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प्रवासी पक्षियों के कलरव से गूंज रहा पंचनद
अमर उजाला ब्यूरो, औरैया
Updated Wed, 24 Dec 2014 11:38 PM IST
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बीहड़ी क्षेत्र में यमुना, चंबल, सिंधु, पहुज और क्वारी नदियों के संगम स्थल पंचनद पर मौसम का मिजाज बदलते ही प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। यह मेहमान पक्षी साइबेरिया, कजाकिस्तान, तुर्किस्तान, नवाया, जेम्लया, कोलादीप समेत ठंडे स्कैंडनेवियाई देशों से हर साल आकर पंचनद को गुलजार करते हैं। यमुना और उसकी सहायक नदियों की बीच धारा में बने बालू के टापू पर प्रवासी पक्षियों के झुंड के झुंड पानी में किलोल करते देखे जाते हैं। पंचनद क्षेत्र में आने वाले प्रवासी पक्षियों में सोवलर, रेड किड कोर्डर, स्पोविल्डर्स, गार्गेनी, मर्गेनियर, एनोसिट, कोमनक्रीन, डेमे सिलक्रीन, वेल्डर्स ग्रीन टेन, फ्लोवर लिटिल, रिंग फ्लोवर, स्नाइफ, बेरहसी, हवासील, बार हेड्रिड, स्पूल विलहोर्न और कारमोरट आदि सैलानियों का मन मोह लेते हैं।
ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट पंचनद क्षेत्र छह माह तक गूंजता रहता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जब ठंडे देशों में झील, पोखर और नदियां जमने लगती हैं,तब प्रवासी पक्षी अपने ठिकानों, भोजन के लिए खतरा महसूस करने लगते हैं। इससे प्रवासी पक्षी अक्तूबर से मार्च तक पंचनद में डेरा जमाए रहते हैं।
डा. राजीव चौहान, जैव विविधता कार्यक्रम विशेषज्ञ ( सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर)
भारत का प्रकृति से गहरा नाता है। प्राचीन ग्रंथों में प्रकृति को शांति और आनंद का प्रतीक और ध्यान, चिंतन का स्थान बताया गया है। पंचनद क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि में विश्व में अद्वितीय है।
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भगवत स्वरूप विश्नोई , पर्यावरणविद्
भारतीय संस्कृति विदेशी मानव हो या पक्षी सभी का सम्मान करती हैं। बौद्ध भिक्षु फाहियान और हेंनसांग शांति का संदेश देने आए थे। प्रवासी पक्षी भी देश के पर्यावरण को संतुलित और खुशनुमा बना देते हैं।
कौशल किशोर पांडेय , वरिष्ठ समाजसेवी
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ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट पंचनद क्षेत्र छह माह तक गूंजता रहता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जब ठंडे देशों में झील, पोखर और नदियां जमने लगती हैं,तब प्रवासी पक्षी अपने ठिकानों, भोजन के लिए खतरा महसूस करने लगते हैं। इससे प्रवासी पक्षी अक्तूबर से मार्च तक पंचनद में डेरा जमाए रहते हैं।
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डा. राजीव चौहान, जैव विविधता कार्यक्रम विशेषज्ञ ( सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर)
भारत का प्रकृति से गहरा नाता है। प्राचीन ग्रंथों में प्रकृति को शांति और आनंद का प्रतीक और ध्यान, चिंतन का स्थान बताया गया है। पंचनद क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि में विश्व में अद्वितीय है।
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भगवत स्वरूप विश्नोई , पर्यावरणविद्
भारतीय संस्कृति विदेशी मानव हो या पक्षी सभी का सम्मान करती हैं। बौद्ध भिक्षु फाहियान और हेंनसांग शांति का संदेश देने आए थे। प्रवासी पक्षी भी देश के पर्यावरण को संतुलित और खुशनुमा बना देते हैं।
कौशल किशोर पांडेय , वरिष्ठ समाजसेवी