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पर्यावरण के प्राण ले रही पालीथिन
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sat, 19 Dec 2015 10:56 PM IST
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पर्यावरण के प्राण निकाल रही पालीथिन पर कोर्ट की फटकार के बाद प्रदेश सरकार ने अधिसूचना भले ही जारी कर दी हो, लेकिन जिले में पालीथिन की रोक का कोई असर नहीं दिखाई देता है। दुकानदार बेखौफ पालीथिन का प्रयोग कर रहे हैं। पालीथिन के थोक विक्रेताओं की माने तो जिले में प्रति दिन 5-7 क्विंटल पालीथिन की खपत है। इसमें सर्वाधिक पालीथिन की खपत परचून की दुकानों में है।
पशुओं को मार रहे है प्लास्टिक बैग
पालीथिन का उपयोग कर उसे सड़कों पर फेंक दिया जाता है। इन पालीथिन में रखे खाद्य पदार्थों को खाने में पशु पालीथिन भी खा जाते हैं। कूडे़ के ढेर में पड़ी पालीथिन से पशुओं को पेट की बीमारियां हो रही हैं। जो कि बाद में उनकी मौत का कारण बनता है।
सालों में खत्म होती है पालीथिन
आम तौर पर प्लास्टिक बैग सामान्य तरीके से विघटित नहीं होते हैं। प्लास्टिक के बैग को विघटित होने में 20 से 100 वर्ष तक का समय लग सकता है। यह पालीथिन कांच से भी ज्यादा खतरनाक है। हमें इसका प्रयोग तत्काल बंद कर देना चाहिए।
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डा. केके माथुर (प्रोफेसर, रसायन विज्ञान)
घाटों पर पालीथिन बीन दिया संदेश
औरैया। पर्यावरण को बचाने के लिए जिले में एक विचित्र पहल स्वयं सेवी संस्था अपना काम कर रही है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सचेत यह संस्था मरघट को साफ सुधरा बनाने तथा पालीथिन आदि से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रति सचेत कर रही है। संस्था के पदाधिकारी आनंद नाथ गुप्ता ने बताया कि हमें हर हाल में पर्यावरण को स्वच्छ रखना है। वह घाटों की सफाई के साथ सुविधाओं दे रहे है। पालीथिन का प्रयोग पर्यावरण ही नहीं जीवन के लिए भी घातक है। हमें इससे बचना होगा।
शुद्घ प्लास्टिक दाने से बनी पॉलीथिन की मोटाई का मानक 40 माइक्रान होता है। इसके बाद रीसाइकलिंग करते 30 एम, 20 एम व 10 एम मोटाई की पालीथिन का निर्माण होता है। इसमें रंग डालने से स्थिति और खराब हो जाती है।
विनय अहूजा (प्लास्टिक उद्यमी, कानपुर)
पॉलीथिन की थैली व प्लास्टिक के कप में चाय पीने से कैंसर आदि की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसमें हाइड्रो कार्बन होता है। पॉलीथिन को जलाने से पैदा धुआं विषैला होता है जो सांस के जरिए शरीर में जाता है। इससे अस्थमा होने की आशंका बढ़ जाती है।
- डा. केके द्विवेदी (फिजीशियन)
पॉलीथिन के क्या है विकल्प
- कपड़े से बना सिला हुआ थैला हमेशा अपने पास रखें।
- कार, बाइक और स्कूटी की डिग्गी में रखें सामान।
- नायलान, जूट व मोटे कागज के बड़े लिफाफे काम में लाएं।
पालीथीन रोक से फायदे
- नाले, नालियां चोक होने की समस्या से निजात मिलेगी।
- जमीन तले दबने से उर्वरा शक्ति कम होने की समस्या।
- पानी में घुलकर घातक केमिकल शरीर में पहुंचा रहे हैं।
- तालाबों में अत्याधिक पालीथिन पड़ी होने से वाटर रीचार्ज की समस्या।
