{"_id":"afc7ae66373bdbca64bd3c173edc40b4","slug":"teeg-bahaadur-kee-calatee-bhay-jagat-meen-shook-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेग बहादुर के चलत भयो जगत में शोक...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेग बहादुर के चलत भयो जगत में शोक...
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Wed, 16 Dec 2015 11:37 PM IST
विज्ञापन
सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस बुधवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर गुरुद्वारे में शबद कीर्तन के बाद विशाल लंगर का आयोजन किया गया। इमसें श्रद्धालुओं ने प्रसाद छका।
शहर में महावीरगंज स्थित गुरुद्वारे में गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर सुबह से ही गुरुद्वारे में शबद कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर दीप सिंह व भूपेंद्र सिंह के शबद कीर्तन के माध्यम से सिख समुदाय के लोगों ने गुरु तेग बहादुर को याद किया। लगभग तीन घंटे तक चले कार्यक्रम में सभी लोगों ने गुरु जी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
वहीं देर शाम भी गुरुद्वारे में शबद कीर्तन का कार्यक्रम जोरशोर से आयोजित किया गया। बाद इसके लंगर का कार्यक्रम शुरु हुआ। जिसमें शहर के सभी धर्म व संप्रदाय के लोगों ने गुरुद्वारा पहुंचकर मत्था टेका व लंगर का प्रसाद छका। कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा कमेटी के सचिव जगदीप सिंह चंपी ने बताया कि गुरु तेग बहादुर ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपने शीश की की कुर्बानी दी।
विज्ञापन
बताया कि औरंगजेब के अत्याचारों से परेशान कश्मीरी पंडितों के कहने पर जब गुरुजी ने औरंगजेब से बात की तथा मुसलमान बनने और उनकी दासता स्वीकार करने से मना कर दिया। जिस पर औरंगजेब ने भगवान की प्रार्थना करते समय गुरु तेग बहादुर का शीश काट लिया था।
उन्होंने कहा कि गुरु जी ने औरंगजेब की दासता और मुस्लिम धर्म स्वीकार करने से पहले अपने जीवन की कुर्बानी देना बेहतर समझा। इस मौके पर गुरुद्वारा कमेटी के गुरुबचन सिंह, हरमिंदर सिंह किट्टू, सुरजीत सिंह, हरजीत सिंह, बावला, अमरजीत सिंह, बलवीर सिंह, भूपिंदर सिंह, महिंदर सिंह, घुघू, चांदी बाबू, सोनू सब्बरवाल, रेशू, काके, गोल्डी, रोमी, हनी, सहज, गुरुमीत, नमन, मनी, कुक्की, राजेंद्र आर्य, कालका प्रसाद व सतीश आदि ने गुरु तेग बहादुर की कुर्बानी को याद कर सभी लोगों से गुरु तेग बहादुर के पद चिंहों पर चलने का आह्वान किया।
विज्ञापन
शहर में महावीरगंज स्थित गुरुद्वारे में गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर सुबह से ही गुरुद्वारे में शबद कीर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर दीप सिंह व भूपेंद्र सिंह के शबद कीर्तन के माध्यम से सिख समुदाय के लोगों ने गुरु तेग बहादुर को याद किया। लगभग तीन घंटे तक चले कार्यक्रम में सभी लोगों ने गुरु जी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।
विज्ञापन
वहीं देर शाम भी गुरुद्वारे में शबद कीर्तन का कार्यक्रम जोरशोर से आयोजित किया गया। बाद इसके लंगर का कार्यक्रम शुरु हुआ। जिसमें शहर के सभी धर्म व संप्रदाय के लोगों ने गुरुद्वारा पहुंचकर मत्था टेका व लंगर का प्रसाद छका। कार्यक्रम के दौरान गुरुद्वारा कमेटी के सचिव जगदीप सिंह चंपी ने बताया कि गुरु तेग बहादुर ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपने शीश की की कुर्बानी दी।
विज्ञापन
बताया कि औरंगजेब के अत्याचारों से परेशान कश्मीरी पंडितों के कहने पर जब गुरुजी ने औरंगजेब से बात की तथा मुसलमान बनने और उनकी दासता स्वीकार करने से मना कर दिया। जिस पर औरंगजेब ने भगवान की प्रार्थना करते समय गुरु तेग बहादुर का शीश काट लिया था।
उन्होंने कहा कि गुरु जी ने औरंगजेब की दासता और मुस्लिम धर्म स्वीकार करने से पहले अपने जीवन की कुर्बानी देना बेहतर समझा। इस मौके पर गुरुद्वारा कमेटी के गुरुबचन सिंह, हरमिंदर सिंह किट्टू, सुरजीत सिंह, हरजीत सिंह, बावला, अमरजीत सिंह, बलवीर सिंह, भूपिंदर सिंह, महिंदर सिंह, घुघू, चांदी बाबू, सोनू सब्बरवाल, रेशू, काके, गोल्डी, रोमी, हनी, सहज, गुरुमीत, नमन, मनी, कुक्की, राजेंद्र आर्य, कालका प्रसाद व सतीश आदि ने गुरु तेग बहादुर की कुर्बानी को याद कर सभी लोगों से गुरु तेग बहादुर के पद चिंहों पर चलने का आह्वान किया।