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दूसरी किस्त के इंतजार में अटकी योजना
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Mon, 04 Apr 2016 11:17 PM IST
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बजट की दरकार- बंद पड़ा ट्यूबवेल
- फोटो : amar ujala beuro
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शहर में पेयजल आपूर्ति गड़बड़ाने की संभावना से पालिका प्रशासन चिंतित है। उम्मीद के तहत इस साल पेयजल पुनर्गठन योजना में कुछ ट्यूबवेल तैयार होेने थे, लेकिन दूसरी किस्त के अभाव में पूरी योजना अटकी है। जल निगम के एक साथ पूरी योजना पर काम कराए जाने से 20 करोड़ की प्रथम किस्त खर्च होने के बाद भी एक भी ट्यूबवेल तैयार नहीं हो सका हैं। ऐसे में पालिका ने बिना कार्य योजना के खर्च किए गए करोड़ों रुपये के फंस जाने पर कार्यदाई संस्था जल निगम के अधिकारियों को आड़े हाथों ले लिया है।
केंद्र और प्रदेश सरकार की 40 करोड़ बजट की संयुक्त पेयजल पुनर्गठन योजना में कार्यदाई संस्था जल निगम की ओर से बिना कार्य योजना के निर्माण शुरू कराए जाने से पालिका प्रशासन आहत है। पालिका प्रशासन की ओर से लगभग डेढ़ साल पूर्व योजना के निर्माण को प्रथम किस्त के रूप में शासन से भेजे गए 20 करोड़ रुपये कार्यदाई संस्था जल निगम को जारी किए गए थे। जल निगम की ओर से उक्त बजट से छह ओवरहेड टैंक, 17 ट्यूबवेल व 175 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाए जाने पर एक साथ काम शुरू करा दिया। इसके चलते पूरी योजना अधर में लटक गई। अब हालात यह है कि न तो ओवरहेड टैंक ही तैयार हैं और न ही कोई ट्यूबवेल।
इधर गर्मी का मौसम शुरू होते ही हैंडपंप से लेकर पालिका के ट्यूबवेलों में जल स्तर गिर जाने से समस्या खड़ी हो गई है। ऐसी संकट की घड़ी में पालिका को पेयजल पुनर्गठन योजना के तहत निर्माणाधीन पड़े ट्यूबवेलों के पूरा न होने की कमी खलने लगी। पालिका प्रशासन ने एक भी ट्यूबवेल न शुरू कर पाने पर जल निगम के अधिकारियों से नाराजगी जताई। वहीं जल निगम विभाग की ओर से योजना में मिलने वाली दूसरी किस्त में हो रही देरी पर पालिका प्रशासन से बजट देकर सहयोग करने की अपील की है। लेकिन पालिका ने इंकार कर दिया। ऐसे में पालिका और जल निगम की रार में पेयजल पुनर्गठन योजना फंस गई है।
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पालिका की ओर से योजना में 20 करोड़ की धनराशि जल निगम को इसलिए दी गई थी ताकि वह कार्य योजना में गर्मियों के इन दिनों तक शहर वासियों को पेयजलापूर्ति की समस्या को दूर करा सके। जबकि अधिकारियों ने अपनी मनमानी चलाते हुए सभी काम एक साथ शुरू करा दिए। जिससे प्रथम किस्त को समाप्त हो गई पर खर्च की गई। इस गर्मी में धनराशि शहरवासियों के काम न आ सकी।
राधा तिवारी, अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका
पालिका प्रशासन की यह बात सही है कि एक साथ पूरी योजना पर काम शुरू नहीं कराना चाहिए था। लेकिन पूर्व एक्सईएन की कार्य योजना से जो समस्या हो रही है उसमें यदि पालिका प्रशासन थोड़ा सहयोग कर दे और किस्त आने तक तीस लाख रुपये की मदद कर दें तो लगभग छह ट्यूबवेल संचालित कराकर जनता को पेयजलापूर्ति कराई जा सकती है। अन्यथा पूरी योजना यों ही फंसी रहेगी। अब इसमें पालिका प्रशासन को ही निर्णय लेना है।
देवेंद्र सिंह, एक्सईएन, जल निगम
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केंद्र और प्रदेश सरकार की 40 करोड़ बजट की संयुक्त पेयजल पुनर्गठन योजना में कार्यदाई संस्था जल निगम की ओर से बिना कार्य योजना के निर्माण शुरू कराए जाने से पालिका प्रशासन आहत है। पालिका प्रशासन की ओर से लगभग डेढ़ साल पूर्व योजना के निर्माण को प्रथम किस्त के रूप में शासन से भेजे गए 20 करोड़ रुपये कार्यदाई संस्था जल निगम को जारी किए गए थे। जल निगम की ओर से उक्त बजट से छह ओवरहेड टैंक, 17 ट्यूबवेल व 175 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाए जाने पर एक साथ काम शुरू करा दिया। इसके चलते पूरी योजना अधर में लटक गई। अब हालात यह है कि न तो ओवरहेड टैंक ही तैयार हैं और न ही कोई ट्यूबवेल।
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इधर गर्मी का मौसम शुरू होते ही हैंडपंप से लेकर पालिका के ट्यूबवेलों में जल स्तर गिर जाने से समस्या खड़ी हो गई है। ऐसी संकट की घड़ी में पालिका को पेयजल पुनर्गठन योजना के तहत निर्माणाधीन पड़े ट्यूबवेलों के पूरा न होने की कमी खलने लगी। पालिका प्रशासन ने एक भी ट्यूबवेल न शुरू कर पाने पर जल निगम के अधिकारियों से नाराजगी जताई। वहीं जल निगम विभाग की ओर से योजना में मिलने वाली दूसरी किस्त में हो रही देरी पर पालिका प्रशासन से बजट देकर सहयोग करने की अपील की है। लेकिन पालिका ने इंकार कर दिया। ऐसे में पालिका और जल निगम की रार में पेयजल पुनर्गठन योजना फंस गई है।
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पालिका की ओर से योजना में 20 करोड़ की धनराशि जल निगम को इसलिए दी गई थी ताकि वह कार्य योजना में गर्मियों के इन दिनों तक शहर वासियों को पेयजलापूर्ति की समस्या को दूर करा सके। जबकि अधिकारियों ने अपनी मनमानी चलाते हुए सभी काम एक साथ शुरू करा दिए। जिससे प्रथम किस्त को समाप्त हो गई पर खर्च की गई। इस गर्मी में धनराशि शहरवासियों के काम न आ सकी।
राधा तिवारी, अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका
पालिका प्रशासन की यह बात सही है कि एक साथ पूरी योजना पर काम शुरू नहीं कराना चाहिए था। लेकिन पूर्व एक्सईएन की कार्य योजना से जो समस्या हो रही है उसमें यदि पालिका प्रशासन थोड़ा सहयोग कर दे और किस्त आने तक तीस लाख रुपये की मदद कर दें तो लगभग छह ट्यूबवेल संचालित कराकर जनता को पेयजलापूर्ति कराई जा सकती है। अन्यथा पूरी योजना यों ही फंसी रहेगी। अब इसमें पालिका प्रशासन को ही निर्णय लेना है।
देवेंद्र सिंह, एक्सईएन, जल निगम