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Auraiya News: लाभार्थियों के खातों में नहीं भगवान के पास जा रही थी पेंशन
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औरैया। समाज कल्याण विभाग में तीन साल के अंतराल में हुए गबन में सरकारी धन का जमकर बंदरबांट हुआ था। लाभार्थियों को सिर्फ कागजों में दिखाया जा रहा था जबकि उनकी हिस्से की पेंशन की रकम किसी दूसरे के खाते में भेजी जा रही थी। गबन की परतें तब खुली जब लाभार्थियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर लाभ न मिलने की गुहार लगाई थी। कई लाभार्थियों के साथ ऐसा होने पर जांच कराई तो 33 लाख से अधिक का पेंशन घोटाला पकड़ में आया था।
वर्ष 2018 से 2020 तक वृद्धावस्था पेंशन योजना में 251 लाभार्थियों के खाते बदलकर दूसरों के खाते में योजना का लाभ भेजा गया। तीन साल में फर्जीवाड़े की धनराशि 33.47 लाख रुपये पार कर गई थी। शिकायत पर जब मामले की जांच शुरू की गई तो पता चला कि आधे आवेदन मैन्युअल रूप से सत्यापन के लिए भेजे गए थे। यहीं से लाभार्थियों के बैंक खाते बदलने का खेल शुरू किया किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीभगवान सिंह की पेंशन से रिकवरी का फरमान जारी किया गया है।
अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न मद में भी हुई थी गड़बड़ी
कुछ इसी तरह से अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न मद में भी गबन हुआ था। इसमें बिधूना के लोहियानगर निवासी शिवम सिंह ने मुद्दा उठाया था। साल 2021-22 में यह सेंधमारी की गई थी। इसमें विभाग के कर्मियों के रिश्तेदारों के बैंक खाते लाभार्थियों की जगह पर लगा दिए गए थे। तकरीबन 25 लाख की हेराफेरी हुई थी। मामले में दिबियापुर थाना में रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही रिकवरी जारी हुई थी।
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अब योजनाओं के लाभार्थियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था कर दी गई है। आधार से लेकर अन्य मानकों के आ जाने से किसी भी तरह की हेराफेरी की संभावना खत्म हो गई है।
-इंद्रा सिंह, समाज कल्याण अधिकारी
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वर्ष 2018 से 2020 तक वृद्धावस्था पेंशन योजना में 251 लाभार्थियों के खाते बदलकर दूसरों के खाते में योजना का लाभ भेजा गया। तीन साल में फर्जीवाड़े की धनराशि 33.47 लाख रुपये पार कर गई थी। शिकायत पर जब मामले की जांच शुरू की गई तो पता चला कि आधे आवेदन मैन्युअल रूप से सत्यापन के लिए भेजे गए थे। यहीं से लाभार्थियों के बैंक खाते बदलने का खेल शुरू किया किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीभगवान सिंह की पेंशन से रिकवरी का फरमान जारी किया गया है।
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अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न मद में भी हुई थी गड़बड़ी
कुछ इसी तरह से अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न मद में भी गबन हुआ था। इसमें बिधूना के लोहियानगर निवासी शिवम सिंह ने मुद्दा उठाया था। साल 2021-22 में यह सेंधमारी की गई थी। इसमें विभाग के कर्मियों के रिश्तेदारों के बैंक खाते लाभार्थियों की जगह पर लगा दिए गए थे। तकरीबन 25 लाख की हेराफेरी हुई थी। मामले में दिबियापुर थाना में रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही रिकवरी जारी हुई थी।
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अब योजनाओं के लाभार्थियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था कर दी गई है। आधार से लेकर अन्य मानकों के आ जाने से किसी भी तरह की हेराफेरी की संभावना खत्म हो गई है।
-इंद्रा सिंह, समाज कल्याण अधिकारी