{"_id":"6aa5a45316e1d56b7d04eaf0","slug":"secured-relief-from-the-court-immediately-upon-admitting-guilt-and-depositing-the-fine-auraiya-news-c-211-1-aur1009-151466-2026-09-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: जुर्म स्वीकार कर अर्थदंड जमा करते ही मिला कोर्ट से छुटकारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: जुर्म स्वीकार कर अर्थदंड जमा करते ही मिला कोर्ट से छुटकारा
Sun, 13 Sep 2026 12:43 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 13 Sep 2026 12:43 AM IST
विज्ञापन
फोटो-33- लोक अदालत के शिविर में होता निस्तारण। संवाद
औरैया। जिला जजी परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान 75 वर्षीय एक बुजुर्ग को 11 साल बाद न्याय मिला। वहीं, कई मामलों में आरोपियों के जुर्माना जमा कराकर उनकी कार्रवाई को कोर्ट ने खत्म कर दिया।
न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार के निर्देश और जिला न्यायाधीश मयंक चौहान के नेतृत्व में शुभारंभ किया गया। इस दौरान प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय समाज के अंतिम व्यक्ति तक और घर-घर पहुंचना चाहिए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रोमा गुप्ता ने बताया कि आयोजन में कुल 23806 मुकदमों का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया। इस दौरान करोड़ों रुपये के बैंक ऋण और प्रतिकर का संवितरण भी किया गया, जिससे वादकारियों को राहत मिली है।
विज्ञापन
-- --
केस-एक
बुजुर्ग को 11 साल बाद मिली राहत
राष्ट्रीय लोक अदालत में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम पारूल जैन की अदालत ने साल 2015 के एक मामले में 75 वर्षीय वृद्ध जमानतदार राधेश्याम को 2000 रुपये अर्थदंड जमा करने पर आरोपी नीरज कुमार की जमानत के दायित्व से उन्मोचित कर दिया। आरोपी के न्यायालय में उपस्थित न होने पर राधेश्याम के खिलाफ कार्रवाई चल रही थी। प्रार्थी ने प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह वृद्ध, बेसहारा और झोपड़ी में रहने वाला असमर्थ व्यक्ति है, जिसे आरोपी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अदालत ने लोक अदालत के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया।
-- --
केस-2
अर्थदंड देकर जेल जाने से बचा आरोपी
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र की अदालत में राज्य बनाम मगनलाल के मामले की पत्रावली पेश हुई। आरोपी ने जुर्म स्वीकार करते प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा आगे न बढ़ाने मांग की। अदालत ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए पॉक्सो अधिनियम के तहत पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना न भरने पर एक माह के साधारण कारावास का प्रावधान था, परंतु आरोपी की ओर से अर्थदंड की राशि जमा कर दिए जाने के बाद संपूर्ण कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
विज्ञापन
न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार के निर्देश और जिला न्यायाधीश मयंक चौहान के नेतृत्व में शुभारंभ किया गया। इस दौरान प्रशासनिक न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय समाज के अंतिम व्यक्ति तक और घर-घर पहुंचना चाहिए।
विज्ञापन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रोमा गुप्ता ने बताया कि आयोजन में कुल 23806 मुकदमों का आपसी सहमति से निस्तारण किया गया। इस दौरान करोड़ों रुपये के बैंक ऋण और प्रतिकर का संवितरण भी किया गया, जिससे वादकारियों को राहत मिली है।
विज्ञापन
केस-एक
बुजुर्ग को 11 साल बाद मिली राहत
राष्ट्रीय लोक अदालत में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम पारूल जैन की अदालत ने साल 2015 के एक मामले में 75 वर्षीय वृद्ध जमानतदार राधेश्याम को 2000 रुपये अर्थदंड जमा करने पर आरोपी नीरज कुमार की जमानत के दायित्व से उन्मोचित कर दिया। आरोपी के न्यायालय में उपस्थित न होने पर राधेश्याम के खिलाफ कार्रवाई चल रही थी। प्रार्थी ने प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह वृद्ध, बेसहारा और झोपड़ी में रहने वाला असमर्थ व्यक्ति है, जिसे आरोपी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अदालत ने लोक अदालत के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया।
केस-2
अर्थदंड देकर जेल जाने से बचा आरोपी
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र की अदालत में राज्य बनाम मगनलाल के मामले की पत्रावली पेश हुई। आरोपी ने जुर्म स्वीकार करते प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा आगे न बढ़ाने मांग की। अदालत ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए पॉक्सो अधिनियम के तहत पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना न भरने पर एक माह के साधारण कारावास का प्रावधान था, परंतु आरोपी की ओर से अर्थदंड की राशि जमा कर दिए जाने के बाद संपूर्ण कार्रवाई समाप्त कर दी गई।

फोटो-33- लोक अदालत के शिविर में होता निस्तारण। संवाद