{"_id":"6add03ca04c5cee48c0b1278","slug":"the-dream-of-a-369-crore-industrial-city-is-lost-in-potholes-auraiya-news-c-211-1-akb1003-153746-2026-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: 369 करोड़ की औद्योगिक नगरी का सपना गड्ढों में गुम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: 369 करोड़ की औद्योगिक नगरी का सपना गड्ढों में गुम
विज्ञापन
मिहौली के खेत में हुआ खनन। संवाद
औरैया। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे मिहौली व निगड़ा गांव में यूपीडा ने 369 करोड़ रुपये खर्च कर किसानों से जमीन ली थी। तब जमीन समतल थी, लेकिन यूपीडा के जमीन खरीदने के बाद बड़े स्तर पर लगभग 150 एकड़ जमीन पर अवैध खनन शुरू हो गया। बैनामे में अधिग्रहीत समतल जमीन पर अब औद्योगिक नगरी बसाने का सपना यूपीडा के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाला है। एक शिकायत के बाद अफसरों को इस अवैध खनन की भनक लग पाई है। इस मामले में एडीएम वित्त एवं राजस्व ने जांच के आदेश दिए हैं।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए यूपीडा की ओर से मिहौली गांव में फेज वन के तहत मिहौली व निगड़ा गांव के 800 से ज्यादा किसानों के बैनामा कराए गए थे। उस वक्त जब यूपीडा के अधिकारियों ने जमीन देखी थी तब जमीन समतल थी। इसके चलते जमीन को ज्यादा पसंद किया गया। इसके पीछे की वजह यह भी थी कि समतल जमीन पर खेती होती थी, इस वजह से परियोजना को उतारने में ज्यादा खर्च नहीं आएगा, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी की वजह से मिहौली गांव में जेसीबी लगाकर जमकर मिट्टी का खनन हुआ।
गाटा संख्या 394, 422, 423, 224, 425, 427, 328 सहित अन्य गाटों में चार-चार फीट तक जेसीबी से खोदाई कर दी गई है। जानकार बताते हैं कि यह मिट्टी कानपुर-इटावा हाईवे किनारे बने पेट्रोल पंप, अस्पताल सहित अन्य प्रतिष्ठानों में उपयोग की गई। मिहौली में गाटा संख्या 394 सबसे बड़ा आठ हेक्टेयर का गाटा है। इसके लिए किसान को 29 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था। वहीं, इस अवैध खनन का असर यूपीडा की परियोजना में पड़ेगा, क्योंकि करोड़ों रुपये खर्च कर पहले गड्ढों को भरवाना पड़ेगा।
विज्ञापन
इसके बाद ही डेवलपमेंट का रोडमैप बन पाएगा। ऐसे में हुए इस अवैध खनन से यूपीडा को करोड़ों की क्षति होने की आशंका जताई जा रही है। उधर, मामले की शिकायत यूपीडा के पास पहुंची तो जांच के लिए उन्होंने एडीएम वित्त एवं राजस्व को शिकायती पत्र भेज दिया है। वहां से एडीएम ने जांच सदर तहसील में भेजी है। हालांकि कब तक जांच पूरी हो पाएगी, अधिकारी स्पष्ट नहीं कर पाए।
सरकारी तंत्र पर उठ रहे सवाल
मिहौली क्षेत्र में तैनात क्षेत्रीय लेखपाल से लेकर सदर तहसील के अधिकारियों को इस खनन की भनक तक नहीं लगी। औद्योगिक गलियारे के लिए अधिग्रहीत हुई करोड़ों रुपये की जमीन पर खनन भी होता रहा और अधिकारी अनजान रहे। यह बात किसी के गले से उतर नहीं रही है। खनन में लगने वाहन हाईवे पर दौड़ते रहे, इसके बाद भी खनन विभाग, परिवहन विभाग व राजस्व विभाग तक सूचना नहीं पहुंची। ऐसे में यह पूरा मामला सरकारी तंत्र की निगरानी और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहा है।
वर्जन-- -
यूपीडा की ओर से पत्र आया था। उसकी जांच के लिए सदर तहसील के एसडीएम को दी गई है। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, उस पर कार्रवाई की जाएगी।-अविनाश चंद्र मौर्य, एडीएम, वित्त एवं राजस्व
विज्ञापन
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक क्षेत्र बसाने के लिए यूपीडा की ओर से मिहौली गांव में फेज वन के तहत मिहौली व निगड़ा गांव के 800 से ज्यादा किसानों के बैनामा कराए गए थे। उस वक्त जब यूपीडा के अधिकारियों ने जमीन देखी थी तब जमीन समतल थी। इसके चलते जमीन को ज्यादा पसंद किया गया। इसके पीछे की वजह यह भी थी कि समतल जमीन पर खेती होती थी, इस वजह से परियोजना को उतारने में ज्यादा खर्च नहीं आएगा, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी की वजह से मिहौली गांव में जेसीबी लगाकर जमकर मिट्टी का खनन हुआ।
विज्ञापन
गाटा संख्या 394, 422, 423, 224, 425, 427, 328 सहित अन्य गाटों में चार-चार फीट तक जेसीबी से खोदाई कर दी गई है। जानकार बताते हैं कि यह मिट्टी कानपुर-इटावा हाईवे किनारे बने पेट्रोल पंप, अस्पताल सहित अन्य प्रतिष्ठानों में उपयोग की गई। मिहौली में गाटा संख्या 394 सबसे बड़ा आठ हेक्टेयर का गाटा है। इसके लिए किसान को 29 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया था। वहीं, इस अवैध खनन का असर यूपीडा की परियोजना में पड़ेगा, क्योंकि करोड़ों रुपये खर्च कर पहले गड्ढों को भरवाना पड़ेगा।
विज्ञापन
इसके बाद ही डेवलपमेंट का रोडमैप बन पाएगा। ऐसे में हुए इस अवैध खनन से यूपीडा को करोड़ों की क्षति होने की आशंका जताई जा रही है। उधर, मामले की शिकायत यूपीडा के पास पहुंची तो जांच के लिए उन्होंने एडीएम वित्त एवं राजस्व को शिकायती पत्र भेज दिया है। वहां से एडीएम ने जांच सदर तहसील में भेजी है। हालांकि कब तक जांच पूरी हो पाएगी, अधिकारी स्पष्ट नहीं कर पाए।
सरकारी तंत्र पर उठ रहे सवाल
मिहौली क्षेत्र में तैनात क्षेत्रीय लेखपाल से लेकर सदर तहसील के अधिकारियों को इस खनन की भनक तक नहीं लगी। औद्योगिक गलियारे के लिए अधिग्रहीत हुई करोड़ों रुपये की जमीन पर खनन भी होता रहा और अधिकारी अनजान रहे। यह बात किसी के गले से उतर नहीं रही है। खनन में लगने वाहन हाईवे पर दौड़ते रहे, इसके बाद भी खनन विभाग, परिवहन विभाग व राजस्व विभाग तक सूचना नहीं पहुंची। ऐसे में यह पूरा मामला सरकारी तंत्र की निगरानी और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहा है।
वर्जन
यूपीडा की ओर से पत्र आया था। उसकी जांच के लिए सदर तहसील के एसडीएम को दी गई है। जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, उस पर कार्रवाई की जाएगी।-अविनाश चंद्र मौर्य, एडीएम, वित्त एवं राजस्व