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Auraiya News: पोर्टल पर सहेजा जा रहा जिले का इतिहास, स्मृतियां और दुर्लभ ग्रंथ
Tue, 26 May 2026 12:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 26 May 2026 12:24 AM IST
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फोटो-1- क्रांतिकारी विजय शंकर गुप्ता के मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट। स्रोत:परिजन
- फोटो : 1
औरैया। जिले के इतिहास, स्मृतियों और साक्ष्यों को संस्कृति विभाग के निर्देश पर सहेजने का काम शुरू किया गया है। सालों पुरानी पांडुलिपियों से लेकर पत्रों, दुर्लभ ग्रंथों, ताड़पत्रों को पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है।
जुटाई जा रही यह सामग्री अगली पीढ़ी को साक्ष्यों समेत यहां के इतिहास से रूबरू कराएगी। इस अभियान में डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर जिले में पुरातन इतिहास से जुड़े कई घटनाक्रम प्रचलित हैं। ये इतिहास अब महज कहानी और कहावत तक ही सीमित नहीं रहेगा। साक्ष्यों समेत सालों पुरानी पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम मिशन के तहत संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग ने पहल की है।
शासन से जारी हुए निर्देश के बाद सीडीओ रामकृपाल चौधरी ने इस पांडुलिपि संरक्षण अभियान का नोडल डीआईओएस प्रदीप कुमार मौर्या को बनाया है। इस अभियान को लेकर जिलेभर में संपर्क भी साधा जा रहा है। क्रांतिकारियों व इतिहासकारों समेत साहित्यकारों से संपर्क करते हुए संरक्षण अभियान को गति दी जा रही है।
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उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए फोटो को अपलोड करते हुए जानकारी जुटाई जा रही है। इस अभियान में इच्छुक लोगों को भी जगह दी गई है। बुजुर्गों से भी राय ली जा रही है। 90 से 100 साल की उम्र वाले बुजुर्ग चर्चित मामलों को साझा भी कर रहे हैं। इसके साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। (संवाद)
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जुटाई जा रही यह सामग्री अगली पीढ़ी को साक्ष्यों समेत यहां के इतिहास से रूबरू कराएगी। इस अभियान में डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर जिले में पुरातन इतिहास से जुड़े कई घटनाक्रम प्रचलित हैं। ये इतिहास अब महज कहानी और कहावत तक ही सीमित नहीं रहेगा। साक्ष्यों समेत सालों पुरानी पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम मिशन के तहत संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए संस्कृति विभाग ने पहल की है।
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शासन से जारी हुए निर्देश के बाद सीडीओ रामकृपाल चौधरी ने इस पांडुलिपि संरक्षण अभियान का नोडल डीआईओएस प्रदीप कुमार मौर्या को बनाया है। इस अभियान को लेकर जिलेभर में संपर्क भी साधा जा रहा है। क्रांतिकारियों व इतिहासकारों समेत साहित्यकारों से संपर्क करते हुए संरक्षण अभियान को गति दी जा रही है।
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उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए फोटो को अपलोड करते हुए जानकारी जुटाई जा रही है। इस अभियान में इच्छुक लोगों को भी जगह दी गई है। बुजुर्गों से भी राय ली जा रही है। 90 से 100 साल की उम्र वाले बुजुर्ग चर्चित मामलों को साझा भी कर रहे हैं। इसके साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। (संवाद)