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पातेपुर में फैला संक्रमण, 100 से ज्यादा बीमार
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sat, 28 Nov 2015 11:30 PM IST
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सदर तहसील के गांव पातेपुर में संक्रमण फैलने से 100 से अधिक ग्रामीण बीमार है। करीब 25 मरीजों को सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इधर संक्रमण के विकराल रूप लेने के बाद आठवें दिन स्वास्थ्य टीम गांव पहुंची। टीम ने दवा बांटने के साथ 35 लोगों के खून की जांच करवाई। मरीजों ने लगातार बुखार आने, जोड़ों में दर्द और कमजोरी की शिकायत की है।
शनिवार दोपहर बाद गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम ने प्राथमिक विद्यालय में डेरा डाला। कैंप में पहुंचे डाक्टरों ने गांव में बीमार मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। ग्रामीण ग्रामीण हरिश्चंद्र, जितवार सिंह ने बताया कि पिछले आठ दिन में गांव में लोगों को बुखार आ रहा है।
दो दिनों तक तो ग्रामीण बीमारी को समझ ही नहीं पाए। गांव में 100 से अधिक लोग बुखार, जोड़ों के दर्द, कमजोरी आदि से पीड़ित है। शिविर में उपचार कराने के लिए राधा पत्नी संदीप, अनीत, रामबेटी, अंजली, सोनू, अंजली, सहदेवी, टिंकू, रामकिशोरी, प्रताप सिंह, हरिश्चंद्र, साधना, राखी, सचिन,आशू, जिलावर सिंह, वीर बहादुर, किरन देवी, अजयप्रताप, अनुज, सौरभ, दीपक, गौरव, बेबी, राम गुप्ता समेत लगभग 100 से अधिक लोग आए।
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स्वास्थ्य टीम ने मरीजों की जांच के बाद उन्हें दवाएं बांटी। साथ ही 35 मरीजों के रक्त की जांच के लिए स्लाइड बनावाईं। स्वास्थ्य टीम में डा. आजाद बाबू, डा. वेद प्रकाश गुप्ता, डा. महेश चंद्र, डा. पंकज पार्या, डा. ब्रजेश, पर्यवेक्षक राजदेव, सुनीता, राजेश पाठक शामिल रहे। वहीं ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव से बीमार लोग लगातार जिला अस्पताल पहुंचते रहे, लेकिन किसी ने गांव में फैली बीमारी की ओर ध्यान नहीं दिया।
गांव से मिली सूचना के आधार पर मरीजों के परीक्षण के लिए स्वास्थ्य टीम को भेजा गया है। स्वास्थ्य टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों की जांच शुरू कर दी है।
एसबी मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी
गांव में कई लोग वाइरल से पीड़ित मिले हैं। इसमें 35 लोगों की स्लाइड बनाई गई है। यह स्लाइड जांच के लिए जाएगी। इसके बाद ही ठीक ढंग से मरीजों का उपचार हो सकेगा। अन्य मरीजों को संक्रमण के आधार पर दवा का वितरण किया जा रहा है।
डा. आजाद बाबू, जिला मलेरिया अधिकारी
जोडों में दर्द और सूजन बनी मुसीबत
औरैया। जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे मरीजों में बीमारी के एक जैसे लक्षण मिल रहे हैं। बीमार अनीता व अजय ने बताया कि पहले सर्दी देकर बुखार आता है। इसके बाद जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। पैरों में सूजन भी आ जाती है। इससे चलना तो दूर पैरों पर खड़ा होना तक मुश्किल हो रहा है।
हर घर में निकल रहा मरीज
औरैया। पातेपुर गांव में संक्रमण इस कदर हावी है कि गांव के लगभग हर घर में एक मरीज निकल रहा है। वहीं कई घर ऐसे भी है जहां पूरा परिवार संक्रमण की चपेट में है। गांव के इंद्रपाल सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, वीर बहादुर का पूरा परिवार बीमारी की चपेट में है। ऐसे में घर में लोगों को खाने-पीने का संकट तक पैदा हो गया है।
बीमारों की संख्या दर्शाने में खेल
औरैया। गांव मे एक सैकड़ा से अधिक लोग बीमार है, लेकिन स्वास्थ्य टीम के रजिस्टर में देर शाम तक मात्र 48 नाम ही दर्ज पाए गए। बीमारों की संख्या कम लिखी होने पर ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव के प्रत्येक घर की जांच कराई जाए तो स्वास्थ्य टीम के रजिस्टर की हकीकत खुलकर सामने आ जाएगी।
गांव में फैली गंदगी बनी मुसीबत
