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सात माह पूर्व इटावा जेल से फरार सजायाफ्ता कैदी को पुलिस एवं एसटीएफ ने मुठभेड़ में दबोचा
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दिबियापुर (औरैया)। सात महीने पहले इटावा जेल से फरार हुए सजायाफ्ता कैदी चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा को एसटीएफ लखनऊ और दिबियापुर थाना पुलिस की टीम ने कंचौसी रोड अमरपुर मोड़ के पास मुठभेड़ में दबोच लिया। उसके पास से एक तमंचा, तीन कारतूस पुलिस ने बरामद किए हैं। चंद्रप्रकाश पर 50 हजार रुपये इनाम पुलिस ने घोषित कर रखा था। पुलिस एवं एसटीएफ लखनऊ टीम ने ने मुठभेड़ में दबोच लिया। उसके ऊपर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था।
सीओ सुरेंद्र नाथ ने बताया कि एकदिल इटावा के महानेपुर निवासी चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा शातिर अपराधी है। एकदिल थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में वह इटावा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। छह जुलाई 2019 की रात चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा दो साथियों के साथ इटावा जेल की दीवार फांदकर भाग गया था। पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस और एसटीएफ लगातार चंद्रप्रकाश की तलाश में लगी थी।
सीओ के मुताबिक दिबियापुर थाने के दरोगा राम प्रकाश और एसटीएफ लखनऊ के दरोगा शैलेंद्र कुमार को सोमवार की रात सूचना मिली कि इटावा जेल से फरार चल रहे सजायाफ्ता अपराधी चंद्र प्रकाश उर्फ चंदवा दिबियापुर थाना क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने आया है। इस पर दिबियापुर थाना पुलिस और एसटीएफ लखनऊ टीम ने कंचौसी रोड अमरपुर मोड़ के पास चंदवा को घेर लिया। चंदवा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायर कर दिया। पुलिस ने जवाबी फायरिंग करके चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से तमंचा और तीन कारतूस पुलिस ने बरामद किए हैं। पुलिस ने दोपहर बाद सजायाफ्ता चंदवा को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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इंसेट
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भागते समय ट्रेन से कट गया था एक कैदी
दिबियापुर (औरैया)। मुठभेड़ में पकड़े गए चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा उसके साथी रामानंद और प्रतापगढ़ जेल से इटावा जेल में ट्रांसफर होकर आया बंदी विकास को एक साथ जेल की तन्हाई बैरक में रखा गया था। तन्हाई बैरक में तीनों ने जेल से भागने की साजिश रची। छह जुलाई 2019 को तीनों इटावा जेल की दीवार फांद कर भाग गए थे। जेल के बंदी रक्षकों ने विकास को भागते समय दबोच लिया था। जबकि इटावा जेल के पास स्थित रेलवे स्टेशन के करीब ही रेलवे लाइन पार करते समय उसके साथी रामानंद की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। वहीं, पुलिस उसका पता नहीं लगा सकी थी।
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इंसेट
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कई मुकदमों में सजा काट रहा था चंद्रप्रकाश
दिबियापुर (औरैया)। मुठभेड़ में दबोचा गया चंद्रप्रकाश कई साल से इटावा जेल में बंद था। चंदवा ने पुलिस को बताया कि इटावा के इकदिल थाने में दर्ज एक मामले में उसे 30 मार्च 2012 को अजीवन कारावास की सजा हुई थी। इसी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में 11 मार्च 2011 में स्पेशल जज डकैती इटावा की कोर्ट से उसे सात वर्ष की कैद और आर्थिक दंड सजा सुनाई गई थी। थाना जीआरपी इटावा के मामले में 15 जनवरी 2015 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इटावा कोर्ट ने एक मामले ंमें जेल में गुजारी गई अवधि के कारावास के दंड से दंडित किया था।
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सीओ सुरेंद्र नाथ ने बताया कि एकदिल इटावा के महानेपुर निवासी चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा शातिर अपराधी है। एकदिल थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में वह इटावा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। छह जुलाई 2019 की रात चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा दो साथियों के साथ इटावा जेल की दीवार फांदकर भाग गया था। पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। पुलिस और एसटीएफ लगातार चंद्रप्रकाश की तलाश में लगी थी।
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सीओ के मुताबिक दिबियापुर थाने के दरोगा राम प्रकाश और एसटीएफ लखनऊ के दरोगा शैलेंद्र कुमार को सोमवार की रात सूचना मिली कि इटावा जेल से फरार चल रहे सजायाफ्ता अपराधी चंद्र प्रकाश उर्फ चंदवा दिबियापुर थाना क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने आया है। इस पर दिबियापुर थाना पुलिस और एसटीएफ लखनऊ टीम ने कंचौसी रोड अमरपुर मोड़ के पास चंदवा को घेर लिया। चंदवा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायर कर दिया। पुलिस ने जवाबी फायरिंग करके चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से तमंचा और तीन कारतूस पुलिस ने बरामद किए हैं। पुलिस ने दोपहर बाद सजायाफ्ता चंदवा को कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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भागते समय ट्रेन से कट गया था एक कैदी
दिबियापुर (औरैया)। मुठभेड़ में पकड़े गए चंद्रप्रकाश उर्फ चंदवा उसके साथी रामानंद और प्रतापगढ़ जेल से इटावा जेल में ट्रांसफर होकर आया बंदी विकास को एक साथ जेल की तन्हाई बैरक में रखा गया था। तन्हाई बैरक में तीनों ने जेल से भागने की साजिश रची। छह जुलाई 2019 को तीनों इटावा जेल की दीवार फांद कर भाग गए थे। जेल के बंदी रक्षकों ने विकास को भागते समय दबोच लिया था। जबकि इटावा जेल के पास स्थित रेलवे स्टेशन के करीब ही रेलवे लाइन पार करते समय उसके साथी रामानंद की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। वहीं, पुलिस उसका पता नहीं लगा सकी थी।
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कई मुकदमों में सजा काट रहा था चंद्रप्रकाश
दिबियापुर (औरैया)। मुठभेड़ में दबोचा गया चंद्रप्रकाश कई साल से इटावा जेल में बंद था। चंदवा ने पुलिस को बताया कि इटावा के इकदिल थाने में दर्ज एक मामले में उसे 30 मार्च 2012 को अजीवन कारावास की सजा हुई थी। इसी थाने में दर्ज एक अन्य मामले में 11 मार्च 2011 में स्पेशल जज डकैती इटावा की कोर्ट से उसे सात वर्ष की कैद और आर्थिक दंड सजा सुनाई गई थी। थाना जीआरपी इटावा के मामले में 15 जनवरी 2015 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इटावा कोर्ट ने एक मामले ंमें जेल में गुजारी गई अवधि के कारावास के दंड से दंडित किया था।