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तीन साल से नहीं परखी गई मिट्टी की सेहत

Sun, 16 Oct 2022 12:44 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 16 Oct 2022 12:44 AM IST
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Soil health deteriorating without testing
औरैया। जिले में पिछले तीन साल से मिट्टी की सेहत नहीं परखी गई। कोविड के बाद से सरकार ने इसके लिए बजट देने से हाथ पीछे खींच लिए थे। हालात यह है कि पैसा न मिलने से मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में जरूरत के रसायन तक नहीं हैं।
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सरकार ने आठ साल पहले प्रधानमंत्री कृषि मृदा परीक्षण योजना लागू की थी।
इससे सरकारी खर्च पर मिट्टी के भीतर मौजूद तत्वों का परीक्षण होता था। इसके मुताबिक ही किसानों को फसलें बोने की तकनीकी सुझाई जाती थीं। किसानों को बकायदा मृदा परीक्षण कार्ड दिए जाते थे।
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अब तक सरकार इस पर करीब 30 लाख खर्च कर चुकी है, लेकिन कोविड के दौरान सरकार ने हाथ पीछे खींच लिए। अब कोविड के बाद सभी योजनाएं पटरी पर लौट आईं, लेकिन मृदा परीक्षण का बजट सरकार ने नहीं दिया, जिससे जांच नहीं हो पा रही है।
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किसान रामकुमार निवासी चिरहुली, जैतापुर के पहलवान सिंह ने बताया कि इस समय आलू व सरसों की बुआई शुरू हो गई है। मृदा परीक्षण न होने के कारण मिट्टी की उर्वरक क्षमता का आकलन नहीं हो पा रहा है।
बजट अभी नहीं मिला है, इस वजह से मिट्टी का परीक्षण नहीं हो पा रहा। जिन किसानों को जरूरत होती है वह निजी संस्थानों में जाकर इनका परीक्षण करा लेते हैं। शैलेंद्र कुमार वर्मा, उप कृषि निदेशक

मिट्टी से खत्म होता जा रहा जीवांश
दलहनी और तिलहनी फसल के लिए सबसे जरूरी अंश जीवांश धीरे-धीरे धरती से खत्म होता जा रहा है। दो साल पहले हुए आखिरी मृदा परीक्षण में जीवांश की गिरावट चिंताजनक स्तर पर पाई गई थी। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जीवांश कार्बन की मात्रा एक प्रतिशत प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए, लेकिन यह 0.4 प्रतिशत ही पाया गया। इसी तरह फास्फेट, नाइट्रेट, पोटाश, जिंक, बोरॉन व गंधक भी चिंताजनक स्तर पर पाया गया। जबकि फसलों की सेहत के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
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