औरैया। गांव में फैले संक्रमण की मुख्य वजह गांव में फैली गंदगी है। गांव में बनी कच्ची व पक्की नालियों में भरी गंदगी सड़ांध पैदा कर रही है। वहीं नालियों की महीनों से सफाई न होने के कारण मच्छर पैदा हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान योगेंद्र सिंह सेंगर से कई बार गांव की साफ-सफाई कराने को कहा गया, लेकिन सफाई कर्मी गांव में सफाई करने आता ही नहीं है।
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शनिवार दोपहर बाद गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम ने प्राथमिक विद्यालय में डेरा डाला। कैंप में पहुंचे डाक्टरों ने गांव में बीमार मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। ग्रामीण ग्रामीण हरिश्चंद्र, जितवार सिंह ने बताया कि पिछले आठ दिन में गांव में लोगों को बुखार आ रहा है।
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दो दिनों तक तो ग्रामीण बीमारी को समझ ही नहीं पाए। गांव में 100 से अधिक लोग बुखार, जोड़ों के दर्द, कमजोरी आदि से पीड़ित है। शिविर में उपचार कराने के लिए राधा पत्नी संदीप, अनीत, रामबेटी, अंजली, सोनू, अंजली, सहदेवी, टिंकू, रामकिशोरी, प्रताप सिंह, हरिश्चंद्र, साधना, राखी, सचिन,आशू, जिलावर सिंह, वीर बहादुर, किरन देवी, अजयप्रताप, अनुज, सौरभ, दीपक, गौरव, बेबी, राम गुप्ता समेत लगभग 100 से अधिक लोग आए।
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स्वास्थ्य टीम ने मरीजों की जांच के बाद उन्हें दवाएं बांटी। साथ ही 35 मरीजों के रक्त की जांच के लिए स्लाइड बनावाईं। स्वास्थ्य टीम में डा. आजाद बाबू, डा. वेद प्रकाश गुप्ता, डा. महेश चंद्र, डा. पंकज पार्या, डा. ब्रजेश, पर्यवेक्षक राजदेव, सुनीता, राजेश पाठक शामिल रहे। वहीं ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव से बीमार लोग लगातार जिला अस्पताल पहुंचते रहे, लेकिन किसी ने गांव में फैली बीमारी की ओर ध्यान नहीं दिया।
गांव से मिली सूचना के आधार पर मरीजों के परीक्षण के लिए स्वास्थ्य टीम को भेजा गया है। स्वास्थ्य टीम ने गांव पहुंचकर मरीजों की जांच शुरू कर दी है।
एसबी मिश्रा, मुख्य चिकित्साधिकारी
गांव में कई लोग वाइरल से पीड़ित मिले हैं। इसमें 35 लोगों की स्लाइड बनाई गई है। यह स्लाइड जांच के लिए जाएगी। इसके बाद ही ठीक ढंग से मरीजों का उपचार हो सकेगा। अन्य मरीजों को संक्रमण के आधार पर दवा का वितरण किया जा रहा है।
डा. आजाद बाबू, जिला मलेरिया अधिकारी
जोडों में दर्द और सूजन बनी मुसीबत
औरैया। जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे मरीजों में बीमारी के एक जैसे लक्षण मिल रहे हैं। बीमार अनीता व अजय ने बताया कि पहले सर्दी देकर बुखार आता है। इसके बाद जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। पैरों में सूजन भी आ जाती है। इससे चलना तो दूर पैरों पर खड़ा होना तक मुश्किल हो रहा है।
हर घर में निकल रहा मरीज
औरैया। पातेपुर गांव में संक्रमण इस कदर हावी है कि गांव के लगभग हर घर में एक मरीज निकल रहा है। वहीं कई घर ऐसे भी है जहां पूरा परिवार संक्रमण की चपेट में है। गांव के इंद्रपाल सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, वीर बहादुर का पूरा परिवार बीमारी की चपेट में है। ऐसे में घर में लोगों को खाने-पीने का संकट तक पैदा हो गया है।
बीमारों की संख्या दर्शाने में खेल
औरैया। गांव मे एक सैकड़ा से अधिक लोग बीमार है, लेकिन स्वास्थ्य टीम के रजिस्टर में देर शाम तक मात्र 48 नाम ही दर्ज पाए गए। बीमारों की संख्या कम लिखी होने पर ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव के प्रत्येक घर की जांच कराई जाए तो स्वास्थ्य टीम के रजिस्टर की हकीकत खुलकर सामने आ जाएगी।
गांव में फैली गंदगी बनी मुसीबत
औरैया। गांव में फैले संक्रमण की मुख्य वजह गांव में फैली गंदगी है। गांव में बनी कच्ची व पक्की नालियों में भरी गंदगी सड़ांध पैदा कर रही है। वहीं नालियों की महीनों से सफाई न होने के कारण मच्छर पैदा हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम प्रधान योगेंद्र सिंह सेंगर से कई बार गांव की साफ-सफाई कराने को कहा गया, लेकिन सफाई कर्मी गांव में सफाई करने आता ही नहीं है।