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Auraiya News: यमुना किनारे आए साइबेरिया के प्रवासी पक्षी

Sat, 20 Dec 2025 11:48 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 20 Dec 2025 11:48 PM IST
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Siberian migratory birds arrive on the banks of the Yamuna
फोटो-6-यमुना किनारे झुंड में मौजूद पेलिकन पक्षी। स्रोत:वन कर्मी
औरैया। ठंड बढ़ने के साथ ही यमुना किनारे औरैया से लेकर पचनद तक प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है। साइबेरिया व अन्य जगहों से आ रहे अलग-अलग प्रजाति के इन पक्षियों के कलरव की गूंज बीहड़ में सुनाई देने लगी है।
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वन विभाग की मानें तो एक सप्ताह के अंदर करीब तीन हजार से ज्यादा पक्षी झुंड में आ चुके हैं। वन विभाग के अनुसार यह पक्षी मार्च तक यहां डेरा डालते हुए प्रजनन करेंगे। इसके बाद अपने वतन को वापस हो जाएंगे। पक्षियों को किसी तरह की अव्यवस्था न हो इसे लेकर वन विभाग की टीम ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी है।
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साइबेरिया के पक्षी प्रवास के लिए हर साल पचनद आते हैं। यहां पर तीन माह तक वह प्रजनन क्रिया करते हैं। यमुना नदी के किनारे झार के उथले पानी के इर्दगिर्द भारी संख्या में पक्षियों का डेरा जमा है। लोग यहां पहुंचकर वीडियोग्राफी करते हुए अपने प्रकृति प्रेम को अहसास करते हैं। वन्य जीव मित्र आशीष ने बताया कि यह विदेशी पक्षी प्रति वर्ष सर्दी के मौसम आकर यहां बसेरा करते हैं।
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पचनद में साइबेरिया के कजाकिस्तान, चीन, वर्मा, तुर्किस्तान, नवाया कलादीप सहित कई देशों के पक्षी आया करते हैं। एक सप्ताह के अंदर तीन हजार के करीब गेल व पेलिकन पक्षी आ गए हैं। स्टूलबिल, करवोरेंट, फ्लेमिंगो, बून बारैफिट समेत कई अन्य प्रजातियों के पक्षी अभी आना शेष है। वन्य रक्षक रोहित कुमार ने बताया कि इस बार तापमान में गिरावट देरी से हुई है। पिछले सालों में ये पक्षी नवंबर माह में आने शुरू हो गए थे। फरवरी व मार्च में यह पक्षी वापस चले जाएंगे।

वन्य रक्षक रोहित कुमार ने बताया कि बर्फीले क्षेत्र के इन पक्षियों को वहां खाने की समस्या हो जाती है। ऐसे में यमुना के किनारे इन पक्षियों के लिए मुफीद जगह होती है। यमुना की मछलियां व अन्य कीट पतंगे उनके आहार में शामिल होते हैं। साथ ही प्रजनन के लिए उन्हें अनुकूल तापमान भी मिल जाता है।
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