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काली स्कार्पियों के अंदर जाते ही सपाइयों का हंगामा
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औरैया। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान खूब गहमागहमी रही। रूट डायवर्ट होने के कारण पुलिस ने सपाइयों के काफिले को काफी दूर रोक दिया जबकि भाजपा नेताओं की स्कार्पियो को कलक्ट्रेट तक जाने दिया। ये देखकर सपाई भड़क गए और हंगामा करने लगे। उन्होेंने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
चुनाव के मद्देनजर दिबियापुर मार्ग पर रूट डायवर्ट था। ककोर मुख्यालय से पहले ही सदस्यों को रोककर उन्हें अंदर भेजा जा रहा था। इस दौरान पुलिस ने सपाइयों के काफिले को बहुत पहले रोक दिया। जबकि कुछ भाजपा नेताओं के साथ काले रंग की स्कार्पियो कलक्ट्रेट की ओर चली गई। यह देख सैकड़ों सपाई भड़क उठे। हंगामा बढ़ता देखकर पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। सपाइयों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया।
पुलिस पहुंची सपा कार्यालय, हुई नोकझोंक
सपा कार्यालय में पुलिस के पहुंचते ही सपाई उग्र हो गए। यहां पहुंची पुलिस को किसी ने गाड़ियों में असलहा होने की जानकारी दे दी। इस पर सीओ बिधूना मुकेश प्रताप सिंह पुलिस बल के साथ गाड़ी चेक करने जा पहुंचे। इस बात से सपाई और उग्र हो गए। सपाइयों और प्रशासन के अधिकारियों में कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई। सत्ता के दबाव और प्रशासन की सख्ती के आगे सपाइयों को झुकना पड़ा।
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सदस्यों के साथ पहुंचे भाजपा कार्यकर्ता
जिला प्रशासन नियमों के तहत मतदान कराने की बात कहता रहा। जबकि कई जगहों पर नियमों की अनदेखी की गई। इसको लेकर सपा नेताओं ने खूब आरोप लगाए। शनिवार दोपहर 12 बजे के करीब भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता सदस्यों के साथ कलक्ट्रेट का रुख करने लगे। भाजपा कार्यालय में एकत्र हुए सदस्य और कार्यकर्ता जब कलक्ट्रेट पहुंचे तो यहां पर पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। जिसके कारण भाजपा के कई सदस्यों के साथ कार्यकर्ता अंदर तक पहुंचे। जबकि सपा के सदस्यों के साथ सख्ती बरती गई।
ई-रिक्शा से भेजे गए सदस्य
जिला पंचायत सदस्यों को मेन रोड से कलक्ट्रेट तक जाने के लिए प्रशासन ने ई-रिक्शे की व्यवस्था की थी। सदस्यों को रोड पर उनके वाहनों के साथ रोककर रखा गया था। पुलिस कर्मी एक-एक रिक्शे पर पार्टी के अनुसार दो सदस्य बैठाकर कलक्ट्रेट तक भेजते रहे।
सपा प्रत्याशी ने कमरे में बंद करने का लगाया आरोप
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मतदान शुरू होते ही सपा ने प्रशासन पर आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। दोपहर तीन बजे के बाद जैसे ही मतदान खत्म हुआ, सदस्य बाहर आने लगे। सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रत्याशी रवि त्यागी बाहर आते ही प्रशासन पर भड़क उठे। उन्होंने सीधे तौर पर डीएम पर आरोप लगाकर कहा कि प्रशासन ने सत्ता के इशारे पर काम किया। कुछ सदस्यों को मदद के लिए एजेंट की अनुमति दी गई थी। लेकिन एजेंट वोट डाल रहे थे। इसका विरोध किया गया तो डीएम ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया। इस पर कर्मचारियों ने कहा कि यह डीएम का आदेश है। सपा प्रत्याशी ने पूरी तरह से सत्ता के इशारे पर मतदान कराने की बात कही। सपाइयों ने कहा कि प्रशासन ने जिला पंचायत चुनाव से लेकर मतदान तक एजेंट की तरह काम किया है। कम सदस्य होने के बाद भी भाजपा ने कई सदस्यों पर दबाव डालकर अपने खेमे में कर लिया।
