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Auraiya News: धान-मक्का और बाजरा पर मड़राया कीटों व रोगों का प्रकोप
Tue, 15 Sep 2026 01:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 15 Sep 2026 01:31 AM IST
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खेतों में लहलहाती धान, मक्का व बाजरे की फसलें। संवाद
औरैया। तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण खरीफ की धान, मक्का और बाजरा की फसल में कीटों व रोगों का खतरा बढ़ गया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह ने किसानों को इसके प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने बताया कि समय पर दवा का प्रयोग और उचित उपाय फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं, अन्यथा किसानों को नुकसान हो सकता है।
फसलों में संकरी व चौड़ी पत्ती खरपतवार के लिए दो बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। रासायनिक नियंत्रण हेतु प्रिटिलाक्लोर 50 फीसदी ईसी 1.5 लीटर या पाइराजोसल्फ्यूरॉन इथाइल 10 फीसदी डब्ल्यूपी 0.15 किग्रा का प्रयोग करें। इसे 500-800 लीटर पानी में घोलकर 2 इंच भरे पानी में रोपाई के 3 से 5 दिन के अंदर छिड़काव करें। पत्ती लपेटक कीट के लिए जैव कीटनाशक एजाडिरेक्टिन 0.15 फीसदी ईसी 2.5 लीटर का उपयोग करें।
इसके विकल्प में कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4जी 18 किग्रा या क्लोरोपायरीफॉस 20 फीसदी ईसी 1.5 लीटर का प्रयोग भी किया जा सकता है। तना छेदक कीट से बचाव के लिए प्रति हेक्टेयर 6-8 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इसके नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 5 फीसदी एससी 1 से 1.5 लीटर का छिड़काव प्रभावी है।
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खैरा रोग के लिए 5 किग्रा जिंक सल्फेट, 20-25 किग्रा यूरिया या 2.5 किग्रा बुझा चूना प्रति हेक्टेयर 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। झोंका रोग के लिए कार्बेन्डाजिम 50 फीसदी डब्ल्यूपी 500 ग्राम या हेक्साकोनाजोल 5 फीसदी ईसी एक लीटर का छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा रोग से बचाव हेतु स्ट्रेप्टोमायसीन सल्फेट 90 फीसदी और टेट्रासाइक्लीन 10 फीसदी का मिश्रण उपयोग करें। एक ग्राम स्ट्रेप्टोमायसीन सल्फेट और टेट्रासाइक्लीन को 10 लीटर पानी में घोलकर दो बार छिड़काव करें।
विभाग ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सहभागी फसल निगरानी व निदान प्रणाली शुरू की है। इस प्रणाली के तहत दो मोबाइल नंबर 9452247111 और 9452257111 जारी किए गए हैं। किसान अपनी फसल संबंधी समस्याएं इन नंबरों पर व्हाट्सएप या एसएमएस के माध्यम से भेज सकते हैं। विभाग द्वारा 48 घंटे के भीतर इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
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फसलों में संकरी व चौड़ी पत्ती खरपतवार के लिए दो बार निराई-गुड़ाई करनी चाहिए। रासायनिक नियंत्रण हेतु प्रिटिलाक्लोर 50 फीसदी ईसी 1.5 लीटर या पाइराजोसल्फ्यूरॉन इथाइल 10 फीसदी डब्ल्यूपी 0.15 किग्रा का प्रयोग करें। इसे 500-800 लीटर पानी में घोलकर 2 इंच भरे पानी में रोपाई के 3 से 5 दिन के अंदर छिड़काव करें। पत्ती लपेटक कीट के लिए जैव कीटनाशक एजाडिरेक्टिन 0.15 फीसदी ईसी 2.5 लीटर का उपयोग करें।
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इसके विकल्प में कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड 4जी 18 किग्रा या क्लोरोपायरीफॉस 20 फीसदी ईसी 1.5 लीटर का प्रयोग भी किया जा सकता है। तना छेदक कीट से बचाव के लिए प्रति हेक्टेयर 6-8 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इसके नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 5 फीसदी एससी 1 से 1.5 लीटर का छिड़काव प्रभावी है।
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खैरा रोग के लिए 5 किग्रा जिंक सल्फेट, 20-25 किग्रा यूरिया या 2.5 किग्रा बुझा चूना प्रति हेक्टेयर 1000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। झोंका रोग के लिए कार्बेन्डाजिम 50 फीसदी डब्ल्यूपी 500 ग्राम या हेक्साकोनाजोल 5 फीसदी ईसी एक लीटर का छिड़काव करें। जीवाणु झुलसा रोग से बचाव हेतु स्ट्रेप्टोमायसीन सल्फेट 90 फीसदी और टेट्रासाइक्लीन 10 फीसदी का मिश्रण उपयोग करें। एक ग्राम स्ट्रेप्टोमायसीन सल्फेट और टेट्रासाइक्लीन को 10 लीटर पानी में घोलकर दो बार छिड़काव करें।
विभाग ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सहभागी फसल निगरानी व निदान प्रणाली शुरू की है। इस प्रणाली के तहत दो मोबाइल नंबर 9452247111 और 9452257111 जारी किए गए हैं। किसान अपनी फसल संबंधी समस्याएं इन नंबरों पर व्हाट्सएप या एसएमएस के माध्यम से भेज सकते हैं। विभाग द्वारा 48 घंटे के भीतर इन समस्याओं का समाधान किया जाएगा।