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कल से खुलेंगे प्राइमरी स्कूल, बैग और किताबों नहीं
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औरैया। एक सितंबर से कक्षा एक से पांच तक के प्राइमरी स्कूल खोलने की तैयारी है। जबकि परिषदीय स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के अभी कई इंतजाम अधूरे हैं। बच्चों के पास यूनिफार्म, जूते व मोजे नहीं हैं, तो किताबें भी अभी तक मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं। ऐसे में स्कूल खुलने के बाद पढ़ाई कराना शिक्षकों के लिए चुनौती होगी।
शैक्षणिक सत्र में शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई व एमडीएम व्यवस्था के साथ शासन के निर्देशों को पूरा करना चुनौती है। सरकार ने भले ही एक सिंतबर से स्कूल खोलने के निर्देश दिए हों, लेकिन तैयारियां अभी सतही स्तर पर शून्य ही नजर आ रही हैं। ऐसे में स्कूल खुलने के बाद बच्चों को पढ़ाने के साथ ही शिक्षकों पर भार बढ़ जाएगा। शिक्षकों ने बताया कि अब तक स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं। स्कूल खुलते ही किताबों, यूनिफार्म, बैग व जूते मोजे वितरण की जानकारी जुटाने के अलावा मिशन प्रेरणा के तहत कक्षावार जारी लक्ष्य को भी पूरा करना होगा। कहा लगभग डेढ़ वर्ष से पढ़ाई से दूर रहे छोटे बच्चों के लिए प्रेरणा लक्ष्य को तय समय पर पूरा करना आसान नहीं होगा।
बच्चों को पढ़ाने का इंतजाम अधूरा
शिक्षकों ने बताया कि वह जुलाई से ही छात्र-छात्राओं का नामांकन करा रहे हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाने का इंतजाम अभी अधूरा है। बीएसए कार्यालय से किताबें ब्लाक मुख्यालयों तक भिजवाई जा चुकी हैं, लेकिन परिषदीय स्कूलों में नहीं पहुंचीं। पिछले निर्देशों के मुताबिक स्कूलों तक किताबों को पहुंचाने की जिम्मेदारी भी विभाग की है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए बच्चों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी हैं।
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जल्द किताबें पहुंचाई जाएंगी
स्कूल खुलने के दौरान शिक्षकों को कोरोना गाइडलाइन का पालन करने और कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में जल्द ही किताबें पहुंचाई जाएंगी। इससे बच्चों की बेहतर पढ़ाई हो सके। स्कूलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं भी परखी जाएंगी।
चंदना राम इकबाल, बीएसए
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शैक्षणिक सत्र में शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई व एमडीएम व्यवस्था के साथ शासन के निर्देशों को पूरा करना चुनौती है। सरकार ने भले ही एक सिंतबर से स्कूल खोलने के निर्देश दिए हों, लेकिन तैयारियां अभी सतही स्तर पर शून्य ही नजर आ रही हैं। ऐसे में स्कूल खुलने के बाद बच्चों को पढ़ाने के साथ ही शिक्षकों पर भार बढ़ जाएगा। शिक्षकों ने बताया कि अब तक स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं। स्कूल खुलते ही किताबों, यूनिफार्म, बैग व जूते मोजे वितरण की जानकारी जुटाने के अलावा मिशन प्रेरणा के तहत कक्षावार जारी लक्ष्य को भी पूरा करना होगा। कहा लगभग डेढ़ वर्ष से पढ़ाई से दूर रहे छोटे बच्चों के लिए प्रेरणा लक्ष्य को तय समय पर पूरा करना आसान नहीं होगा।
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बच्चों को पढ़ाने का इंतजाम अधूरा
शिक्षकों ने बताया कि वह जुलाई से ही छात्र-छात्राओं का नामांकन करा रहे हैं, लेकिन बच्चों की पढ़ाने का इंतजाम अभी अधूरा है। बीएसए कार्यालय से किताबें ब्लाक मुख्यालयों तक भिजवाई जा चुकी हैं, लेकिन परिषदीय स्कूलों में नहीं पहुंचीं। पिछले निर्देशों के मुताबिक स्कूलों तक किताबों को पहुंचाने की जिम्मेदारी भी विभाग की है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए बच्चों को सुरक्षित रखने के निर्देश भी हैं।
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जल्द किताबें पहुंचाई जाएंगी
स्कूल खुलने के दौरान शिक्षकों को कोरोना गाइडलाइन का पालन करने और कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में जल्द ही किताबें पहुंचाई जाएंगी। इससे बच्चों की बेहतर पढ़ाई हो सके। स्कूलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं भी परखी जाएंगी।
चंदना राम इकबाल, बीएसए