निर्दलीयों और बसपा ने पार लगाई नैया
जिले में जिला पंचायत सदस्यों की 23 सीटें हैं। इनमें से भाजपा पांच सदस्यों को जिता पाई थी। जबकि बसपा चार और निर्दलीय चार प्रत्याशी चुनाव जीतकर आए थे। जबकि सपा समर्थित 10 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इसके कारण सपा बहुमत में होने का दम भर रही थी। भाजपा शुरुआत में बिल्कुल शांत बैठी रही। बसपा का समर्थन मिलने की बात सामने आते ही भाजपा सक्रिय हुई और निर्दलीय प्रत्याशियों को पूरी तरह अपने पाले में कर जीत हासिल कर ली। भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया ने पहले ही 14 सदस्य होने का दावा किया था। जिसमें से 13 वोट पाकर कमल अध्यक्ष बन गए।
पहली बार पूर्ण बहुमत में भाजपा
इटावा से जिला अलग होने के बाद से अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष पर सपा का कब्जा अधिक रहा है। इस बीच बसपा भी काबिज हुई। लेकिन भाजपा पूरी तरह से कब्जा नहीं कर सकी। अगस्त 2017 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष राजवीर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर दीपू सिंह को भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया था। इसके बाद से ही भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए रणनीति में जुटी थी।
सपा जैसा करती आई, उसे वैसा ही दिखता
सपा जैसा करती चली आई है, उसे सब कुछ वैसा ही दिख रहा है। भाजपा ने पूरी निष्ठा और ईमादनारी से चुनाव लड़ा। समर्थन मिला और जीत हासिल की। इससे पहले भी दीपू सिंह को भाजपा ने अध्यक्ष बनाया था। इस बार पूरी बहुमत से पार्टी ने अध्यक्ष बनाया है। - श्री राम मिश्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष
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चुनाव के मद्देनजर दिबियापुर मार्ग पर रूट डायवर्ट था। ककोर मुख्यालय से पहले ही सदस्यों को रोककर उन्हें अंदर भेजा जा रहा था। इस दौरान पुलिस ने सपाइयों के काफिले को बहुत पहले रोक दिया। जबकि कुछ भाजपा नेताओं के साथ काले रंग की स्कार्पियो कलक्ट्रेट की ओर चली गई। यह देख सैकड़ों सपाई भड़क उठे। हंगामा बढ़ता देखकर पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। सपाइयों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया।
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पुलिस पहुंची सपा कार्यालय, हुई नोकझोंक
सपा कार्यालय में पुलिस के पहुंचते ही सपाई उग्र हो गए। यहां पहुंची पुलिस को किसी ने गाड़ियों में असलहा होने की जानकारी दे दी। इस पर सीओ बिधूना मुकेश प्रताप सिंह पुलिस बल के साथ गाड़ी चेक करने जा पहुंचे। इस बात से सपाई और उग्र हो गए। सपाइयों और प्रशासन के अधिकारियों में कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई। सत्ता के दबाव और प्रशासन की सख्ती के आगे सपाइयों को झुकना पड़ा।
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सदस्यों के साथ पहुंचे भाजपा कार्यकर्ता
