई सियाज कार पवन उपयोग करता था।
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राजस्थान की रीट परीक्षा व यूपी में लेखपाल की परीक्षा में साल्वर का काम करते थे। एसपी ने बताया कि कई लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। जो भी शामिल होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, यह गैंग एक सफेदपोश नेता के संरक्षण में फलफूल रहा था। इसका मुख्य सरगना अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। पकड़े गए पवन के खाते से पुलिस ने 25 लाख रुपये बरामद किए हैं। इसके साथ ही अन्य आरोपियों के खाते में भी करीब 25 लाख रुपये मिले हैं।
पेपर साल्वर गैंग में शामिल सदस्य परीक्षा पास कराने और बैठाने के लिए डेढ़ से दो लाख में सौदा करते थे। परीक्षा से पूर्व 10 से 20 हजार रुपये एडवांस दिए जाते थे। आधार कार्ड में आवेदक के प्रवेश पत्र से मिलती जुलती फोटो मिक्सिंग करके साल्वर की लगाई जाती थी।
पुलिस हिरासत में आए साल्वर गैंग से पूछताछ में कुछ जिलों में नौकरी करने वाले कुछ लोगों के नाम भी सामने आए हैं। उनमें कई ऐसे हैं जो सरकारी नौकरी में अच्छे पदों पर आसीन हैं। एसपी ने बताया कि औरैया, कन्नौज, कानपुर देहात के कुछ लोगों के नाम मिले हैं, उनकी जांच की जा रही है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि पवन नोएडा में डिजिटल इंडिया कंपनी चलाता है। जिसमें वह डिजिटल मार्केटिंग का काम करता था। उसने ही अपने गिरोह में कई युवाओं को जोड़ रखा था और उन्हें पेपर साल्व कराने की जानकारी देता था।