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Auraiya News: बच्चों की सेहत से खिलवाड़, पानी की जांच में प्राइवेट स्कूल फेल
Fri, 30 Jan 2026 11:05 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Fri, 30 Jan 2026 11:05 PM IST
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औरैया। जिले के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सेहत खतरे में है। असल में यह स्कूल पानी की जांच नहीं करा रहे हैं।
जल निगम की मिहौली स्थित प्रयोगशाला के रिकॉर्ड बता रहे हैं कि जिले के कुल 842 प्राइवेट स्कूलों में से अब तक केवल चार स्कूलों ने ही पानी की जांच कराई है। शेष स्कूलों ने न तो नियमों का पालन किया और न ही बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दी।
विशेषज्ञों के अनुसार पानी की गुणवत्ता में 18 अहम पैरामीटरों की जांच होती है, इसमें बैक्टीरिया, फ्लोराइड, आयरन, पीएच वैल्यू, टीडीएस सहित कई तत्वों की पुष्टि की जाती है। इस पूरी जांच का शुल्क मात्र 400 रुपये है। इसके बावजूद निजी स्कूल संचालक बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। जबकि हर छह महीने में जांच कराने का नियम है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन स्कूलों ने जांच नहीं कराई होगी, उन पर कार्रवाई होगी। स्कूलों के प्रबंधन को जल्द पानी की जांच कराने के लिए निर्देशित किया गया है।
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वहीं, चिकित्सकों का कहना है कि दूषित पानी पीने से बच्चों में पेट संबंधी बीमारियां, टाइफाइड, पीलिया, दस्त, उल्टी, त्वचा रोग और संक्रमण जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक अशुद्ध पानी पीने से किडनी और लीवर पर भी असर पड़ सकता है।
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सरकारी स्कूलों पर नियम लागू नहीं
हैरानी की बात यह है कि सरकारी और परिषदीय स्कूलों पर यह नियम लागू नहीं होता, लेकिन इसके बावजूद पूर्व माध्यमिक विद्यालय बूढ़ादाना के प्रधानाचार्य निर्मल कुमार पांडे ने निजी खर्च से पानी की जांच कराई। उन्होंने अन्य स्कूलों को भी इसके लिए प्रेरित करने का प्रयास किया है।
सभी प्राइवेट स्कूलों को पानी की जांच कराना अनिवार्य है। कितनों ने जांच नहीं कराई, इसकी जानकारी की जा रही है। पत्र लिखकर जल्द पेयजल की जांच कराने को निर्देशित किया जा रहा है।
- प्रदीप कुमार मौर्य, जिला विद्यालय निरीक्षक
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जल निगम की मिहौली स्थित प्रयोगशाला के रिकॉर्ड बता रहे हैं कि जिले के कुल 842 प्राइवेट स्कूलों में से अब तक केवल चार स्कूलों ने ही पानी की जांच कराई है। शेष स्कूलों ने न तो नियमों का पालन किया और न ही बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दी।
विशेषज्ञों के अनुसार पानी की गुणवत्ता में 18 अहम पैरामीटरों की जांच होती है, इसमें बैक्टीरिया, फ्लोराइड, आयरन, पीएच वैल्यू, टीडीएस सहित कई तत्वों की पुष्टि की जाती है। इस पूरी जांच का शुल्क मात्र 400 रुपये है। इसके बावजूद निजी स्कूल संचालक बच्चों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। जबकि हर छह महीने में जांच कराने का नियम है।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन स्कूलों ने जांच नहीं कराई होगी, उन पर कार्रवाई होगी। स्कूलों के प्रबंधन को जल्द पानी की जांच कराने के लिए निर्देशित किया गया है।
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वहीं, चिकित्सकों का कहना है कि दूषित पानी पीने से बच्चों में पेट संबंधी बीमारियां, टाइफाइड, पीलिया, दस्त, उल्टी, त्वचा रोग और संक्रमण जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक अशुद्ध पानी पीने से किडनी और लीवर पर भी असर पड़ सकता है।
सरकारी स्कूलों पर नियम लागू नहीं
हैरानी की बात यह है कि सरकारी और परिषदीय स्कूलों पर यह नियम लागू नहीं होता, लेकिन इसके बावजूद पूर्व माध्यमिक विद्यालय बूढ़ादाना के प्रधानाचार्य निर्मल कुमार पांडे ने निजी खर्च से पानी की जांच कराई। उन्होंने अन्य स्कूलों को भी इसके लिए प्रेरित करने का प्रयास किया है।
सभी प्राइवेट स्कूलों को पानी की जांच कराना अनिवार्य है। कितनों ने जांच नहीं कराई, इसकी जानकारी की जा रही है। पत्र लिखकर जल्द पेयजल की जांच कराने को निर्देशित किया जा रहा है।
- प्रदीप कुमार मौर्य, जिला विद्यालय निरीक्षक