पॉलीथिन पर प्रत्येक दशा में रोक लगाई जाएगी। गुणवत्ता विहीन पालीथिन बाजार में बिकने नहीं दी जाएगी। दुकानदार ऐसी पालीथिन का प्रयोग स्वयं बंद कर दें। उपभोक्ता भी सचेत हो। पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहयोग करें।
माला श्रीवास्तव (डीएम औरैया)
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पशुओं को मार रहे है प्लास्टिक बैग
पालीथिन का उपयोग कर उसे सड़कों पर फेंक दिया जाता है। इन पालीथिन में रखे खाद्य पदार्थों को खाने में पशु पालीथिन भी खा जाते हैं। कूडे़ के ढेर में पड़ी पालीथिन से पशुओं को पेट की बीमारियां हो रही हैं। जो कि बाद में उनकी मौत का कारण बनता है।
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सालों में खत्म होती है पालीथिन
आम तौर पर प्लास्टिक बैग सामान्य तरीके से विघटित नहीं होते हैं। प्लास्टिक के बैग को विघटित होने में 20 से 100 वर्ष तक का समय लग सकता है। यह पालीथिन कांच से भी ज्यादा खतरनाक है। हमें इसका प्रयोग तत्काल बंद कर देना चाहिए।
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डा. केके माथुर (प्रोफेसर, रसायन विज्ञान)
घाटों पर पालीथिन बीन दिया संदेश
औरैया। पर्यावरण को बचाने के लिए जिले में एक विचित्र पहल स्वयं सेवी संस्था अपना काम कर रही है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सचेत यह संस्था मरघट को साफ सुधरा बनाने तथा पालीथिन आदि से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रति सचेत कर रही है। संस्था के पदाधिकारी आनंद नाथ गुप्ता ने बताया कि हमें हर हाल में पर्यावरण को स्वच्छ रखना है। वह घाटों की सफाई के साथ सुविधाओं दे रहे है। पालीथिन का प्रयोग पर्यावरण ही नहीं जीवन के लिए भी घातक है। हमें इससे बचना होगा।
शुद्घ प्लास्टिक दाने से बनी पॉलीथिन की मोटाई का मानक 40 माइक्रान होता है। इसके बाद रीसाइकलिंग करते 30 एम, 20 एम व 10 एम मोटाई की पालीथिन का निर्माण होता है। इसमें रंग डालने से स्थिति और खराब हो जाती है।
विनय अहूजा (प्लास्टिक उद्यमी, कानपुर)
पॉलीथिन की थैली व प्लास्टिक के कप में चाय पीने से कैंसर आदि की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसमें हाइड्रो कार्बन होता है। पॉलीथिन को जलाने से पैदा धुआं विषैला होता है जो सांस के जरिए शरीर में जाता है। इससे अस्थमा होने की आशंका बढ़ जाती है।
- डा. केके द्विवेदी (फिजीशियन)
पॉलीथिन के क्या है विकल्प
- कपड़े से बना सिला हुआ थैला हमेशा अपने पास रखें।
- कार, बाइक और स्कूटी की डिग्गी में रखें सामान।
- नायलान, जूट व मोटे कागज के बड़े लिफाफे काम में लाएं।
पालीथीन रोक से फायदे
- नाले, नालियां चोक होने की समस्या से निजात मिलेगी।
- जमीन तले दबने से उर्वरा शक्ति कम होने की समस्या।
- पानी में घुलकर घातक केमिकल शरीर में पहुंचा रहे हैं।
- तालाबों में अत्याधिक पालीथिन पड़ी होने से वाटर रीचार्ज की समस्या।
पॉलीथिन पर प्रत्येक दशा में रोक लगाई जाएगी। गुणवत्ता विहीन पालीथिन बाजार में बिकने नहीं दी जाएगी। दुकानदार ऐसी पालीथिन का प्रयोग स्वयं बंद कर दें। उपभोक्ता भी सचेत हो। पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहयोग करें।
माला श्रीवास्तव (डीएम औरैया)