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कानूनी पेंच फंसने से दोहरे हत्याकांड में गवाही टली
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औरैया। बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत सभी आरोपियों व गवाह के कोर्ट पहुंचने के बाद भी शुक्रवार को कानूनी पेंच फंसने से गवाही नहीं हो सकी। अगली सुनवाई की तिथि 30 सितंबर तय कर आरोपियों को वापस जेल भेज दिया गया।
अधिवक्ता मंजुल चौबे व उसकी चचेरी बहन सुधा की 15 मार्च 2020 को शहर के मोहल्ला नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में गोली मारकर हत्या हुई थी। मुकदमा अभी तक विशेष न्यायालय एमपी/एमएलए कोर्ट रजत सिन्हा के समक्ष चल रहा है।
हाईकोर्ट के स्थानांतरण के बाद से यह कोर्ट रिक्त चल रही है। हाईकोर्ट से कोई भी नियुक्ति न होने से सुनवाई रुकी हुई है। इधर रिक्त चल रहे कोर्ट के मुकदमों को एडीजे प्रथम प्रकाश नाथ श्रीवास्तव की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। शुक्रवार को मामले की गवाही के लिए तारीख नियत थी। पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत सभी आरोपी विभिन जेलों से हाजिर भी हुए। अभियोजन ने प्राण घातक हमले के मामले के वादी दरोगा नीरज तिवारी को गवाही के लिए बुलाया था।
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बचाव पक्ष के वकील ने प्रश्न उठाया कि हाईकोर्ट ने विशेष न्यायालय एमपीएमएलए कोर्ट के अधिकार संबंधी कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। इसलिए इस मुकदमे को किसी अन्य कोर्ट में नहीं सुना जा सकता। अधिवक्ता कृपानंद उर्फ गोपाल बाजपेई व सुभाष त्रिपाठी ने इस संबंध में प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल कर आपत्ति जताई। इसे कोर्ट ने स्वीकारते हुए गवाही टाल दी।
अगली सुनवाई 30 सितंबर की तिथि तय की है। अभियोजन के अधिवक्ता रमेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि हाईकोर्ट के अग्रिम आदेश की प्रतीक्षा की जाएगी।
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अधिवक्ता मंजुल चौबे व उसकी चचेरी बहन सुधा की 15 मार्च 2020 को शहर के मोहल्ला नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में गोली मारकर हत्या हुई थी। मुकदमा अभी तक विशेष न्यायालय एमपी/एमएलए कोर्ट रजत सिन्हा के समक्ष चल रहा है।
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हाईकोर्ट के स्थानांतरण के बाद से यह कोर्ट रिक्त चल रही है। हाईकोर्ट से कोई भी नियुक्ति न होने से सुनवाई रुकी हुई है। इधर रिक्त चल रहे कोर्ट के मुकदमों को एडीजे प्रथम प्रकाश नाथ श्रीवास्तव की कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। शुक्रवार को मामले की गवाही के लिए तारीख नियत थी। पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत सभी आरोपी विभिन जेलों से हाजिर भी हुए। अभियोजन ने प्राण घातक हमले के मामले के वादी दरोगा नीरज तिवारी को गवाही के लिए बुलाया था।
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बचाव पक्ष के वकील ने प्रश्न उठाया कि हाईकोर्ट ने विशेष न्यायालय एमपीएमएलए कोर्ट के अधिकार संबंधी कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। इसलिए इस मुकदमे को किसी अन्य कोर्ट में नहीं सुना जा सकता। अधिवक्ता कृपानंद उर्फ गोपाल बाजपेई व सुभाष त्रिपाठी ने इस संबंध में प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल कर आपत्ति जताई। इसे कोर्ट ने स्वीकारते हुए गवाही टाल दी।
अगली सुनवाई 30 सितंबर की तिथि तय की है। अभियोजन के अधिवक्ता रमेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि हाईकोर्ट के अग्रिम आदेश की प्रतीक्षा की जाएगी।