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नाबालिग छात्रा के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष की कैद
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औरैया। विशेष न्यायाधीश (पॉस्को) राजेश चौधरी ने शुक्रवार को नाबालिग छात्रा को बहला-फुसलाकर ले जाने व दुष्कर्म के दोषी को दस वर्ष के कठोर कारावास सजा सुनाई है। साथ ही 46 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।
मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक (पॉस्को) जितेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि पीड़ित छात्रा की मां ने थाना बिधूना में रिपोर्ट लिखाई कि उसकी नाबालिग बेटी एक मई 2018 को रुरुगंज से छात्रवृत्ति निकालने गई थी। वह शाम तक घर नहीं पहुंची। रात करीब नौ बजे बेटी का फोन आया है कि वह भरथना इटावा के दिवरा सई निवासी चंदन उर्फ गोविंद उर्फ रमेश चंद्र के साथ जा रही है। इसके बाद वह गांव के लोगों के साथ साथ चंदन के गांव गईं। वहां जाकर कहा कि मेरी बेटी को दे दी दीजिए। इस पर चंदन व उसके परिवार के लोग उन लोगों पर भड़क गए और जान से मारने की धमकी देने लगे। जबकि बेटी उसके साथ आने को तैयार थी। उस समय आरोपी ने कहा कि आप लोग कोई कोई कार्रवाई न करें। वह कोई पुलिस कार्रवाई न करें। वह उसकी बेटी को चार मई 2018 तक घर छोड़ने आएंगे। इसके बाद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
बाद में बेटी का फोन आया कि पापा हमें बचा लीजिए। यहां लोग हमें मार डालेंगे। इस पर थाने मेें मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने पीड़ित छात्रा को बरामद कर विभिन्न धाराओं में चार्जशीट चैयार कर कोर्ट में दाखिल की। मामले की सुनवाई एडीजे राजेश चौधरी की कोर्ट में चली। अभियोजन की तरफ से विशेष लोक अभियोजक पॉस्को जितेंद्र सिंह ने नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के दोषी को कठोर दंड देने की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने उसे निर्दोष बताया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश पॉस्को ने अभियुक्त चंदन उर्फ गोविंद को विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजा से सुनाई। इस मामले में कुल दस वर्ष के कठोर कारावास सजा सुनाई गई। साथ ही 46 हजार अर्थदंड भी लगाया। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने अर्थदंड की धनराशि में 50 फीसदी बतौर प्रतिकर पीड़ित छात्रा को प्रदान करने का भी आदेश दिया।
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मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक (पॉस्को) जितेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि पीड़ित छात्रा की मां ने थाना बिधूना में रिपोर्ट लिखाई कि उसकी नाबालिग बेटी एक मई 2018 को रुरुगंज से छात्रवृत्ति निकालने गई थी। वह शाम तक घर नहीं पहुंची। रात करीब नौ बजे बेटी का फोन आया है कि वह भरथना इटावा के दिवरा सई निवासी चंदन उर्फ गोविंद उर्फ रमेश चंद्र के साथ जा रही है। इसके बाद वह गांव के लोगों के साथ साथ चंदन के गांव गईं। वहां जाकर कहा कि मेरी बेटी को दे दी दीजिए। इस पर चंदन व उसके परिवार के लोग उन लोगों पर भड़क गए और जान से मारने की धमकी देने लगे। जबकि बेटी उसके साथ आने को तैयार थी। उस समय आरोपी ने कहा कि आप लोग कोई कोई कार्रवाई न करें। वह कोई पुलिस कार्रवाई न करें। वह उसकी बेटी को चार मई 2018 तक घर छोड़ने आएंगे। इसके बाद उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।
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बाद में बेटी का फोन आया कि पापा हमें बचा लीजिए। यहां लोग हमें मार डालेंगे। इस पर थाने मेें मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने पीड़ित छात्रा को बरामद कर विभिन्न धाराओं में चार्जशीट चैयार कर कोर्ट में दाखिल की। मामले की सुनवाई एडीजे राजेश चौधरी की कोर्ट में चली। अभियोजन की तरफ से विशेष लोक अभियोजक पॉस्को जितेंद्र सिंह ने नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म के दोषी को कठोर दंड देने की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने उसे निर्दोष बताया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश पॉस्को ने अभियुक्त चंदन उर्फ गोविंद को विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजा से सुनाई। इस मामले में कुल दस वर्ष के कठोर कारावास सजा सुनाई गई। साथ ही 46 हजार अर्थदंड भी लगाया। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने अर्थदंड की धनराशि में 50 फीसदी बतौर प्रतिकर पीड़ित छात्रा को प्रदान करने का भी आदेश दिया।
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