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अस्ता के 150 परिवारों को बसाने की तैयारी तेज
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ऊंचाई पर स्थित वन विभाग की जमीन। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। यमुना नदी की बाढ़ में हर साल चपेट में आने वाले अस्ता गांव के लोगों को ऊंचे स्थान पर बसाने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। इसके लिए छह माह पहले भेजे गए प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलते ही ग्रामीणों को वन विभाग के ऊंचे स्थान पर स्थित जमीन पर बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सदर तहसील क्षेत्र के अस्ता गांव में पिछले साल आई बाढ़ के पानी ने छह अगस्त 2021 को 118.51 मीटर के पार पहुंचकर भयंकर तबाही मचाई थी। जिससे 150 परिवारों को अपना घर छोड़कर गांव के बाहर खुले आसमान में कई दिन गुजारने को मजबूर होना पड़ा था।
तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई सर्वे कर गांव व यमुना नदी की भौगोलिक स्थिति देखी थी। जिसके बाद जिला प्रशासन को दिए गए निर्देशों के चलते अस्ता गांव के पीड़ितों को ऊंचाई पर बसाने को प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि इससे पहले 1996 में 118.19 मीटर पानी पैमाने पर चढ़ा था।
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इस क्रम में छह माह पूर्व जिला प्रशासन की ओर से अस्ता गांव के ग्रामीणों को वन विभाग की ऊंचाई पर स्थित जमीन पर बसाने के लिए कवायद तेज कर दी गई है। इसमें वन विभाग की चार हेक्टेअर ऊंचाई की जमीन के बदले में वन विभाग को नीचे की प्रभावित चार हेक्टेअर जमीन सौंप
ी जाएगी। इस ऊंचाई की जमीन पर अस्ता गांव के लगभग 150 परिवारों को सुरक्षित बसाया जाएगा। ऐसे में अब जिला प्रशासन को शासन की स्वीकृति का इंतजार है। हालांकि प्रशासन ने मानसून आने से पहले ही लेखपाल व राजस्व निरीक्षकों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित स्थानों को चिह्नित कर अनाज व भूसे का भंडारण समेत दवाइयों आदि का इंतजाम करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही मानसून आते ही बाढ़ राहत चौकियों से बाढ़ प्रभावित गांवों पर पैनी नजर रखी जाएगी।
एडीएम रेखा एस. चौहान ने कहा कि प्रशासन को वन विभाग की ऊंचाई वाली चार हेक्टेअर जमीन को निचले क्षेत्र में स्थित प्रभावित जमीन से अदला-बदली कराए जाने का शासन को भेेजे गए प्रस्ताव पर स्वीकृति का इंतजार है। स्वीकृति मिलते ही अस्ता गांव के बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को ऊंचाई पर सुरक्षित रूप से बसाने की कवायद शुरू कर दी जाएगी।
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सदर तहसील क्षेत्र के अस्ता गांव में पिछले साल आई बाढ़ के पानी ने छह अगस्त 2021 को 118.51 मीटर के पार पहुंचकर भयंकर तबाही मचाई थी। जिससे 150 परिवारों को अपना घर छोड़कर गांव के बाहर खुले आसमान में कई दिन गुजारने को मजबूर होना पड़ा था।
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तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाई सर्वे कर गांव व यमुना नदी की भौगोलिक स्थिति देखी थी। जिसके बाद जिला प्रशासन को दिए गए निर्देशों के चलते अस्ता गांव के पीड़ितों को ऊंचाई पर बसाने को प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि इससे पहले 1996 में 118.19 मीटर पानी पैमाने पर चढ़ा था।
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इस क्रम में छह माह पूर्व जिला प्रशासन की ओर से अस्ता गांव के ग्रामीणों को वन विभाग की ऊंचाई पर स्थित जमीन पर बसाने के लिए कवायद तेज कर दी गई है। इसमें वन विभाग की चार हेक्टेअर ऊंचाई की जमीन के बदले में वन विभाग को नीचे की प्रभावित चार हेक्टेअर जमीन सौंप
ी जाएगी। इस ऊंचाई की जमीन पर अस्ता गांव के लगभग 150 परिवारों को सुरक्षित बसाया जाएगा। ऐसे में अब जिला प्रशासन को शासन की स्वीकृति का इंतजार है। हालांकि प्रशासन ने मानसून आने से पहले ही लेखपाल व राजस्व निरीक्षकों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित स्थानों को चिह्नित कर अनाज व भूसे का भंडारण समेत दवाइयों आदि का इंतजाम करना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही मानसून आते ही बाढ़ राहत चौकियों से बाढ़ प्रभावित गांवों पर पैनी नजर रखी जाएगी।
एडीएम रेखा एस. चौहान ने कहा कि प्रशासन को वन विभाग की ऊंचाई वाली चार हेक्टेअर जमीन को निचले क्षेत्र में स्थित प्रभावित जमीन से अदला-बदली कराए जाने का शासन को भेेजे गए प्रस्ताव पर स्वीकृति का इंतजार है। स्वीकृति मिलते ही अस्ता गांव के बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को ऊंचाई पर सुरक्षित रूप से बसाने की कवायद शुरू कर दी जाएगी।

यमुना नदी में बाढ़ आने से डूब जाता है यह क्षेत्र। संवाद- फोटो : AURAIYA