जिला प्रशासन नियमों के तहत मतदान कराने की बात कहता रहा। जबकि कई जगहों पर नियमों की अनदेखी की गई। इसको लेकर सपा नेताओं ने खूब आरोप लगाए। शनिवार दोपहर 12 बजे के करीब भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता सदस्यों के साथ कलक्ट्रेट का रुख करने लगे। भाजपा कार्यालय में एकत्र हुए सदस्य और कार्यकर्ता जब कलक्ट्रेट पहुंचे तो यहां पर पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। जिसके कारण भाजपा के कई सदस्यों के साथ कार्यकर्ता अंदर तक पहुंचे। जबकि सपा के सदस्यों के साथ सख्ती बरती गई।
ई-रिक्शा से भेजे गए सदस्य
जिला पंचायत सदस्यों को मेन रोड से कलक्ट्रेट तक जाने के लिए प्रशासन ने ई-रिक्शे की व्यवस्था की थी। सदस्यों को रोड पर उनके वाहनों के साथ रोककर रखा गया था। पुलिस कर्मी एक-एक रिक्शे पर पार्टी के अनुसार दो सदस्य बैठाकर कलक्ट्रेट तक भेजते रहे।
सपा प्रत्याशी ने कमरे में बंद करने का लगाया आरोप
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मतदान शुरू होते ही सपा ने प्रशासन पर आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। दोपहर तीन बजे के बाद जैसे ही मतदान खत्म हुआ, सदस्य बाहर आने लगे। सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रत्याशी रवि त्यागी बाहर आते ही प्रशासन पर भड़क उठे। उन्होंने सीधे तौर पर डीएम पर आरोप लगाकर कहा कि प्रशासन ने सत्ता के इशारे पर काम किया। कुछ सदस्यों को मदद के लिए एजेंट की अनुमति दी गई थी। लेकिन एजेंट वोट डाल रहे थे। इसका विरोध किया गया तो डीएम ने उन्हें कमरे में बंद कर दिया। इस पर कर्मचारियों ने कहा कि यह डीएम का आदेश है। सपा प्रत्याशी ने पूरी तरह से सत्ता के इशारे पर मतदान कराने की बात कही। सपाइयों ने कहा कि प्रशासन ने जिला पंचायत चुनाव से लेकर मतदान तक एजेंट की तरह काम किया है। कम सदस्य होने के बाद भी भाजपा ने कई सदस्यों पर दबाव डालकर अपने खेमे में कर लिया।
निर्दलीयों और बसपा ने पार लगाई नैया
जिले में जिला पंचायत सदस्यों की 23 सीटें हैं। इनमें से भाजपा पांच सदस्यों को जिता पाई थी। जबकि बसपा चार और निर्दलीय चार प्रत्याशी चुनाव जीतकर आए थे। जबकि सपा समर्थित 10 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इसके कारण सपा बहुमत में होने का दम भर रही थी। भाजपा शुरुआत में बिल्कुल शांत बैठी रही। बसपा का समर्थन मिलने की बात सामने आते ही भाजपा सक्रिय हुई और निर्दलीय प्रत्याशियों को पूरी तरह अपने पाले में कर जीत हासिल कर ली। भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया ने पहले ही 14 सदस्य होने का दावा किया था। जिसमें से 13 वोट पाकर कमल अध्यक्ष बन गए।
पहली बार पूर्ण बहुमत में भाजपा
इटावा से जिला अलग होने के बाद से अब तक जिला पंचायत अध्यक्ष पर सपा का कब्जा अधिक रहा है। इस बीच बसपा भी काबिज हुई। लेकिन भाजपा पूरी तरह से कब्जा नहीं कर सकी। अगस्त 2017 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष राजवीर सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर दीपू सिंह को भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाया था। इसके बाद से ही भाजपा जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए रणनीति में जुटी थी।
सपा जैसा करती आई, उसे वैसा ही दिखता
सपा जैसा करती चली आई है, उसे सब कुछ वैसा ही दिख रहा है। भाजपा ने पूरी निष्ठा और ईमादनारी से चुनाव लड़ा। समर्थन मिला और जीत हासिल की। इससे पहले भी दीपू सिंह को भाजपा ने अध्यक्ष बनाया था। इस बार पूरी बहुमत से पार्टी ने अध्यक्ष बनाया है। - श्री राम मिश्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष