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बिना लेआउट पास कराए चालू है अवैध प्लाटिंग का धंधा
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औरैया। शहर में लगातार बिना लेआउट पास कराएं अवैध रूप से प्लाटिंग हो रही है। प्रशासन की ओर से इन पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो रही है। अवैध रूप से की जा रही प्लाटिंग में लोगों को जलनिकासी, पेयजल, सड़क और प्रकाश जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। वर्तमान में नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर उनके साथ ठगी की जा रही है।
24 वर्ष पुरानी औरैया नगर पालिका से लगे क्षेत्रों में तेजी से निर्माण कार्य चल रहे हैं। शहर की सीमाएं 24 साल पुरानी हैं। तब से अब तक शहर की आबादी और दायरा दोनों ही दो गुने हो गए हैं। बिना लेआउट शहर और आसपास के क्षेत्रों में नई बस्तियां तेजी से बसती जा रही हैं। नतीजा ये है कि इन कॉलोनियों में न रास्तों की सुविधा है और न ही जल निकासी के साधन हैं।
ले-आउट पास न होने से कॉलोनियों में जल निकासी और रास्तों की समस्या गंभीर है। रास्ते ऐसे हैं कि एक वाहन खड़ा हो जाए तो दूसरे का निकला मुश्किल हो जाता है। शहर का कुछ हिस्सा बाढ़ प्रभावित है। इस इलाके में भी आवासीय कॉलोनी बनाई गई हैं। जिले के कई क्षेत्रों में नई कॉलोनियां बन गई हैं। साथ ही कई जगहों पर प्लाटिंग की जा रही है। प्रशासन की मिलीभगत के चलते बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इन दिनों आधा दर्जन से अधिक आवासीय कॉलोनियां का अस्तित्व खतरे में है।
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अधिकांश मकानों का नक्शा नहीं
विनियमिती क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग कर बने अधिकांश मकानों का नक्शा स्वीकृत नहीं है। इसके बावजूद अधिकारी कार्रवाई करने से परहेज कर रहे हैं। मानों जैसे इनके ही देखरेख में यह कार्य हो रहे हैं। लोग भी बिना नक्शा पास कराए ही मनमाने तरीके से निर्माण करा रहे हैं। इससे लाखों के राजस्व की चपत भी लग रही है।
नहीं मिलती है पालिका की सुविधा
नगर पालिका परिषद में वर्तमान में 25 वार्ड हैं। सफाई व्यवस्था के नाम पर नगर पालिका के पास जो व्यवस्था हैं, वह शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने में नाकाफी है। पिछले दो दशकों में शहर का दायरा बढ़ा, कई गांव खुद शामिल हुए। लेकिन नगर पालिका यहां सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रही है। करीब ढाई साल पहले नपा प्रशासन ने कुछ गांवों को नपा में शामिल करने का प्रस्ताव बनाया था, इसकी कवायद शायद ही आज तक पूरी हुई।
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24 वर्ष पुरानी औरैया नगर पालिका से लगे क्षेत्रों में तेजी से निर्माण कार्य चल रहे हैं। शहर की सीमाएं 24 साल पुरानी हैं। तब से अब तक शहर की आबादी और दायरा दोनों ही दो गुने हो गए हैं। बिना लेआउट शहर और आसपास के क्षेत्रों में नई बस्तियां तेजी से बसती जा रही हैं। नतीजा ये है कि इन कॉलोनियों में न रास्तों की सुविधा है और न ही जल निकासी के साधन हैं।
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ले-आउट पास न होने से कॉलोनियों में जल निकासी और रास्तों की समस्या गंभीर है। रास्ते ऐसे हैं कि एक वाहन खड़ा हो जाए तो दूसरे का निकला मुश्किल हो जाता है। शहर का कुछ हिस्सा बाढ़ प्रभावित है। इस इलाके में भी आवासीय कॉलोनी बनाई गई हैं। जिले के कई क्षेत्रों में नई कॉलोनियां बन गई हैं। साथ ही कई जगहों पर प्लाटिंग की जा रही है। प्रशासन की मिलीभगत के चलते बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इन दिनों आधा दर्जन से अधिक आवासीय कॉलोनियां का अस्तित्व खतरे में है।
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अधिकांश मकानों का नक्शा नहीं
विनियमिती क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग कर बने अधिकांश मकानों का नक्शा स्वीकृत नहीं है। इसके बावजूद अधिकारी कार्रवाई करने से परहेज कर रहे हैं। मानों जैसे इनके ही देखरेख में यह कार्य हो रहे हैं। लोग भी बिना नक्शा पास कराए ही मनमाने तरीके से निर्माण करा रहे हैं। इससे लाखों के राजस्व की चपत भी लग रही है।
नहीं मिलती है पालिका की सुविधा
नगर पालिका परिषद में वर्तमान में 25 वार्ड हैं। सफाई व्यवस्था के नाम पर नगर पालिका के पास जो व्यवस्था हैं, वह शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने में नाकाफी है। पिछले दो दशकों में शहर का दायरा बढ़ा, कई गांव खुद शामिल हुए। लेकिन नगर पालिका यहां सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रही है। करीब ढाई साल पहले नपा प्रशासन ने कुछ गांवों को नपा में शामिल करने का प्रस्ताव बनाया था, इसकी कवायद शायद ही आज तक पूरी हुई।